प्रशांत महासागर के नीचे धरती दो टुकड़ों में बंट रही है… क्या आने वाली है आफत?

पृथ्वी की सतह एक विशाल चट्टान का टुकड़ा नहीं है, बल्कि कई बड़े-बड़े टुकड़ों से बनी है. ये टुकड़े जिन्हें टेक्टॉनिक प्लेट्स कहते हैं,वो धीरे-धीरे घूमते रहते हैं. कभी-कभी ये एक-दूसरे से टकराते हैं. अलग होते हैं या एक के नीचे दूसरा चला जाता है. लेकिन वैज्ञानिकों को हाल ही में एक चौंकाने वाली खोज हुई है.
प्रशांत महासागर के नीचे कनाडा के वैंकूवर द्वीप के पास एक टेक्टॉनिक प्लेट दो हिस्सों में बंट रही है. यह जगह कैस्केडिया सबडक्शन जोन कहलाती है. नई रिसर्च से पता चला है कि यह जोन अपनी मौत के करीब पहुंच रहा है. क्या इससे बड़ा भूकंप या प्रलय आएगा? यह रिसर्च साइंस एडवांसेज जर्नल में छपी है.

टेक्टॉनिक प्लेट्स: पृथ्वी की त्वचा कैसे काम करती है?

पृथ्वी की ऊपरी सतह यानी क्रस्ट कई प्लेट्स में बंटी है. ये प्लेट्स गर्म, अर्ध-पिघली चट्टानों के ऊपर तैरती रहती हैं. ये प्लेट्स आपस में जुड़ी हुई हैं लेकिन धीरे-धीरे हिलती रहती हैं. कभी ये रगड़ खाती हैं. कभी अलग होती हैं. सबसे खतरनाक प्रक्रिया है सबडक्शन—जब एक प्लेट दूसरी के नीचे सरक जाती है. इससे ज्वालामुखी फूटते हैं. भूकंप आते हैं.

कैस्केडिया सबडक्शन जोन प्रशांत महासागर के उत्तरी हिस्से में है. यहां चार प्लेट्स मिलती हैं: एक्सप्लोरर, जुआन डे फ्यूका, पैसिफिक और नॉर्थ अमेरिकन. एक्सप्लोरर और जुआन डे फ्यूका प्लेट्स नॉर्थ अमेरिकन प्लेट के नीचे सरक रही हैं. यह जगह बहुत जटिल है.

लुइसियाना स्टेट यूनिवर्सिटी के वैज्ञानिक ब्रैंडन शक कहते हैं कि सबडक्शन जोन शुरू करना ट्रेन को पहाड़ी पर चढ़ाने जैसा है—बहुत मेहनत लगती है. लेकिन एक बार शुरू हो जाए, तो ट्रेन पहाड़ से नीचे दौड़ने लगती है. रुकना मुश्किल हो जाता है. इसे खत्म करने के लिए बड़ा हादसा चाहिए, जैसे ट्रेन का डिरेल होना. 

क्या हो रहा है समुद्र के नीचे… 75 km लंबी दरार 

शक और उनके साथी वैज्ञानिकों ने एक जहाज से सिस्मिक इमेजिंग की. यह समुद्र तल से ध्वनि तरंगें भेजने जैसा है—जैसे अल्ट्रासाउंड से पेट का एक्स-रे. भूकंप की तरंगें भी इस्तेमाल कीं, जो पृथ्वी के अंदर उछल-उछल कर आती हैं. इससे पता चला कि कैस्केडिया के उत्तरी सिरे पर एक्सप्लोरर प्लेट टूट रही है.

वहां कई बड़े फॉल्ट्स और फ्रैक्चर्स मिले. सबसे बड़ा एक 75 किलोमीटर लंबा फॉल्ट है, जो प्लेट को चीर रहा है. ये हिस्से अभी पूरी तरह अलग नहीं हुए, लेकिन बहुत तनाव में हैं. जैसे कोई रबर बैंड खिंच जाए और टूटने वाला हो.
शक कहते हैं कि यह पहली बार है जब हमें सबडक्शन जोन की मौत को साफ देखने को मिल रही है. यह एकदम बंद नहीं हो रहा, बल्कि धीरे-धीरे टुकड़ों में बंट रहा है. जैसे ट्रेन का एक-एक डिब्बा डिरेल हो रहा हो.

सबडक्शन जोन की मौत: सामान्य प्रक्रिया या खतरा?

सबडक्शन जोन टूटना का सामान्य प्रक्रिया लगता है. अगर प्लेट्स हमेशा एक-दूसरे में धकेलती रहें, तो भूवैज्ञानिक इतिहास मिट जाएगा. इसलिए प्रकृति इसे रोकने के लिए प्लेट को तोड़ देती है. टूटे हिस्से छोटी माइक्रोप्लेट्स बन जाते हैं. कुछ हिस्से अब भूकंपीय रूप से सक्रिय नहीं हैं, क्योंकि वे मुख्य सिस्टम से कट चुके हैं.
धीरे-धीरे इतना हिस्सा टूट जाएगा कि सबडक्शन रुक जाएगा. प्लेट का वजन कम हो जाएगा, नीचे खिंचाव रुकेगा. शक कहते हैं कि यह स्टेप बाय स्टेप ब्रेकडाउन है. ज्वालामुखी चट्टानों की उम्र भी इसकी पुष्टि करती है—वे क्रम से पुरानी या नई हो रही हैं.


क्या इससे प्रलय आएगा?

अभी घबराने की जरूरत नहीं. यह प्रक्रिया धीमी है. लाखों साल लगेंगे. लेकिन हां, टूटने से छोटे-छोटे भूकंप आ सकते हैं. कैस्केडिया जोन पहले से ही बड़ा खतरा है. 1700 में यहां 9 तीव्रता का भूकंप आया था, जो जापान तक सुनामी पहुंचा गया. अगर पूरा जोन टूटा तो वॉशिंगटन, ओरेगन और ब्रिटिश कोलंबिया में तबाही हो सकती है. लेकिन वैज्ञानिक कहते हैं कि यह मौत का संकेत है. 

रिसर्च की अहमियत

यह स्टडी हमें पृथ्वी के अंदर की गतिविधियां समझाती है. इससे भूकंप पूर्वानुमान बेहतर होगा. वैज्ञानिक अब और डेटा इकट्ठा करेंगे. शक कहते हैं कि यह ट्रेन रेस की तरह है—एक बार शुरू, तो रुकना मुश्किल. लेकिन अंत में, यह नई शुरुआत लाता है. पृथ्वी हमेशा बदल रही है. प्रशांत के नीचे यह टूटना हमें याद दिलाता है कि हमारा ग्रह जिंदा है. लेकिन हमें सतर्क रहना चाहिए.   

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