‘मुझे धमकाने आए…’ राहुल गांधी ने अरुण जेटली पर लगाए आरोप; बेटे रोहन ने LOP को दिया जवाब

लोकसभा में नेता विपक्ष राहुल गांधी ने शनिवार को कांग्रेस के एनुअल लीगल कॉन्क्लेव में एक बयान देकर सियासी सरगर्मियों को तेज कर दिया है। राहुल ने दावा किया कि दिवंगत बीजेपी नेता और पूर्व केंद्रीय मंत्री अरुण जेटली ने उन्हें कृषि कानून पर समर्थन करने के लिए धमकाया था। बीजेपी ने राहुल गांधी के दावे को फेक न्यूज बताया तो दूसरी ओर अरुण जेटली के बेटे रोहन जेटली ने भी राहुल गांधी पर पलटवार किया है।

दरअसल, लोकसभा नेता प्रतिपक्ष और कांग्रेस सांसद राहुल गांधी ने कहा, “मुझे याद है कि जब मैं कृषि कानूनों के खिलाफ लड़ रहा था, तो अरुण जेटली जी को मुझे धमकाने के लिए भेजा गया था। उन्होंने मुझसे कहा था कि अगर आप सरकार का विरोध करते रहे और कृषि कानूनों के खिलाफ लड़ते रहे, तो हमें आपके खिलाफ कार्रवाई करनी होगी। मैंने उनकी तरफ देखा और कहा किमुझे नहीं लगता कि आपको पता है कि आप किससे बात कर रहे हैं।”

पूर्व केंद्रीय मंत्री और भाजपा के शीर्ष नेता रहे अरुण जेटली को लेकर कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने कुछ आरोप लगाए हैं। राहुल गांधी के आरोपों पर अब अरुण जेटली के बेटे रोहन जेटली ने प्रतिक्रिया दी है। रोहन जेटली ने सोशल मीडिया पर साझा एक पोस्ट में लिखा कि ‘राहुल गांधी का दावा है कि कृषि कानूनों को लेकर मेरे पिता ने उन्हें धमकाया, लेकिन कृषि कानून 2020 में लाए गए और 2019 में ही मेरे पिता का देहांत हो गया था।’

वे आम सहमति बनाने में विश्वास रखते थे’रोहन जेटली ने सोशल मीडिया पर लिखा कि ‘राहुल गांधी दावा कर रहे हैं कि मेरे दिवंगत पिता अरुण जेटली ने उन्हें कृषि कानूनों को लेकर धमकाया था। मैं उन्हें याद दिला दूं कि मेरे पिता का देहांत 2019 में हुआ था। कृषि कानून 2020 में पेश किए गए थे। इससे भी महत्वपूर्ण बात यह है कि मेरे पिता के स्वभाव में किसी को भी धमकाना नहीं था। वह एक कट्टर लोकतांत्रिक व्यक्ति थे और हमेशा आम सहमति बनाने में विश्वास रखते थे। अगर कभी ऐसी स्थिति आती भी, जैसा कि राजनीति में अक्सर होता है, तो वह सभी के लिए एक पारस्परिक रूप से स्वीकार्य समाधान पर पहुंचने के लिए स्वतंत्र और खुली चर्चा का आह्वान करते थे। वह बस ऐसे ही थे और आज भी उनकी यही विरासत है। मैं राहुल गांधी की सराहना करूंगा कि अगर वे उन लोगों के बारे में बोलते समय सचेत रहें जो हमारे साथ नहीं हैं। उन्होंने मनोहर पर्रिकर जी के लिए भी कुछ ऐसा ही करने की कोशिश की, उनके अंतिम दिनों का राजनीतिकरण किया, वह भी बेहद ही घटिया था।’

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