कर्तव्य पथ पर दिखा राजस्थान की ‘उस्ता कला’ का जादू, दिल्ली पुलिस के AI चश्मों ने सबको चौंकाया

आज पूरा देश 77वां गणतंत्र दिवस गर्व और उत्साह के साथ मना रहा है. दिल्ली का ऐतिहासिक ‘कर्तव्य पथ’ भारत की सैन्य ताकत, सांस्कृतिक विविधता और भविष्य के सपनों का गवाह बन रहा है. यह दिन सिर्फ संविधान लागू होने की वर्षगांठ नहीं है, बल्कि दुनिया के सबसे बड़े लोकतंत्र की निरंतर प्रगति का प्रमाण है. सुबह की हल्की धुंध के बीच, तिरंगे के तीन रंग आसमान में अपनी आभा बिखेर रहे हैं. इस वर्ष का समारोह विशेष रूप से ‘विकसित भारत @ 2047’ के हमारे साझा सपने और ‘वंदे मातरम् के 150 वर्ष’ के गौरवशाली ऐतिहासिक सफर को समर्पित है.

परेड का आगाज

समारोह की शुरुआत प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के राष्ट्रीय समर स्मारक (National War Memorial) पहुंचने के साथ हुई. यहां वीर शहीदों को श्रद्धांजलि देने के बाद पीएम कर्तव्य पथ के सलामी मंच पर पहुंचे. सुबह ठीक 10:30 बजे राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू के नेतृत्व में भव्य परेड शुरू हुई, जो करीब 90 मिनट तक चलेगी. आसमान से लेकर जमीन तक, भारत के शौर्य का ऐसा प्रदर्शन होगा कि दुश्मन के दांत खट्टे हो जाएं.

यूरोपीय दिग्गज बने गवाह

भारत की बढ़ती वैश्विक साख का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि इस बार मुख्य अतिथि के तौर पर यूरोपीय परिषद के अध्यक्ष एंटोनियो लुइस सैंटोस दा कोस्टा और यूरोपीय आयोग की अध्यक्ष उर्सुला वॉन डेर लेयेन मौजूद हैं. विश्व के इन बड़े नेताओं की मौजूदगी भारत और यूरोप के मजबूत होते रिश्तों की नई इबारत लिख रही है.

AI चश्मा और 3000 कैमरे

गणतंत्र दिवस पर आतंकी साये की खबरों के बीच दिल्ली पुलिस ने जमीन से आसमान तक अभेद्य घेराबंदी कर दी है. 30,000 से अधिक जवान तैनात हैं. सुरक्षा का आलम यह है कि पुलिसकर्मी अब ‘AI-चश्मों’ (फेस रिकग्निशन सिस्टम) से लैस हैं, जो भीड़ में भी संदिग्धों को पहचान लेंगे. पूरे इलाके में 3,000 हाई-टेक सीसीटीवी कैमरे और 30 कंट्रोल रूम से 24 घंटे लाइव मॉनिटरिंग की जा रही है.

भारत-नेपाल सीमा पर ‘ऑपरेशन अलर्ट’

सिर्फ दिल्ली ही नहीं, बल्कि सरहद पर भी सुरक्षा चक्र मजबूत कर दिया गया है. उत्तर प्रदेश से सटी 551 किलोमीटर लंबी भारत-नेपाल खुली सीमा पर एसएसबी (SSB) हाई अलर्ट पर है. डॉग स्क्वायड, वॉच टावर और फेस डिटेक्टर डिवाइस के जरिए हर आने-जाने वाले की सघन तलाशी ली जा रही है. खुफिया इनपुट हैं कि देश विरोधी तत्व कोई नापाक हरकत कर सकते हैं, जिसे नाकाम करने के लिए जवान नदियों और जंगलों में दिन-रात गश्त कर रहे हैं.

लाल किले पर दिखेगा ‘मिनी इंडिया’

परेड के जोश के साथ ही दिल्ली के लाल किले पर ‘भारत पर्व’ का मेला सजने जा रहा है. 26 से 31 जनवरी तक चलने वाले इस महोत्सव का उद्घाटन लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला और पर्यटन मंत्री गजेंद्र सिंह शेखावत करेंगे. यहां आपको हिंदुस्तान के हर राज्य की कला, संस्कृति और खान-पान का स्वाद एक ही जगह पर मिलेगा.

