उपराष्ट्रपति चुनाव हारने पर कांग्रेस का दिलचस्‍प ‘सेलिब्रेशन’, वोट चोरी और मॉरल जीत का दावा साथ-साथ

सीपी राधाकृष्णन देश के अगले उपराष्ट्रपति होंगे. पूर्व उपराष्ट्रपति जगदीप धनखड़ के इस्तीफे के बाद 9 सितंबर को हुए चुनाव में बीजेपी के सीपी राधाकृष्णन ने विपक्षी उम्मीदवार बी. सुदर्शन रेड्डी को 152 वोटों से हरा दिया. उपराष्ट्रपति चुनाव में सीपी राधाकृष्णन को प्रथम वरीयता के 452 वोट मिले, जबकि विपक्ष के उम्मीदवार बी. सुदर्शन रेड्डी को 300 वोट मिल पाए. 

आंकड़े तो पहले से ही केंद्र में सत्ताधारी गठबंधन एनडीए के पक्ष में देखे जा रहे थे, लेकिन क्रॉस वोटिंग और अवैध मतों ने फासला ज्यादा बढ़ा दिया. उपराष्ट्रपति चुनाव में विपक्ष की अगुवाई कांग्रेस कर रही थी, लेकिन सारी तैयारियां धरी की धरी रह गईं. विपक्षी उम्मीदवार की जीत की संभावना तो वैसे भी नहीं के बराबर थी, लेकिन चुनाव ने INDIA ब्लॉक की एकजुटता के दावे की पोल खोलकर रख दी है. 
चुनाव से पहले सांसदों की ट्रेनिंग दोनों तरफ हुई थी, ताकि वोटों के अमान्य होने वाली स्थिति से बचा जा सके, लेकिन हुआ वही जिस बात का डर था. मॉक वोटिंग के बावजूद उपराष्ट्रपति चुनाव में 15 वोट अमान्य हो गए, जबकि बीजेपी ने 14 सांसदों के क्रॉस वोटिंग का दावा किया है. 

बेशक चुनाव सिर्फ जीतने के लिए ही नहीं लड़े जाते. चुनाव चैलेंज करने के लिए भी लड़े जाते हैं. मैदान में डटकर लड़ने के लिए भी चुनाव मैदान में उतरना होता है. कांग्रेस की तरफ से उपराष्ट्रपति चुनाव में नैतिक जीत का दावा किया जा रहा है, और वोट चोरी का भी आरोप लगाया गया है – क्या ऐसा ही है?

ये मोरल विक्ट्री कैसे?

उपराष्ट्रपति चुनाव के नतीजों पर कांग्रेस महासचिव जयराम रमेश ने सोशल साइट X पर अपनी बात रखी, विपक्ष उपराष्ट्रपति चुनाव में पूरी तरह एकजुट खड़ा रहा… विपक्ष का प्रदर्शन निस्संदेह रूप से सम्मानजनक रहा… संयुक्त उम्मीदवार, न्यायमूर्ति (सेवानिवृत्त) बी. सुदर्शन रेड्डी ने 40 फीसदी वोट हासिल किए… 2022 में विपक्ष को केवल 26 फीसदी वोट मिले थे… भाजपा की अंकगणितीय जीत वास्तव में नैतिक और राजनीतिक दोनों तरह से हार है… वैचारिक लड़ाई अनवरत जारी है.
और, इसी बात को कांग्रेस सांसद इमरान मसूदग ने अपने तरीके से पेश किया. इमरान मसूद ने बताया है कि विपक्ष के वोट शेयर में 14 फीसदी का इजाफा हुआ है. इमरान मसूद ने याद दिलाया कि पहले विपक्ष का वोट शेयर 26 फीसदी था, जो बढ़कर 40 फीसदी हो गया है. कांग्रेस सांसद का दावा है, विपक्ष कुछ खो नहीं रहा… बल्कि पा रहा है. जिस तरह का माहौल देश में बना है, बदलाव जरूर आएगा. 
कांग्रेस विपक्ष को मिले 40 फीसदी वोट पर ही अपनी पीठ थपथपा रही है, जबकि बीजेपी उम्मीदवार को 60 फीसदी वोट तब मिले हैं, जब एनडीए के लोकसभा में 293 ही सांसद हैं. पिछली बार ये संख्या 353 थी. अगर विपक्ष का 14 फीसदी वोट शेयर बढ़ा है, जाहिर है ऐसा तभी होगा जब सत्ता पक्ष की हिस्सेदारी इतनी ही घटेगी. पिछले उपराष्ट्रपति चुनाव में बीजेपी को 74.37 फीसदी वोट मिले थे. 

