PM मोदी का 10 मिनट इंतजार करते रहे पुतिन, फिर कार में साथ सफर… चीन में दिखी दोस्ती की मजबूत बुनियाद

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का चीन दौरा बेहद ही खास रहा. यहां वह एससीओ शिखर सम्मेलन के लिए पहुंचे थे लेकिन कई पहलुओं से उनकी यह यात्रा ऐतिहासिक रही. पीएम मोदी ने यहां अपने “प्रिय दोस्त” व्लादिमीर पुतिन से भी मुलाकात की. दोनों नेताओं की दोस्ती और आपसी बातचीत की देश-विदेश में चर्चा है. खास बात ये है कि पुतिन और मोदी ने एक ही कार में ट्रैवल भी किया. SCO समिट स्थल से होटल तक की यात्रा के दौरान यह दिलचस्प वाकया सामने आया.

दरअसल, राष्ट्रपति पुतिन ने पीएम मोदी के साथ एक ही कार से जाने की इच्छा जताई. इसके लिए उन्होंने लगभग 10 मिनट तक इंतजार किया. इसके बाद दोनों नेता पुतिन की ‘Aurus’ कार में बैठे और कई मुद्दों पर चर्चा की. होटल पहुंचने के बाद भी दोनों नेताओं ने कार में ही लगभग 45 मिनट तक बातचीत जारी रखी. इसके बाद करीब एक घंटे तक औपचारिक द्विपक्षीय बैठक भी हुई. इससे पहले एससीओ समिट स्थल पर भी मोदी-पुतिन की दोस्ती की एक शानदार झलक सामने आई, जहां दोनों नेता चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग के साथ भी खड़े होकर आपसी चर्चा करते देखे गए.

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी दो दिवसीय चीन दौरे पर थे, जहां उन्होंने तियानजिन में आयोजित शंघाई कोऑपरेशन ऑर्गेनाइजेशन (SCO) समिट में हिस्सा लिया. इनके अलावा चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग और रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन समेत कई वैश्विक नेताओं के साथ द्विपक्षीय बातचीत की. पीएम मोदी ने अपने दौरे को “प्रोडक्टिव विजिट” बताया और कहा कि उन्होंने यहां भारत का “अहम वैश्विक मुद्दों” पर रुख स्पष्ट किया है.

पीएम मोदी और पुतिन की द्विपक्षीय वार्ता

चीन दौरे पर पीएम मोदी ने रूसी राष्ट्रपति पुतिन के साथ आर्थिक, वित्तीय और ऊर्जा क्षेत्रों में सहयोग की समीक्षा की और इन संबंधों में लगातार हो रही प्रगति पर संतोष जताया. पीएम मोदी ने पुतिन से कहा कि यूक्रेन संघर्ष का जल्द से जल्द अंत होना “मानवता की पुकार” है. रूस के राष्ट्रपति ने प्रधानमंत्री मोदी को अपना ‘प्रिय मित्र’ कहकर संबोधित किया.

इसके जवाब में पीएम मोदी ने भी पुतिन से कहा कि “मैं हमेशा महसूस करता हूं कि आपसे मिलना एक यादगार अनुभव होता है.” पुतिन ने आगे कहा कि भारत और रूस के बीच की “विशेष और रणनीतिक साझेदारी” लगातार मजबूत हो रही है और समृद्धि की दिशा में आगे बढ़ रही है.

एससीओ समिट में भारत का रुख

SCO समिट में अपने संबोधन के दौरान प्रधानमंत्री मोदी ने आतंकवाद के खिलाफ लड़ाई में “डबल स्टैंडर्ड” छोड़ने की अपील की. उन्होंने कहा कि आतंकवाद से लड़ना “मानवता के प्रति कर्तव्य” है. पहलगाम आतंकी हमले का जिक्र करते हुए पीएम मोदी ने कहा कि यह न सिर्फ भारत की अंतरात्मा पर हमला था बल्कि हर उस राष्ट्र के लिए खुली चुनौती है जो मानवता में विश्वास करता है. प्रधानमंत्री ने SCO के लिए “S से सिक्योरिटी, C से कनेक्टिविटी और O अपॉर्चुनिटी” के रूप में एक नया फुल-फॉर्म भी पेश किया.

पीएम मोदी और शी जिनपिंग की मुलाकात

प्रधानमंत्री मोदी ने रविवार को समिट के इतर चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग से भी मुलाकात की. दोनों नेताओं ने ट्रेड और इन्वेस्टमेंट संबंधों को बढ़ाने पर जोर दिया ताकि ग्लोबल कॉमर्स को स्थिर किया जा सके. उन्होंने बॉर्डर से जुड़े मुद्दों पर भी चर्चा की और इसे “फेयर सॉल्यूशन” की दिशा में सुलझाने पर सहमति जताई. साथ ही दोनों देशों ने कई साझा चुनौतियों से निपटने के लिए द्विपक्षीय संबंधों को गहरा करने की प्रतिबद्धता दोहराई.

SCO समिट का भारत के लिए महत्व

SCO समिट में पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ सहित कई विश्व नेता मौजूद थे. पीएम मोदी ने आतंकवाद के मुद्दे पर सभी को एकजुट होने की अपील की. उन्होंने कहा कि आतंकवाद सिर्फ किसी एक देश की समस्या नहीं है, बल्कि पूरी मानवता के खिलाफ खतरा है.

एससीओ समिट के बाद पीएम मोदी का संदेश

चीन दौरे के आखिरी दिन प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर लिखा, “चीन की एक उपयोगी यात्रा का समापन, जहां मैंने SCO शिखर सम्मेलन में हिस्सा लिया और कई विश्व नेताओं के साथ बातचीत की.

साथ ही, भारत के रुख को अहम वैश्विक मुद्दों पर स्पष्ट किया.” उन्होंने चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग, चीनी सरकार और वहां की जनता को समिट के सफल आयोजन के लिए धन्यवाद भी दिया.

भारत-चीन के बीच सामान्य हो रहे संबंध

प्रधानमंत्री मोदी का यह दौरा ऐसे समय हुआ जब भारत-अमेरिका संबंध पिछले दो दशकों में सबसे खराब दौर से गुजर रहे हैं. अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की टैरिफ पॉलिसी और भारत के खिलाफ उनकी लगातार आलोचनाओं ने इस तनाव को और गहरा दिया है. ऐसे में चीन और रूस के साथ भारत के रिश्ते और ज्यादा अहम माने जा रहे हैं.

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