राजस्थान की झांकी: बीकानेरी ‘उस्ता कला’ का जलवा

कर्तव्य पथ पर राजस्थान की झांकी ने अपनी शाही चमक से सबका मन मोह लिया. इस बार की झांकी में बीकानेर की प्रसिद्ध उस्ता कला का प्रदर्शन किया गया है, जिसमें 24 कैरेट सोने के वर्क और प्राकृतिक रंगों से सजी मेहराबें और कुप्पियां इसे ‘शाही’ लुक दे रही हैं.
झांकी के साथ राजस्थान के कलाकार पारंपरिक ‘गेर नृत्य’ करते हुए चल रहे हैं, जो प्रदेश की जीवंत संस्कृति को दर्शा रहा है. यह झांकी राजस्थान की लोक परंपरा, विविधता और पारंपरिक शिल्प कौशल का गौरवपूर्ण परिचय दे रही है.

हिमाचल की झांकी में दिखा पहाड़ियों का साहस और अटूट देशभक्ति

77वें गणतंत्र दिवस पर हिमाचल प्रदेश की झांकी ने दुनिया को यह दिखाया कि यह प्रदेश न केवल ‘देव भूमि’ (देवताओं की भूमि) है, बल्कि एक महान ‘वीर भूमि’ भी है. झांकी के अगले हिस्से में पारंपरिक हिमाचली टोपी और काठकुणी वास्तुकला की झलक दिखाई गई, जिसके शिखर पर राज्य के चार परमवीर चक्र विजेताओं की प्रतिमाएं स्थापित थीं. 
झांकी के मध्य और पिछले भाग में उन 1,203 वीरता पुरस्कार विजेताओं को श्रद्धांजलि दी गई, जिन्होंने देश की रक्षा में अपना सर्वस्व न्योछावर कर दिया. बर्फ से ढकी पहाड़ियों के बीच तिरंगा फहराते सैनिकों और मेजर सोमनाथ शर्मा से लेकर कैप्टन विक्रम बत्रा तक की वीरगाथाओं ने कर्तव्य पथ पर मौजूद हर भारतीय का सीना गर्व से चौड़ा कर दिया.

पंजाब की झांकी: गुरु तेग बहादुर जी के 350वें शहीदी पर्व को समर्पित

77वें गणतंत्र दिवस पर पंजाब की झांकी सिखों के नौवें गुरु, गुरु तेग बहादुर जी के 350वें शहीदी पर्व को समर्पित थी. ‘हिंद दी चादर’ कहे जाने वाले गुरु साहिब के सर्वोच्च बलिदान को नमन करते हुए इस झांकी में मानवता और धर्म की रक्षा के संदेश को उकेरा गया. झांकी के अगले हिस्से में ‘एक ओंकार’ का घूमता हुआ स्वरूप और आशीर्वाद देते हुए हाथ की मुद्रा दिखाई गई, जो करुणा और साहस का प्रतीक है. 
ट्रेलर पर दिल्ली के ऐतिहासिक गुरुद्वारा सीस गंज साहिब की प्रतिकृति बनाई गई थी, जहाँ रागी सिंहों द्वारा ‘शब्द कीर्तन’ की प्रस्तुति ने पूरे कर्तव्य पथ को भक्तिमय कर दिया. झांकी के किनारों पर गुरु साहिब के अनन्य साथियों—भाई मति दास, भाई सती दास और भाई दयाला जी—के बलिदान को भी दर्शाया गया, जो अटूट विश्वास और मानवीय गरिमा की रक्षा की याद दिलाते हैं.

