आकाश-NG… जो मिसाइलें ‘ऑपरेशन सिंदूर’ में पाकिस्तान में दागी थी भारत ने, आ गया उससे भी खतरनाक वर्जन

रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन (DRDO) ने Akash-NG (न्यू जेनरेशन) मिसाइल सिस्टम के यूजर ट्रायल्स सफलतापूर्वक पूरा कर लिए हैं. ओडिशा के चांदीपुर स्थित इंटीग्रेटेड टेस्ट रेंज में हुए इन परीक्षणों में मिसाइल ने सभी मानकों को पूरा किया. अब यह भारतीय सेना और वायु सेना में शामिल होने के लिए तैयार है. यह मिसाइल पुरानी आकाश मिसाइल का एडवांस वर्जन है, जो हाई-स्पीड और फुर्तीले हवाई खतरों को मार गिराने में सक्षम है.

परीक्षण की सफलता

परीक्षणों के दौरान आकाश-एनजी ने विभिन्न ऊंचाई और दूरी पर हवाई लक्ष्यों को सफलतापूर्वक इंटरसेप्ट किया. इसमें बहुत कम ऊंचाई वाले निकट लक्ष्य और लंबी दूरी वाली ऊंची ऊंचाई वाले लक्ष्य शामिल थे. मिसाइल ने हाई-स्पीड, कम रडार सिग्नेचर वाले लक्ष्यों को भी नष्ट किया.

डीआरडीओ ने कहा कि यह सिस्टम सभी पीएसक्यूआर (परफॉर्मेंस एंड सेफ्टी क्वालिटेटिव रिक्वायरमेंट्स) को पूरा करता है. पुरानी आकाश मिसाइल ने हाल की ऑपरेशन सिंदूर में पाकिस्तान के हवाई हमलों को नाकाम बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी. अब आकाश-एनजी इससे भी ज्यादा शक्तिशाली होगी.

आकाश-एनजी की मुख्य विशेषताएं

आकाश-एनजी एक मध्यम दूरी की मोबाइल सरफेस-टू-एयर मिसाइल (SAM) सिस्टम है, जो पूरी तरह स्वदेशी है. मुख्य स्पेसिफिकेशंस…

• रेंज: 70-80 किलोमीटर (पुरानी आकाश की 25-30 किमी से काफी ज्यादा).
• ऊंचाई: 30 मीटर से 20 किलोमीटर तक के लक्ष्यों को मार गिरा सकती है.
• स्पीड: ध्वनि की गति से 2.5 गुना.
• प्रोपल्शन: ड्यूल-पल्स सॉलिड रॉकेट मोटर (पुरानी में रामजेट था, यह हल्का और ज्यादा कुशल है).
• सीकर: स्वदेशी रेडियो फ्रीक्वेंसी (RF) एक्टिव सीकर, जो टर्मिनल फेज में सटीक गाइडेंस देता है.
• रडार: मल्टी-फंक्शन रडार (MFR) जो 120 किमी तक सर्विलांस और 80 किमी तक फायर कंट्रोल कर सकता है.
• क्षमता: एक साथ 10 लक्ष्यों को ट्रैक और इंगेज कर सकती है. सैचुरेशन अटैक (एक साथ कई हमले) के खिलाफ ज्यादा मजबूत.
• अन्य: 360 डिग्री कवरेज, इलेक्ट्रॉनिक काउंटर-काउंटरमेजर्स (ECCM) क्षमता, कम वजन और छोटा फुटप्रिंट, जिससे तैनाती आसान.
यह फाइटर जेट, हेलिकॉप्टर, ड्रोन, क्रूज मिसाइल और एयर-टू-सर्फेस मिसाइलों जैसे खतरों का मुकाबला कर सकती है

सीमाओं पर तैनाती का महत्व

आकाश-एनजी एक डिफेंसिव सिस्टम है, जो आने वाले हवाई खतरों (जैसे दुश्मन के विमान, मिसाइल या ड्रोन) को रोकने के लिए डिजाइन की गई है. यह भारत की वायु सीमाओं की रक्षा मजबूत करेगी. अगर इसे पाकिस्तान या चीन की सीमाओं के पास तैनात किया जाता है, तो यह 70-80 किमी की रेंज में आने वाले हवाई लक्ष्यों को नष्ट कर सकती है.

उदाहरण के लिए…

• पाकिस्तान सीमा के पास: पंजाब या राजस्थान सेक्टर में तैनाती पर लाहौर जैसे निकट शहरों के ऊपर उड़ने वाले विमानों या ड्रोनों को इंटरसेप्ट कर सकती है. 
• चीन सीमा के पास: लद्दाख या अरुणाचल में तैनाती पर सीमा पार के हवाई अड्डों से आने वाले खतरों को रोकेगी.
यह सिस्टम भारत की ‘आत्मनिर्भर भारत’ पहल का हिस्सा है. आयात पर निर्भरता कम करेगा. रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने डीआरडीओ, वायु सेना और उद्योग को बधाई दी है. जल्द ही यह सेना में शामिल होकर भारत की वायु रक्षा को और मजबूत बनाएगी.

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