नई दिल्ली: चीफ ऑफ डिफेंस स्टाफ (सीडीएस) जनरल अनिल चौहान ने शुक्रवार को बताया कि पाकिस्तान और चीन में भारत के लिए सबसे बड़ी चुनौती कौन है? सीडीएस जनरल अनिल चौहान ने गोरखपुर में एक सभा को संबोधित करते हुए कहा कि चीन हमारे लिए सबसे बड़ी और पहली चुनौती है। उन्होंने कहा कि भारत के खिलाफ पाकिस्तान का छद्म युद्ध राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए दूसरी सबसे बड़ी चुनौती है लेकिन चीन के साथ सीमा विवाद हमारे लिए पहली चुनौती है। उन्होंने आगे कहा कि इस्लामाबाद की रणनीति हमेशा से ‘भारत को हजार जख्म देकर लहूलुहान करने’ की रही है।
जनरल चौहान ने 5 बड़ी चुनौती गिनवाईं
सीडीएस अनिल चौहान ने 5 बड़े चैलेंज के बारे में बात करते हुए कहा कि मैं चीन के साथ अनसुलझे सीमा विवाद को सबसे बड़ी चुनौती मानता हूं। दूसरी बड़ी चुनौती पाकिस्तान द्वारा भारत के विरुद्ध चलाया जा रहा छद्म युद्ध है। पाकिस्तान की रणनीति भारत को हजार जख्म देकर लहूलुहान करने की रही है। इसका मतलब है कि नियमित अंतराल पर भारत को धीरे-धीरे चोट पहुंचाते रहो और देश में खून बहाना जारी रखो।
उन्होंने कहा कि तीसरी सबसे बड़ी सुरक्षा चुनौती क्षेत्रीय अस्थिरता से उत्पन्न हो रही है, खासकर जिस तरह से भारत के पड़ोसी देश सामाजिक, राजनीतिक और आर्थिक अशांति का सामना कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि ऐसी स्थिति भारत को भी प्रभावित करती है।
युद्ध केवल जमीन, हवा और पानी तक ही सीमित नहीं होंगे। इसमें अंतरिक्ष, साइबर और विद्युत चुम्बकीय क्षेत्र भी शामिल होंगे। हमारे लिए ऐसे परिदृश्य के लिए समायोजन करना और खुद को तैयार रखना एक चुनौती होगी।
पांचवीं चुनौती के बारे में, सीडीएस ने कहा कि हमारे दोनों विरोधी परमाणु हथियारों से लैस हैं और यह हमारे लिए एक चुनौती बनी रहेगी कि हम किस तरह का पारंपरिक युद्ध लड़ेंगे और उनसे निपटने के लिए हम किस तरह का अभियान चुनेंगे। जनरल चौहान ने कहा कि छठी चुनौती भविष्य के युद्ध पर प्रौद्योगिकी और उसके प्रभाव को लेकर है।
परमाणु हथियारों से लैसे दो दुश्मनों से निपटना बड़ी चुनौती
जनरल चौहान ने कहा कि परमाणु हथियारों से लैस दो दुश्मनों से उत्पन्न खतरों से निपटना भारत के सामने एक और बड़ी चुनौती है, क्योंकि उसे किसी भी तरह के पारंपरिक युद्ध के लिए तैयार रहना होगा। उन्होंने कहा कि सशस्त्र बलों को ‘ऑपरेशन सिंदूर’ चलाने के लिए पूरी स्वतंत्रता दी गई थी और इसका उद्देश्य न केवल पहलगाम आतंकी हमले का बदला लेना था, बल्कि सीमा पार आतंकवाद पर एक ‘‘लक्ष्मण रेखा’’ भी खींचना था।
जम्मू कश्मीर के पहलगाम की बैसरन घाटी में 22 अप्रैल को हुए आतंकी हमले के जवाब में ‘ऑपरेशन सिंदूर’ चलाया गया था, जिसमें पाकिस्तान और उसके कब्जे वाले कश्मीर में आतंकी ठिकानों को निशाना बनाया गया था।
सीडीएस बोले- एनएसए की तरफ से मदद मिली
‘ऑपरेशन सिंदूर’ पर अपनी पहली सार्वजनिक टिप्पणी में, सीडीएस ने यह भी कहा कि राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार (एनएसए) ने सेना को मार्गदर्शन प्रदान करने के संदर्भ में ‘ऑपरेशन सिंदूर’ की योजना बनाने और कार्यान्वयन में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई, जिसमें लक्ष्य चयन, सैनिकों की तैनाती आदि के लिए रूपरेखा और कूटनीति का उपयोग शामिल था। जनरल चौहान का संबोधन मुख्यत: भारत की राष्ट्रीय सुरक्षा चुनौतियों पर था
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