ईरान के फतेह-2 और खैबर ने इजरायल में मचाई तबाही, आयरन डोम की ‘ढाल’ तक चीर डाली

मिडिल ईस्ट के रण में बारूद की गंध एक बार फिर तेज हो गई है. हालिया चर्चाओं में ईरान का एक नाम सबसे ज्यादा उछल रहा है- ‘फतह-2’ (Fattah-2). दावा किया जा रहा है कि यह ईरान का वो ‘ब्रह्मास्त्र’ है जो 20,000 किलोमीटर प्रति घंटा की रफ्तार से दौड़ता है. और इजरायल की बेहद अभेद्य मानी जाने वाली सुरक्षा घेराबंदी (एयर डिफेंस सिस्टम) को धुआं-धुआं कर सकता है. 

क्या वाकई यह मिसाइल जंग का रुख पलट सकती है? आइए, बिना किसी जटिल तकनीकी जाल में फंसे, इसे समझते हैं.

कैसे काम करता है हाइपरसोनिक मिसाइल सिस्टम?

सबसे पहले तो यह समझें कि यह मिसाइल आखिर इतनी तेज कैसे है. विज्ञान की भाषा में ‘हाइपरसोनिक’ का मतलब है आवाज की गति से 5 गुना (Mach 5) से भी ज्यादा रफ्तार. 20,000 किलोमीटर प्रतिघंटा का मतलब है कि यह मिसाइल करीब Mach 15-16 की स्पीड छू रही है. 

इसके काम करने का तरीका दो चरणों वाला है-पहला, रॉकेट बूस्टर जो इसे अंतरिक्ष के करीब तक पहुंचाता है. दूसरा और सबसे खतरनाक हिस्सा है इसका ‘हाइपरसोनिक ग्लाइड व्हीकल’ (HGV). यह वह हिस्सा है जो असली खेल करता है. 
यह मिसाइल पत्थर की तरह सीधे निशाने पर नहीं गिरती, बल्कि हवा में ‘गोते’ (Manuever) लगाती है. इसका मतलब है कि यह रास्ते में ही अपनी दिशा बदल सकती है, जिससे रडार उसे ट्रैक नहीं कर पाते.

क्या यह ब्रह्मोस से ज्यादा ताकतवर है?

 
अक्सर लोग ब्रह्मोस और फतह-2 की तुलना करते हैं. आइए एक नजर डालते हैं इनकी मुख्य खूबियों पर,
विशेषता ब्रह्मोस (BrahMos) ईरान फतह-2 (Fattah-2)
मिसाइल प्रकार सुपरसोनिक क्रूज मिसाइल हाइपरसोनिक ग्लाइड व्हीकल
अधिकतम रफ्तार 3,700 KMPH (Mach 3) 20,000 KMPH (Mach 15+) 
मुख्य ताकत सटीक निशाना (Precision) रफ्तार और रास्ता बदलना
उपयोग जमीन, हवा और समुद्र से हमला लंबी दूरी के डिफेंस को भेदना

सोर्स: Military Watch Magazine
इस टेबल को देखकर साफ है कि ब्रह्मोस अपनी गजब की सटीकता (Precision) से एक चलती हुई गाड़ी तक को तबाह कर सकती है, जबकि ईरान की मिसाइल का जोर दुश्मन के बड़े एयर डिफेंस सिस्टम को रफूचक्कर करने और उसे भ्रमित (Confuse) करने पर है.

इजरायली डिफेंस शील्ड के लिए बड़ा चैलेंज?

इजरायल के पास सुरक्षा की तीन बड़ी परतें हैं-आयरन डोम, डेविड्स स्लिंग और एरो. ‘आयरन डोम’ तो छोटे-मोटे रॉकेट रोकने में माहिर है, लेकिन फतह-2 जैसी मिसाइलें उसके लिए किसी बुरे सपने जैसी हैं. कारण? मिसाइल का ‘अनप्रेडिक्टेबल’ (अनिश्चित) होना. 