वोट शेयर बढ़ना जोश बढ़ाने के लिए काफी है, लेकिन क्रॉस वोटिंग को कांग्रेस कैसे देखेगी? और चुनाव में अमान्य घोषित किए गए वोटों के बारे भी कोई खास ख्याल तो होगा ही.

तो अंतरात्‍मा की आवाज पर इंडिया गुट वालों ने कर दी क्रॉस वोटिंग?

विपक्षी उम्मीदवार बी. सुदर्शन रेड्डी को 300 वोट मिले हैं, जबकि कांग्रेस का दावा था कि सभी 315 वोट उसके खाते में गए हैं. फिर 15 वोट कहां गए? साफ है क्रॉस वोटिंग में ये वोट एनडीए उम्मीदवार के खाते में पहुंच गए. वैसे भी विपक्ष ने वोटिंग के लिए अंतरात्‍मा की आवाज सुनने का आग्रह किया था.
बीजेडी, अकाली दल और बीआरएस ने चुनाव में हिस्सा नहीं लिया. ये वे राजनीतिक दल हैं जो सत्ता पक्ष के साथ नहीं हैं. विपक्ष के भी साथ नहीं हैं. सत्ता पक्ष के साथ नहीं हैं, तो विपक्ष ऐसे मामले में उनका सपोर्ट लेने की कोशिश कर सकता था. पिछले चुनाव में बीजेपी के टीडीपी को सपोर्ट कर देने के बाद से YSR कांग्रेस भी सत्ता पक्ष से नाराज है, लेकिन जगनमोहन रेड्डी की पार्टी ने भी एनडीए उम्मीदवार का सपोर्ट कर दिया.
एक मीडिया रिपोर्ट के अनुसार, एनडीए के कुछ नेताओं का कहना था कि झारखंड और महाराष्ट्र सहित कुछ राज्यों के विपक्षी सांसदों ने क्रॉस वोटिंग की है. बताया गया कि दोनों राज्यों के राज्यपाल होने के कारण सीपी राधाकृष्णन को वहां के सांसदों ने वोट दिया होगा. ऐसी ही बातें आम आदमी पार्टी और शिवसेना (यूबीटी) को लेकर भी हो रही हैं. हालांकि, दोनों ही दलों की तरफ से ऐसे आरोपों से इनकार किया गया है. 

सूत्रों के हवाले से आई एक और मीडिया रिपोर्ट में बताया गया है कि महाराष्ट्र के करीब 7 सांसदों ने क्रॉस वोटिंग की हो सकती है. ऐसे सांसदों में शिवसेना-यूबीटी के 3 और कांग्रेस के 4 सांसद हो सकते हैं. तमिलनाडु के भी कुछ सांसदों पर सीपी राधाकृष्णन का प्रभाव हो सकता है.

उपराष्ट्रपति का चुनाव मतपत्रों के माध्यम से किया गया है. मतदान गुप्त और अंतरात्मा के साथ हुआ. मतदान और मतगणना दोनों दलों के प्रतिनिधियों की उपस्थिति में की गई. दोनों दलों के प्रतिनिधि पूरे समय मौजूद रहे. कोई भी सांसदों का दिल और दिमाग नहीं चुरा सकता.
– किरेन रिजिजु, संसदीय कार्य मंत्री

विपक्ष उपराष्ट्रपति चुनाव में पूरी तरह एकजुट खड़ा रहा. विपक्ष का प्रदर्शन निस्संदेह रूप से सम्मानजनक रहा. संयुक्त उम्मीदवार, न्यायमूर्ति (सेवानिवृत्त) बी. सुदर्शन रेड्डी ने 40 फीसदी वोट हासिल किए. 2022 में विपक्ष को केवल 26 फीसदी वोट मिले थे. भाजपा की अंकगणितीय जीत वास्तव में नैतिक और राजनीतिक दोनों तरह से हार है. वैचारिक लड़ाई अनवरत जारी है.
– जयराम रमेश, कांग्रेस महासचिव

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