UGC रूल्स बनाने वाली कमेटी के अध्यक्ष तो कांग्रेस सांसद हैं, नाम जानते हैं?

यूनिवर्सिटी ग्रांट कमीशन (यूजीसी) की जिस गाइडलाइन को लेकर बवाल मचा है, उसे तैयार करने वाली समिति को कांग्रेस सांसद दिग्विजय सिंह लीड कर रहे थे. कॉलेज-यूनिवर्सिटीज में जातिगत भेदभाव रोकने के प्रावधानों वाले नए नियमों के सामने आने के बाद से सत्ताधारी बीजेपी समाज के एक खास वर्ग के निशाने पर है. हालांकि, 31 सदस्यों वाली उस कमेटी के मेंबर्स में सिर्फ भाजपा के सदस्य नहीं थे. बल्कि, इस लिस्ट में कांग्रेस के 4, समाजवादी पार्टी (सपा) के तीन, तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) के 2, कम्युनिस्ट पार्टी (सीपीएम), द्रविड़ मुनेत्र कड़गम (डीएमके), NCP और एनसीपी (शरद पवार) के एक-एक सदस्य शामिल थे. 16 बीजेपी के और एक आम आदमी पार्टी के पूर्व सदस्य भी कमेटी के मेंबर थे.

आंकड़ों में देखें तो भाजपा विधायकों की संख्या कमेटी में 50 फीसदी से ज्यादा है. यानी किसी भी फैसले के लिए बहुमत की बड़ी ताकत उसी के पास थी. 

कौन-कौन थे कमिटी में?
पहले बात करते हैं राज्यसभा सदस्यों की. कमेटी के अध्यक्ष ही उच्च सदन से आते हैं. कांग्रेस के सांसद दिग्विजय सिंह इस कमेटी को हेड कर रहे थे. उनके अलावा, बिहार से राज्यसभा सांसद बीजेपी नेता भीम सिंह, बंगाल से सीपीएम के विकास रंजन भट्टाचार्य, भाजपा नेता घनश्याम तिवाड़ी, भाजपा नेता रेखा शर्मा, सी सदानंद मास्टर, सिकंदर कुमार, कांग्रेस की सुष्मिता देव, AAP के हरभजन सिंह, एनसीपी नेता और अजित पवार की पत्नी सुनेत्रा पवार, आम आदमी पार्टी की पूर्व नेता और दिल्ली से राज्यसभा सांसद स्वाति मालीवाल कमेटी में शामिल थीं.

लोकसभा से कुल 21 लोग इस कमेटी के मेंबर रहे, जिसमें शामिल हैं: 
भाजपा के अभिजित गंगोपाध्याय, बांसुरी स्वराज, बृजमोहन अग्रवाल, दग्गुबाती पूरनदेश्वरी, दर्शन सिंह चौधरी, हेमांग जोशी, कामाख्या प्रसाद तासा, करण भूषण सिंह, रविशंकर प्रसाद, संबित पात्रा और शोभनाबेन महेंद्रसिंह बरैया.
कांग्रेस के डीएन कुरियाकोसे, वर्षा एकनाथ गायकवाड़, अंगोमचा बिमोल अकोईजाम.
एनसीपी (शरद पवार गुट) के अमर शरदराव काले.
सपा के राजीव राय, जियाउर्रहमान बर्क, जितेंद्र कुमार दोहरे.
तृणमूल कांग्रेस के रचना बनर्जी, कालिपाड़ा सरेन खेरवाल.
डीएमके की थमिझाची थंगापांडियन उर्फ टी. सुमथि.

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