दशहरा पर्व बुराई पर अच्छाई की जीत का प्रतीक है। साल 2025 में यह त्योहार 2 अक्टूबर को मनाया जाएगा। इस दिन लोग भगवान राम की पूजा के साथ ही माता दुर्गा की पूजा भी करते हैं। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, इसी दिन भगवान राम ने रावण पर विजय प्राप्त की थी और साथ ही माता दुर्गा ने महिषासुर नाम के दानव का वध किया था। हिंदू धर्म में मान्यता रखने वाले लोग इस दिन पूजा-पाठ करते हैं साथ ही मंत्रों का जप और श्री राम और माता दुर्गा की पूजा करना भी इस दिन बेहद शुभ माना जाता है। आइए ऐसे में जान लेते हैं कि दशहरे के दिन आपको किस विधि से पुजा करनी चाहिए, किन मंत्रों का जप करना इस दिन शुभ होता है और पूजा के लिए शुभ मुहूर्त कब से कब तक रहेगा।
दशहरा 2025 शुभ पूजा मुहूर्त
• ब्रह्म मुहूर्त: सुबह 04:53 मिनट से 05:41 मिनट तक
• प्रातः संध्या: सुबह 05:17 मिनट से 06:29 मिनट तक
• अभिजीत मुहूर्त: दोपहर 12:04 मिनट से 12:51 मिनट तक
• विजय मुहूर्त: दोपहर 02:27 मिनट से 03:15 मिनट तक
• गोधूलि मुहूर्त: शाम 06:26 मिनट से 06:50 मिनट तक
इन शुभ मुहूर्तों में आप दशहरे किन दिन पूजा कर सकते हैं।
रावण दहन मुहूर्त
हर वर्ष रावण दहन प्रदोष काल के दौरान किया जाता है। इस साल भी प्रदोष काल यानि सूर्योस्त के बाद ही रावण दहन किया जाएगा। हिंदू पंचांग के अनुसार 2 अक्टूबर को सूर्योस्त शाम 6 बजकर 5 मिनट पर हो जाएगा। इसके बाद रावण दहन किया जा सकता है।
दशहरा 2025 पूजा विधि
• दशहरे के दिन सुबह जल्दी उठकर स्नान ध्यान के बाद आपको पूजा स्थल की भी सफाई करनी चाहिए और गंगाजल से उसे शुद्ध करना चाहिए।
• इसके बाद स्वच्छ वस्त्र धारण कर भगवान राम का जलाभिषेक करना चाहिए और विधिवत पूजा आरंभ करनी चाहिए।
• पूजा में सबसे पहले धूप, दीप और अगरबत्ती आपको जलानी चाहिए।
• इसके बाद पीले फूल भगवान राम को अर्पित करने चाहिए और साथ ही पीला चंदन भी श्रीराम को चढ़ाना चाहिए।
• इसके बाद भगवान राम के मंत्रों का जप श्री राम रक्षा स्तोत्र का पाठ आपको करना चाहिए।
• वहीं विजयदशमी के दिन श्रीराम जी के साथ ही आप भगवान विष्णु की पूजा और उनके मंत्रों का जप भी कर सकते हैं।
• पूजा में आपको भोग के रूप में तुलसी के पत्ते भी अवश्य अर्पित करने चाहिए।
• पूजा के अंत में श्रीराम जी की आरती का पाठ करना चाहिए और घर के लोगों में प्रसाद का वितरण करना चाहिए।
श्री राम जी को प्रसन्न करने के मंत्र
• ॐ श्री रामाय नमः।
• श्री राम जय राम जय जय राम।
• ॐ ह्रां ह्रीं रां रामाय नमः।
• ॐ राम ॐ राम ॐ राम ह्रीं राम ह्रीं राम श्रीं राम श्रीं राम – क्लीं राम क्लीं राम। फ़ट् राम फ़ट् रामाय नमः।
• ॐ आपदामप हर्तारम दातारं सर्व सम्पदाम, लोकाभिरामं श्री रामं भूयो भूयो नामाम्यहम। श्री रामाय रामभद्राय रामचन्द्राय वेधसे रघुनाथाय नाथाय सीताया पतये नमः।
दशहरा पूजा मंत्र
देवी अपराजिता पूजन मन्त्र –
इमां पूजां मयां देवि यथाशक्ति निवेदिताम्। रक्षार्थं तु समादाय व्रजस्व स्थानमुत्तमम्॥
भावार्थ – हे देवी! मेरी विजय हेतु की गयी इस यथाशक्ति पूजन को स्वीकार कर, निजस्थान की ओर प्रस्थान करें।
हारेण तु विचित्रेण भास्वत्कनकमेखला। अपराजिता भद्ररता करोतु विजयं मम॥
भावार्थ – हे अपराजिता देवी! गले में विचित्र हार तथा कमर पर भव्य स्वर्ण करधनी अर्थात मेखला धारण करने वाली देवी, मुझे विजयी करें।
दशहरा पर अर्जुन और शमी वृक्ष की कथा
महाभारत काल में पांडवों को अज्ञातवास के दौरान अपने हथियार छिपाने पड़े थे। अर्जुन ने अपने धनुष को शमी वृक्ष में छुपाया था और अज्ञातवास की समाप्ति के बाद विजयादशमी के दिन उसे पुन: निकाला। इसके बाद उन्होंने कौरवों पर विजय प्राप्त की। तभी से शमी वृक्ष की पूजा और उसका आदान प्रदान विजयदशमी के दिन शुभ माना जाता है।
दशहरा के दिन दक्षिण भारत में होती है आयुध पूजा
दक्षिण भारत में इस दिन आयुध पूजा और कई स्थानों पर सरस्वती पूजा की परंपरा है। इस प्रकार यह पर्व पूरे देश को एक सूत्र में पिरोकर हमारी संस्कृति की विविधता और एकता को दर्शाता है।
दशहरा पर भद्रा का साया है क्या?
दशहरा 2 अक्टूबर 2025 को है। इस दिन भद्रा का साया नहीं रहेगा। इसलिए पूजा के लिए कई शुभ मुहूर्त इस दिन रहेंगे। ब्रह्म मुहूर्त के साथ ही विजय मुहूर्त और अभिजीत मुहूर्त में भी भक्त इस दिन पूजा कर सकते हैं।
दशहरे के दिन शस्त्र पूजा का मुहूर्त
शस्त्र पूजन के लिए 2 अक्तूबर को शुभ मुहूर्त दोपहर 1 बजकर 21 मिनट से शुरू होगा वहीं दोपहर 3 बजकर 44 मिनट तक शस्त्र पूजन के लिए समय शुभ माना जाएगा।
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