नई दिल्ली। 2019 की तुलना में बड़ी जीत हासिल करने के भाजपा के मिशन 2024 में पश्चिम बंगाल, ओडिशा और तेलंगाना की अहम भूमिका हो सकती है। इन तीनों राज्यों में लोकसभा की 80 सीटें आती हैं, जिनमें 2019 में भाजपा को मात्र 30 सीटें ही मिली थी।
भाजपा इस बार यहां 50 से अधिक सीटों पर जीत दर्ज कराने की कोशिश में जुट गई है। मिशन 2024 के लिए इन राज्यों की अहमियत इस बात से समझी जा सकती है कि मध्यप्रदेश और छत्तीसगढ़ के विधानसभा चुनावों में भाजपा को ऐतिहासिक जीत दिलाने वाले अमित शाह ने इन तीनों राज्यों की कमान खुद संभाल ली है। इसके अलावा भाजपा को उत्तरप्रदेश में भी सीटें बढ़ने की उम्मीद है। दरअसल 2019 में भाजपा के जीत के आंकड़े को 303 तक पहुंचाने में इन तीनों राज्यों की अहम भूमिका रही थी।
2014 में भाजपा को मिली थी जीत
2014 में भाजपा इन तीनों राज्यों में महज चार सीटें जीतने में सफल रही थी, जिनमें पश्चिम बंगाल में दो और ओडिशा और तेलंगाना में एक-एक सीटें थी। 2019 में इन तीनों राज्यों में भाजपा 26 सीटें बढ़ाने में सफल रहीं, जिनमें 16 पश्चिम बंगाल, सात ओडिशा और चार तेलंगाना थी। पार्टी का मानना है कि 42 सीटों वाले पश्चिम बंगाल में पिछले चुनाव में 18 सीटें जीतने के बाद भी अभी बहुत संभावना बाकी है। इसके लिए भाजपा ने 33 सीटों पर जीत की रणनीति बनाई है और 25 से अधिक सीटों पर जीत का दावा भी कर रही है।
ओडिशा में लोकसभा की 21 सीटें हैं और 2019 में भाजपा आठ सीटें जीतने में सफल रही थी। भाजपा इस बार यहां कम से कम 15 सीटें जीतने की रणनीति बना रही है। इसी तरह से तेलंगाना में विधानसभा में बीआरएस की हार के बाद लोकसभा में भाजपा और कांग्रेस के बीच सीधा मुकाबला होने की संभावना है।
तेलंगाना में लोकसभा की कुल 17 सीटें
तेलंगाना में लोकसभा की कुल 17 सीटें हैं और भाजपा इस बार जीती गई सीटों की संख्या को दहाई तक पहुंचाने की कोशिश कर रही है। तेलंगाना की रणनीति से जुड़े भाजपा के एक वरिष्ठ नेता ने कहा कि 2019 में पार्टी दो सीटों पर कम बहुत कम अंतर से हारी थी और दो अन्य सीटों पर प्रदर्शन बहुत अच्छा था। ऐसे में कम से 10 सीटों पर आसानी से जीत हासिल की जा सकती है। इसके अलावा भाजपा को उत्तरप्रदेश में 2019 के घाटे की भरपाई की उम्मीद है। 2014 में 72 सीटें जीतने के बाद 2019 में 10 सीटें कम आई थी।
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