कर्नाटक में मुख्यमंत्री पद को लेकर विवाद के बीच प्रदेश के एक वरिष्ठ विधायक का एक ऑडियो भी सामने आया है। दावा किया गया है कि इस ऑडियो में विधायक बीआर पाटिल अपने किसी करीबी से फोन पर बात कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि उनकी वजह से ही सिद्धारमैया मुख्यमंत्री बन गए। पाटिल ने दावा किया कि उन्होंने ही सिद्धारमैया को सोनिया गांधी से मिलवाया था। इसी वजह से उनकी लॉटरी लग गई और वह सीएम बन गए। उन्होंने कहा, सिद्धारमैया के ग्रह अच्छे थे और इसलिए वह मुख्यमंत्री बन गए।
पाटिल ने आगे कहा, देखिए, हमारा कोई गॉडफादर नहीं है। ना हमारे लिए भगवान हैं और ना ही पिता। उन्होंने पार्टी महासचिव रणदीप सिंह सुरजेवाला से मुलाकात की बात करते हुए कहा कि, मेरी बात उन्होंने गंभीरता से सुनी। अब देखते हैं कि क्या होता है। मैंने जो भी कहा उसपर उन्होंने ध्यान दिया। उन्होंने कहा, मैं आपका आभारी हूं। रिपोर्ट के मुताबिक केआर पेट मंड्या के दौरे के समय उन्होंने यह फोन किया था। उन्होंने मुख्यमंत्री पद को लेकर फैसला पार्टी हाई कमान पर छोड़ दिया। इससे पहले पाटिल का एक और ऑडियो वायरल हुआ था जिसमें वह राजीव गांधी हाउसिंग कॉर्पोरेशन में बड़े भ्रष्टाचार की बात कही थी।
भ्रष्टाचार को लेकर भी वायरल हुआ था ऑडियो
बीआर पाटिल कर्नाटक राज्य नीति और योजना आयोग के उपाध्यक्ष हैं। उन्होंने कहा था कि उन लोगों को ही घर दिए गए हैं जिन लोगों ने घूस दी है। चुने गए प्रतिनिधियों के लेटर का भी प्रभाव अधिकारियों पर नहीं हुआ।
बता दें कि मुख्यमंत्री पद को लेकर अंदरूनी विवाद के बीच कांग्रेस नेता और कर्नाटक प्रभारी रणदीप सुरजेवाला बेंगलुरु पहुंचे हैं। उन्होंने पार्टी विधायकों के साथ बैठक की। हालांकि सुरजेवाला ने कहा कि उन्होंने मुख्यमंत्री पद को लेकर कोई चर्चा ही नहीं की है। वहीं डिप्टी सीएम डीके शिवकुमार के करीबी विधायक इकबाल हुसैन का कहना है कि 100 विधायक चाहते हैं कि मुख्यमंत्री बदल जाए। अगर मुख्यमंत्री नहीं बदला गया तो 2028 का चुनाव कांग्रेस के लिए जीतना मुश्किल हो जाएगा। 2023 में कर्नाटक विधानसभा के चुनाव हुआ थे। उस समय माना जा रहा था कि डीके शिवकुमार मुख्यमंत्री पद के प्रबल दावेदार हैं। हालांकि यह जिम्मेदारी सिद्धारमैया को दी गई और उन्होंने राज्य में पार्टी की कमान स्वीकार की।
वहीं सोमवार को जब रणदीप सुरजेवाला बेंगलुरु पहुंचे तो इसे मुख्यमंत्री पद को लेकर चल रहे विवाद से जोड़कर देखा दया। हालांकि उन्होंने इन कयासों को खारिज करते हुए कहा कि वह संगठनात्मक समीक्षा के लिए आए थे। वहीं मैसूर में सिद्धारमैया ने कहा कि उनकी सरकार चट्टान की तरह है और पांच साल तक नहीं हिलेगी।
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