यूपी की झांकी में ‘एकमुख शिवलिंग’ और आधुनिक उद्योगों का दम

77वें गणतंत्र दिवस पर उत्तर प्रदेश की झांकी में बुंदेलखंड की ऐतिहासिक भव्यता और राज्य के आधुनिक विकास का संगम देखने को मिला. 
झांकी के अगले हिस्से में कालिंजर के प्रसिद्ध ‘एकमुख शिवलिंग’ को दिखाया गया, जो इस क्षेत्र की प्राचीन आध्यात्मिक और वास्तुकला विरासत का प्रतीक है. 
झांकी के मध्य भाग में बुंदेलखंड के पारंपरिक शिल्प, मिट्टी के बर्तन और मनके के काम को ‘एक जनपद एक उत्पाद’ (ODOP) के रूप में प्रदर्शित किया गया. 
इसके साथ ही, अजेय कालिंजर किले की भव्यता और नीलकंठ महादेव मंदिर के दृश्यों ने बुंदेलखंड के गौरवशाली इतिहास को जीवंत कर दिया. 
झांकी का पिछला हिस्सा आधुनिक उत्तर प्रदेश की तस्वीर पेश कर रहा था, जिसमें एक्सप्रेस-वे, औद्योगिक विकास और बुनियादी ढांचे के जरिए तेजी से प्रगति करते राज्य के विजन को दिखाया गया. बुंदेली लोक नर्तकों की प्रस्तुति ने इस पूरी झांकी में उत्साह और संस्कृति के रंग भर दिए.

छत्तीसगढ़ ने झांकी में दिखाया देश का पहला ‘डिजिटल ट्राइबल म्यूजियम’

77वें गणतंत्र दिवस पर छत्तीसगढ़ की झांकी ने अपने वीर आदिवासी नायकों और देश के पहले ‘डिजिटल संग्रहालय’ की झलक पेश की. 
झांकी के अगले हिस्से में 1910 के ‘भूमकाल विद्रोह’ के महानायक वीर गुंडाधुर की प्रतिमा दिखाई गई, जो अन्याय के खिलाफ एकता का प्रतीक थे. 
झांकी के पिछले हिस्से में छत्तीसगढ़ के प्रथम शहीद वीर नारायण सिंह को घोड़े पर सवार दिखाया गया, जिन्होंने 1857 के स्वतंत्रता संग्राम में अपनी सेना के साथ अंग्रेजों का मुकाबला किया था. 
इस झांकी के जरिए नवा रायपुर में बने उस डिजिटल म्यूजियम को भी दर्शाया गया, जिसका उद्घाटन प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने किया था. यह म्यूजियम आदिवासी समाज के 14 बड़े विद्रोहों और उनके बलिदान की कहानियों को आधुनिक तकनीक के जरिए संरक्षित करता है.

गृह मंत्रालय की झांकी: कर्तव्य पथ पर दिखी ‘नए कानूनों’ की झलक

77वें गणतंत्र दिवस पर गृह मंत्रालय की झांकी में देश के नए कानून—भारतीय न्याय संहिता, भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता और भारतीय साक्ष्य अधिनियम—का प्रदर्शन किया गया. झांकी के अगले हिस्से में नए संसद भवन के ऊपर इन तीनों कानून की किताबों को दिखाया गया, जो गुलामी के दौर के कानूनों से आजादी और आधुनिक न्याय प्रणाली की ओर बढ़ते कदम का प्रतीक हैं. झांकी के बीच में फॉरेंसिक एक्सपर्ट और ई-साक्ष्य ऐप (e-Sakshya App) का इस्तेमाल करते पुलिसकर्मियों के जरिए यह संदेश दिया गया कि अब जांच वैज्ञानिक और सबूतों पर आधारित होगी. झांकी के पिछले हिस्से में ‘जन केंद्रित न्याय प्रणाली’ के विचार को दर्शाया गया, जो यह बताता है कि नए कानून अब आम नागरिक के लिए न्याय पाना और भी आसान और पारदर्शी बनाएंगे.

असम की झांकी: कर्तव्य पथ पर दिखा ‘अशारीकांडी’ टेराकोटा कला का जादू

77वें गणतंत्र दिवस पर असम की झांकी में धुबरी जिले के ‘अशारीकांडी’ गांव की प्रसिद्ध टेराकोटा (मिट्टी शिल्प) कला का शानदार प्रदर्शन किया गया. झांकी के अगले हिस्से में मिट्टी के दीये लिए हुए एक विशाल टेराकोटा गुड़िया दिखाई गई, जो असम की पारंपरिक कला का प्रतीक है. पूरी झांकी को एक सुंदर ‘मयूरपंखी नाव’ की शक्ल दी गई थी, जिसमें कलाकारों को ‘हीरामति’ (मिट्टी) से देवी-देवताओं की मूर्तियां बनाते हुए दिखाया गया. झांकी के साथ पारंपरिक मेखला चादर पहने महिला कलाकार लोक गीतों पर थिरकती नजर आईं, जो असम की आत्मनिर्भरता और वैश्विक स्तर पर पहचान बनाती इसकी प्राचीन शिल्प कला को दर्शा रहा था.