Ctech के मुताबिक रडार को यह बताने के लिए समय चाहिए कि मिसाइल कहां गिरेगी, ताकि एंटी-मिसाइल को वहां भेजा जा सके. लेकिन जब मिसाइल हवा में ही अपना रास्ता बदल ले, तो डिफेंस सिस्टम के पास रिएक्ट करने के लिए कुछ सेकंड का भी समय नहीं बचता. 
इतनी हाई स्पीड पर उसे ट्रैक करना और हवा में ही मार गिराना तकनीकी रूप से बेहद चुनौतीपूर्ण है. हालांकि इजरायल का ‘एरो’ सिस्टम लंबी दूरी की मिसाइलों को रोकने के लिए बना है, लेकिन 20,000 KMPH की गति उनके लिए भी एक कठिन परीक्षा है.

ईरान का यह मिसाइल सिस्टम कौन सा है?

‘फिलिस्तीन क्रॉनिकल्स’ के मुताबिक ईरान ने इसे ‘फतह-2’ (Fattah-2) का नाम दिया है. यह उनके पहले के हाइपरसोनिक प्रोजेक्ट ‘फतह-1’ का अपग्रेडेड वर्जन है, जो हाइपरसोनिक ग्लाइड व्हीकल तकनीक का इस्तेमाल करता है.

20,000 KMPH स्पीड का क्या मतलब है?

सरल भाषा में, इसका मतलब है कि यह मिसाइल प्रति सेकंड लगभग 5.5 किलोमीटर की दूरी तय कर रही है. अगर ईरान से मिसाइल दागी जाए, तो उसे टारगेट तक पहुंचने में चंद मिनट लगेंगे, जिससे दुश्मन को संभलने का मौका तक नहीं मिलेगा.

‘खैबर’ ईरान की दूसरी घातक मिसाइल

ईरान की ‘खैबर’ (Khaibar) मिसाइल, जिसे ‘खैबर-शेकन’ (Khaibar Shekan) के नाम से भी जाना जाता है, ईरान के बढ़ते मिसाइल जखीरे का एक बेहद घातक हिस्सा है. यह एक ‘सॉलिड-फ्यूल’ (Solid-fuel) बैलिस्टिक मिसाइल है, जिसे लंबी दूरी तक मार करने और दुश्मन के डिफेंस सिस्टम को मात देने के लिए डिजाइन किया गया है. 
इसकी सबसे बड़ी खासियत इसकी चपलता (Agility) और वजन में हल्की होने की क्षमता है. जिससे इसे लॉन्च करना और ठिकाने बदलना काफी आसान हो जाता है.

लो-मेंटेनेंस मिसाइल

इस मिसाइल की मारक क्षमता करीब 1,450 किलोमीटर तक बताई जाती है. जो इसे मध्य पूर्व के किसी भी हिस्से में मौजूद बड़े लक्ष्यों को भेदने में सक्षम बनाती है. खैबर की एक प्रमुख खूबी यह है कि इसे दागने के लिए बहुत ज्यादा तैयारी की जरूरत नहीं होती. 
ठोस ईंधन (Solid fuel) के इस्तेमाल के कारण, इसे बहुत कम समय में तैयार करके दागा जा सकता है, जिससे दुश्मन को जवाबी कार्रवाई करने का मौका ही नहीं मिलता.

रॉयटर्स की रिपोर्ट के मुताबिक तकनीकी रूप से, खैबर-शेकन को ‘मैन्युवेरेबल’ (Maneuverable) वॉरहेड के साथ विकसित किया गया है. इसका मतलब है कि उड़ान के अंतिम चरण में यह अपनी दिशा बदल सकती है. यह तकनीक इसे पारंपरिक रडार और एंटी-मिसाइल डिफेंस सिस्टम (जैसे कि आयरन डोम या एरो) के लिए एक बड़ी पहेली बना देती है, क्योंकि यह सीधे रास्ते पर नहीं चलती.

आसान भाषा में कहें, खैबर मिसाइल ईरान की उस रणनीति का हिस्सा है जिसमें ‘स्पीड, सटीकता और छिपकर हमला’ करना सर्वोपरि है. यह मिसाइल न केवल ईरान की रणनीतिक ताकत को दिखाती है. बल्कि क्षेत्र में अन्य देशों के लिए एक बड़ा सुरक्षा जोखिम भी पैदा करती है. इसकी गति और दिशा बदलने की क्षमता इसे रोकना बेहद चुनौतीपूर्ण बना देती है. 

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