एयर इंडिया हादसा: कैप्टन सुमित सभरवाल के पिता पर ‘बड़ा बोझ’ था, सुप्रीम कोर्ट ने उतार दिया

सुप्रीम कोर्ट ने 12 जून को क्रैश हुए एयर इंडिया विमान के पायलट सुमित सभरवाल के पिता का बड़ा बोझ उतारने की कोशिश की है. उसने कैप्टन सुमित सभरवाल के पिता पुष्कर सभरवाल से कहा कि देश में कोई यह नहीं मानता कि इस हादसे के लिए उनका बेटा जिम्मेदार था. जस्टिस सूर्यकांत और जस्टिस जॉयमल्या बागची की पीठ ने एक सुनवाई ये बात कही. पुष्कर सभरवाल ने शीर्ष अदालत में याचिका दायर दायर की है. वे इस हादसे की स्वतंत्र और तकनीकी रूप से सही जांच की मांग कर रहे हैं.

सुनवाई के दौरान अदालत ने पीड़ित पिता के प्रति गहरी संवेदना जताई. जस्टिस सूर्यकांत ने कहा,
“यह बहुत दुर्भाग्यपूर्ण हादसा था. लेकिन आप इस बात का बोझ मत उठाइए कि आपके बेटे को दोषी ठहराया जा रहा है. कोई भी उन्हें दोष नहीं दे सकता.”

वहीं जस्टिस बागची ने कहा,
“अब तक जांच रिपोर्ट में पायलट के खिलाफ कोई आरोप नहीं है. रिपोर्ट में सिर्फ दोनों पायलटों के बीच हुई बातचीत का ज़िक्र है, किसी को दोषी नहीं ठहराया गया है.”

पिता ने की जांच की मांग पुष्कर सभरवाल की ओर से वरिष्ठ वकील गोपाल शंकरनारायणन ने दलील दी कि अब तक सिर्फ एक प्रारंभिक जांच हुई है, जबकि नियमों के अनुसार पूर्ण स्वतंत्र जांच आवश्यक है. उन्होंने मांग की कि हादसे की जांच, सुप्रीम कोर्ट के एक सेवानिवृत्त जज की निगरानी में होनी चाहिए. गोपाल शंकरनारायणन ने बताया कि वॉल स्ट्रीट जर्नल में एक रिपोर्ट छपी थी, जिसमें ‘भारतीय सूत्रों’ के हवाले से ऐसे संकेत देने की कोशिश की गई थी कि विमान हादसा ‘पायलट की गलती’ से हुआ. हालांकि, इसके बाद जस्टिस बागची ने प्रक्रिया पर आपत्ति जताई. उन्होंने कहा,

“तो फिर आपका मुकदमा वॉल स्ट्रीट जर्नल के खिलाफ होना चाहिए था. मीडिया में छपी बातों पर कार्रवाई का अलग मंच होता है, न कि रिट याचिका.”

सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार, DGCA और अन्य संबंधित एजेंसियों को नोटिस जारी कर उनका जवाब मांगा है. जस्टिस सूर्यकांत ने कहा कि जो भी कारण रहा हो, इस त्रासदी का कारण पायलट नहीं है. 
मामले की अगली सुनवाई 10 नवंबर को होगी.

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