झांकी में दिखा गुजरात का शौर्य: मैडम कामा से महात्मा गांधी तक का सफर

77वें गणतंत्र दिवस पर गुजरात की झांकी ने ‘वंदे मातरम’ के 150 साल और नवसारी की वीर सपूत मैडम भीखाजी कामा के योगदान को बेहद खूबसूरती से दर्शाया. ‘स्वदेशी, स्वावलंबन और स्वतंत्रता’ के मंत्र पर आधारित इस झांकी में भीखाजी कामा को 1907 में पेरिस में फहराए गए ‘वंदे मातरम’ अंकित झंडे के साथ दिखाया गया, जो उस दौर में विदेशी धरती पर भारत की आजादी की बुलंद आवाज बना था. 
झांकी के बीच के हिस्से में भारतीय तिरंगे के क्रमिक विकास की यात्रा को दिखाया गया, जबकि पिछले हिस्से में महात्मा गांधी और चरखे के जरिए आत्मनिर्भर भारत के विजन को पेश किया गया. कवि झावेरचंद मेघानी के देशभक्ति गीत ‘कसुंबी नो रंग’ पर थिरकते कलाकारों ने कर्तव्य पथ पर गुजरात की सांस्कृतिक विरासत और स्वाधीनता संग्राम के गौरवशाली इतिहास की जीवंत तस्वीर पेश की.

BSF का ऊंट दस्ता: रेगिस्तान के जहाज

परेड का सबसे आकर्षक हिस्सा BSF (सीमा सुरक्षा बल) का ऊंट दस्ता और उनका बैंड रहा. अपने ऊंट ‘चेतक’ पर सवार डिप्टी कमांडेंट महेंद्र पाल सिंह राठौर ने इस दस्ते का नेतृत्व किया. राजस्थान के थार रेगिस्तान और कच्छ के रण में ये ऊंट ही बीएसएफ जवानों के सबसे भरोसेमंद साथी हैं. ये तस्करों और घुसपैठियों को रोकने में अहम भूमिका निभाते हैं.

ITBP: ‘हिमवीर’ जो ऊंचाइयों पर देते हैं पहरा

इसके बाद ITBP (भारत-तिब्बत सीमा पुलिस) का दस्ता आया. ये वो ‘हिमवीर’ हैं जो भारत और चीन की 3,488 किलोमीटर लंबी दुर्गम सीमा की रक्षा करते हैं. यह बल न केवल सुरक्षा करता है, बल्कि आपदा के समय लोगों की जान बचाने और माउंट एवरेस्ट जैसी चोटियों को फतह करने के लिए भी जाना जाता है.

CRPF: ‘सेवा और निष्ठा’ के साथ पहली बार महिला नेतृत्व

परेड की शुरुआत CRPF (केंद्रीय रिजर्व पुलिस बल) के बैंड से हुई, जिसकी धुन “देश के हम हैं रक्षक” ने सबका मन मोह लिया. इस बार की सबसे खास बात यह थी कि CRPF के दस्ते का नेतृत्व पहली बार महिला असिस्टेंट कमांडेंट सिमरन बाला और सुरभि रवि ने किया. 3.30 लाख से ज्यादा जवानों वाला यह बल जम्मू-कश्मीर और नक्सल प्रभावित इलाकों में देश की रक्षा करता है. अब तक इस बल को 2,543 वीरता पदक मिल चुके हैं.

17 विमानों ने आसमान में करतब दिखाए

यह परेड पिछले वर्ष हुए ‘ऑपरेशन सिंदूर’ के बाद पहली बार आयोजित की जा रही है, जिसमें अत्याधुनिक रक्षा प्लेटफॉर्म और 29 विमानों की भव्य फ्लाईपास्ट विशेष आकर्षण है. फ्लाईपास्ट में राफेल, सुखोई-30, पी-8आई, सी-295, मिग-29, अपाचे, एलसीएच, एएलएच, और एमआई-17 जैसे विमान अलग-अलग संरचनाओं में आसमान में करतब दिखाए.

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