लालकिले के पास हुए भीषण कार धमाके के महज़ एक दिन बाद, सुप्रीम कोर्ट ने देश को एक सख्त और स्पष्ट संदेश दिया है. कोर्ट ने कहा कि आतंकी गतिविधियों से जुड़े मामलों में किसी तरह की नरमी नहीं बरती जाएगी.
दरअसल, मंगलवार को सर्वोच्च न्यायालय ने UAPA (Unlawful Activities Prevention Act) के तहत गिरफ्तार एक आरोपी की जमानत याचिका खारिज कर दी.
सुनवाई के दौरान आरोपी के वकील ने कहा, “शायद कल की घटना के बाद आज इस केस पर बहस करने का सही समय नहीं है.” इस पर जस्टिस विक्रम नाथ और संदीप मेहता की पीठ ने तीखे लहजे में जवाब दिया- “यही सबसे सही सुबह है, स्पष्ट संदेश देने के लिए.”
कोर्ट ने आरोपी की ज़मानत याचिका को खारिज करते हुए यह अहम टिप्पणी की. आरोपी के बचाव पक्ष ने तर्क दिया था कि उससे केवल इस्लामिक साहित्य जब्त किया गया है लेकिन पीठ ने इस तर्क को खारिज करते हुए कहा कि आरोपी एक व्हाट्सएप समूह का सदस्य था जिसमें इस्लामिक स्टेट (ISIS) के झंडे जैसा ही झंडा लगा हुआ था. सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि बरामद सामग्री की प्रकृति और ऑनलाइन कनेक्शन इस बात की ओर इशारा करते हैं कि आरोपी की भूमिका गंभीर है, और उसकी हिरासत जारी रहनी चाहिए.
उमर ने रची थी साजिश
यह फैसला ऐसे वक्त आया है जब दिल्ली पुलिस और जांच एजेंसियां लालकिला ब्लास्ट की गुत्थी सुलझाने में जुटी हैं. धमाके में इस्तेमाल Hyundai i20 कार की जांच में खुलासा हुआ है कि इसे डॉ. मोहम्मद उमर, एक कश्मीरी डॉक्टर चला रहा था, जिसके जैश-ए-मोहम्मद से संबंध बताए जा रहे हैं. उमर ने अपने दो साथियों के साथ मिलकर साजिश रची थी, लेकिन फरीदाबाद में गिरफ्तारियों के बाद घबराकर उसने अकेले ही ब्लास्ट को अंजाम दिया.
फरीदाबाद पुलिस ने धमाके से कुछ घंटे पहले ही 2,900 किलो विस्फोटक और हथियारों का बड़ा जखीरा बरामद किया था और तीन डॉक्टर समेत आठ लोगों को गिरफ्तार किया था. शुरुआती जांच में पुष्टि हुई है कि धमाके में ANFO (Ammonium Nitrate Fuel Oil) का इस्तेमाल हुआ था जो आमतौर पर एक हाई-इंटेंसिटी विस्फोटक है जो सैन्य-स्तर के ब्लास्ट में इस्तेमाल होता है.
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