जब हम छोटे थे, तब टीवी पर एक एड आया करता था, ‘संडे हो या मंडे, रोज खाओ अंडे’. ये नेशनल एग को-ऑर्डिनेशन कमिटी (NECC) का प्रचार था. ये दिखाकर लोगों को हर रोज अंडे खाने के लिए प्रेरित किया जाता था. अब चूंकि अंडा प्रोटीन का अच्छा सोर्स है इसलिए लोग अंडा खाना पसंद करते हैं. वहीं कुछ लोग ऐसे भी हैं जो देसी अंडा खाना पसंद करते हैं. वजह है कि इसकी न्यूट्रिशनल वैल्यू अधिक होती है. और टेस्ट में भी ये अच्छे लगते हैं. लेकिन आजकल इसमें भी झोल है. देसी अंडे, नॉर्मल वालों से कुछ महंगे होते हैं इसलिए ठगों ने इसका भी डुप्लीकेट बनाना शुरू कर दिया है. मुरादाबाद (Moradabad Desi Eggs) में ऐसा ही एक फर्जीवाड़ा सामने आया है जहां खाद्य सुरक्षा विभाग ने एक गोदाम पर छापा मारकर 80 हजार से अधिक अंडे बरामद किए हैं. इन अंडों को कलर डालकर देसी अंडा (Desi Anda) बनाया जा रहा था.
खाद्य विभाग ने मारा छापा
मुरादाबाद खाद्य विभाग को जानकारी मिली थी कि कटघर थाना क्षेत्र के एक गोदाम में सफेद अंडों को आर्टिफिशियल कलर लगाकर देसी अंडों जैसा रंग दिया जा रहा था. लिहाजा अधिकारियों ने छापा मारा. खाद्य विभाग की टीम को मौके से 45,360 रंगीन अंडे और 35,640 सफेद अंडे मिले. इन अंडों को रंग लगाकर उन्हें देसी अंडा बनाने की तैयारी चल रही थी. कार्रवाई के दौरान सभी अंडों को जब्त कर लिया गया और पूरे गोदाम को तत्काल प्रभाव से सील कर दिया गया. आजतक की रिपोर्ट के मुताबिक इन अंडों का मूल्य 3 लाख 90 हजार के आसपास है.
अधिकारियों के मुताबिक आर्टिफिशियल कलर का उपयोग स्वास्थ्य के लिए गंभीर खतरा पैदा कर सकता है. इस मामले में संबंधित नियमों के तहत कार्रवाई शुरू कर दी गई है. अधिकारी अब यह पता लगाने में जुटे हैं कि रंगे हुए अंडे बाजार में कहां-कहां सप्लाई हो रहे थे. इस मामले पर जानकारी देते हुए मुरादाबाद मंडल के सहायक आयुक्त, (खाद्य) राजवंश प्रकाश श्रीवास्तव ने बताया उन्हें नकली अंडो के बारे में एक शिकायत मिली थी. पता चला कि कुछ लोग अंडे का रंग बदलकर बेच रहे हैं. बकौल खाद्य आयुक्त, टीम ने 12-13 दिन इस टिप पर वर्कआउट किया.
मुखबिर की सूचना पर टीम ने रात के 10 बजे अंडा व्यापारी अल्लाह खां के यहां छापा मारा. गोदाम पर पता चला कि ये लोग सफेद रंग का अंडा देसी बनाकर बेचते थे. अधिकारियों के अनुसार सफेद अंडों को आर्टिफिशियल कलर लगाकर देसी अंडे जैसा रंग दिया जा रहा था. टीम ने मौके से अंडे को कलर करने वाला चाय पत्ती का घोल और सिदनूर केमिकल भी मिला. इस छापेमारी के बाद विभाग ने संबंधित नियमों के तहत कार्रवाई शुरू कर दी है. साथ ही टीम ये भी जांच कर रही है कि इन अंडों को कहां-कहां सप्लाई किया जाता था.
कैसे करें नकली देसी अंडे की पहचान?
मान लीजिए आपका मन देसी अंडा खाने का कर रहा है. पास की दुकान पर गए तो देसी अंडा दिख भी गया. लेकिन मुरादाबाद में मिले 80 हजार से अधिक नकली देसी अंडे मिलने के बाद मन में शंका घर कर गई है. मन ये सोच रहा है कि ये वाला जो अंडा है, वो देसी है, या कलर किया हुआ. तो इसे पहचानने के कुछ तरीके हैं. अब देखने से तो अंडा एकदम असली लग रहा है तो आंखों का इस्तेमाल तो भूल ही जाइए. एक तरीका है जिसमें सुनकर अंडे की असलियत का पता लगाया जा सकता है. एक-एक कर के समझते हैं,
• नॉर्मल अंडों में जो जर्दी (पीला हिस्सा) होता है, वो छोटा होता है. इनमें अंडे के भीतर जर्दी के अलावा सफेद सा तरल भी होता है. लेकिन देसी अंडे में जर्दी अधिक होती है. इसे हिला कर सुनने पर आवाज नहीं आती. नॉर्मल अंडे में तरल की आवाज आती है.
• दूसरा तरीका है कि आप छू कर अंडे की असलियत पता कर सकते हैं. देसी अंडे की सतह बिल्कुल चिकनी होती है. जबकि नॉर्मल अंडे की सतह पर खुरदुरापन महसूस होगा.
• अगर अंडे को फोड़कर देखें, तो देसी अंडे की जर्दी का रंग गहरा पीला दिखेगा. जबकि नॉर्मल अंडे की जर्दी हल्की पीली होती है.
• जैसा कि हमने देखा, अंडो को देसी जैसा दिखाने के लिए इन्हें चायपत्ती के पानी में डाला दिया जाता है. हम सूंघ कर ये पता कर सकते हैं कि अंडा देसी है या नहीं.
अंडे पर नींबू का रस डाल कर रगड़ें. अगर अंडा वाकई में देसी होगा, तो वो रंग नहीं छोड़ेगा.
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