GDP की जगह NDP लाएगी मोदी सरकार? लेकिन ये है क्या?

अब तक जब भी देश की अर्थव्यवस्था की बात होती है, तो GDP यानी ग्रॉस डोमेस्टिक प्रोडक्ट को इसका पैमाना माना जाता रहा है. लेकिन अब मोदी सरकार ये पैमाना बदल सकती है. भारत सरकार GDP की जगह अब NDP यानी नेट डोमेस्टिक प्रोडक्ट अपना सकती है

क्या है GDP?

हिंदी में इसे सकल घरेलू उत्पाद कहते हैं. जीडीपी किसी एक साल में देश में पैदा होने वाले सभी सामानों और सेवाओं की कुल वैल्यू को कहते हैं. इसमें फैक्ट्रियों में बना सामान, किसानों की फसल, दुकानों,  होटलों, ट्रांसपोर्ट और सर्विस सेक्टर की कमाई को शामिल किया जाता है. जीडीपी ग्रोथ से पता चलता है कि देश की अर्थव्यवस्था कितनी रफ्तार से तेज या धीमी चल रही है. 
हालिया आंकड़ों के मुताबिक देश की जीडीपी ग्रोथ अच्छी रही है. वित्त वर्ष 2025-2026 की दूसरी तिमाही (1 जुलाई 2025-30 सितंबर 2025 के बीच) में भारत की जीडीपी ग्रोथ 8.2% पर पहुंच गई है. भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) ने वित्त वर्ष 2025-26 में भारत की GDP ग्रोथ करीब 7.3% रहने का अनुमान जताया है.

क्या है NDP?

जैसा कि हमने ऊपर बताया कि अभी जब भी देश की अर्थव्यवस्था की बात होती है, तो GDP को उसका पैमाना माना जाता है. लेकिन इसमें यह नहीं बताया जाता है कि इस उत्पादन के दौरान मशीनों की कितनी टूट-फूट हुई और प्राकृतिक संसाधन जैसे कोयला, तेल और खनिज कितने घट गए. NDP मशीनों के घिसने-टूटने और प्राकृतिक संसाधनों की घटती मात्रा को घटाकर निकाला जाता है.

GDP की जगह NDP में शिफ्ट होने के पीछे क्या वजहें हैं? 

इकोनॉमिक टाइम्स की रिपोर्ट के मुताबिक फिलहाल भारत समेत दुनियाभर में जीडीपी को ही आर्थिक गतिविधियों का प्रमुख संकेतक माना जाता है. भारत हर साल GDP के साथ NDP के आंकड़े जारी करता है, लेकिन तिमाही (3 महीने में) आंकड़े सिर्फ GDP के ही आते हैं. रिपोर्ट की मानें तो अब सरकार कथित तौर पर इस पर काम कर रही है कि आगे चलकर NDP को भी मुख्य आर्थिक संकेतक बनाया जाए. 

सरकार चाहती है कि संयुक्त राष्ट्र के सिस्टम ऑफ नेशनल अकाउंट्स (SNA) के हिसाब से नेशनल अकाउंट्स को मेनटेन किया जाए. नेशनल अकाउंट्स एक तरह से किसी देश का पूरा आर्थिक रिपोर्ट कार्ड होता है. वहीं, SNA संयुक्त राष्ट्र की बनाई हुई वैश्विक व्यवस्था है, जिससे हर देश एक जैसे नियमों से अपनी अर्थव्यवस्था का हिसाब रख सके.
रिपोर्ट बताती है कि भारत सरकार का सांख्यिकी मंत्रालय एसएनए 2025 की सिफारिशों को लागू करने के लिए जरूरी आंकड़ों और कार्यप्रणाली में बदलावों का मूल्यांकन कर रहा है. इस प्रक्रिया का मार्गदर्शन करने के लिए राष्ट्रीय लेखा सांख्यिकी सलाहकार समिति के तहत एक सब-कमेटी बनाई गई है. एक अधिकारी ने ईटी को बताया कि अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष (IMF) के दिशा-निर्देशों के अनुरूप इसे वित्त वर्ष 2029-30 तक लागू करने का लक्ष्य रखा गया है.

GDP की गणना का बेस ईयर भी बदलेगा

इसके अलावा जीडीपी को लेकर एक और बड़ा बदलाव भी हो सकता है. रिपोर्ट के मुताबिक सरकार GDP की गणना का बेस ईयर बदल रही है. अभी GDP 2011-12 के आधार पर आंकी जाती है. इसे बदलकर 2022-23 किया जा रहा है. इसका मकसद आज की अर्थव्यवस्था की सही तस्वीर सामने लाना है. नई GDP सीरीज 27 फरवरी को जारी हो सकती है. ये बदलाव भी SNA 2008 फ्रेमवर्क पर आधारित है. यह फ्रेमवर्क अभी भी दुनिया भर में इस्तेमाल किया जा रहा है.

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