मालदीव के राष्ट्रपति की भारत विरोधी बयानबाजी बंद! जानें कैसे लाइन पर आए चीन समर्थक मुइज्जू

माले: मालदीव के राष्ट्रपति मोहम्मद मुइज्जू की भारत विरोधी बयानबाजी अब थम गई है। उन्होंने भारत और मालदीव के बीच एक उच्च स्तरीय समिति गठित करने पर भी सहमति दे दी है, जो दोनों देशों के संबंधों को मजबूत बनाएगी और स्थिरता प्रदान करेगी। इस समिति को गठित करने का फैसला शुक्रवार को दुबई में COP28 बैठक के इतर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और मालदीव के राष्ट्रपति मोहम्मद मुइज्जू के बीच पहली बैठक के दौरान लिया गया था। इससे पहले तक मुइज्जू लगातार भारत विरोधी लाइन पर चलते नजर आए थे। मालदीव के राष्ट्रपति पद के लिए उनका पूरा चुनाव प्रचार भारत विरोध पर ही केंद्रित था। उन्होंने प्रचार के दौरान से लेकर चुनाव में जीत मिलने और राष्ट्रपति पद की शपथग्रहण तक हर मौके पर भारत विरोधी बयानबाजी की थी। मुइज्जू ने ही चुनाव प्रचार के दौरान ‘इंडिया आउट’ का नारा दिया था।

भारत को लेकर मुइज्जू का मूड कैसे बदला

मालदीव का यह फैसला ऐसे समय में आया है, जब राष्ट्रपति मुइज्जू का अपने देश में एक बड़ी राजनीतिक प्रतिक्रिया का सामना करना पड़ रहा है। बताया जा रहा है कि मुइज्जू का अपने सहयोगी और मालदीव के पूर्व राष्ट्रपति अब्दुल्ला यामीन के साथ मतभेद हो गया है। यामीन को मुखर रूप से भारत विरोधी और चीन समर्थक नेता माना जाता है। भारत ने यामीन के कार्यकाल के दौरान मालदीव के साथ सभी संबंध तोड़ दिए थे, जो 2013 से 2018 तक जारी रहा। इस दौरान यामीन की चीन समर्थित सरकार ने जीएमआर इंफ्रास्ट्रक्चर के साथ 511 मिलियन डॉलर का सौदा रद्द कर दिया था। उन्होने इस सौदे समेत कई अन्य बड़ी परियोजनाओं को चीनी कंपनियों को बिना किसी टेंडर के दे दिया था।

भारत-मालदीव की उच्च स्तरीय समिति क्या करेगी

भारत और मालदीव के बीच इस उच्च स्तरीय समिति की सह-अध्यक्षता दोनों देशों के उच्चायुक्त कर सकते हैं। यह समिति द्विपक्षीय संबंधों, विशेष रूप से सुरक्षा और रक्षा मुद्दों के संबंध में मुद्दों को सुचारू करने का प्रयास करेगी। सूत्रों के अनुसार, राष्ट्रपति मुइज्जू ने दुबई में पीएम मोदी से मुलाकात के दौरान मालदीव में भारतीय सैन्य कर्मियों की मौजूदगी का मुद्दा उठाया था। जिसके बाद भारत ने बातचीत के माध्यम से इसका समाधान करने का आश्वासन दिया है। इस बैठक के बाद पीएम मोदी ने ट्वीट किया कि राष्ट्र्रपति मोहम्मद मुइज्जू के साथ मेरी आज एक सार्थक बैठक हुई। हमने विभिन्न क्षेत्रों में भारत-मालदीव मित्रता को बढ़ाने के तरीकों पर चर्चा की। हम अपने लोगों के लाभ के लिए सहयोग को गहरा करने के लिए मिलकर काम करने के लिए तत्पर हैं।

मालदीव को भारत की जरूरत क्यों है

मालदीव भारत से सटा हुआ देश है। यह छोटे-छोटे द्वीपों से घिरा हुआ देश है, जो कई मामलों में पूरी तरह भारत पर आश्रित है। मालदीव के लोग इलाज से लेकर खाने-पीने तक की चीजों के लिए भारत पर निर्भर हैं। भारत ने मालदीव के विकास में बड़ी भूमिका भी निभाई है और अरबों डॉलर का लोन भी दिया है। भारत अब भी मालदीव को 2 अरब डॉलर से अधिक की विकास सहायता प्रदान करने के अलावा, वहां कुछ बड़ी बुनियादी ढांचा परियोजनाओं में लगा हुआ है। मुइज्जू ने COP28 बैठक के इतर दुबई में रिलायंस समूह के अध्यक्ष मुकेश अंबानी से भी मुलाकात की थी।

चीन समर्थक यामीन ने मुइज्जू को दी बड़ी टेंशन

यामीन ने मालदीव में राष्ट्रपति चुनाव से पहले पीपुल्स नेशनल कांग्रेस (पीएनसी) बनाई थी और उसे अपनी पूर्व पार्टी प्रोग्रेसिव पार्टी ऑफ मालदीव (पीपीएम) के साथ जोड़ दिया था। राष्ट्रपति मुइज्जू इसी पीपीएम के उम्मीदवार बनकर चुनावी मैदान में उतरे थे। लेकिन यामीन ने मुइज्जू के राष्ट्रपति बनने के बाद अपना असली रंग दिखाना शुरू कर दिया है। यामीन को भ्रष्टाचार और मनी लॉन्ड्रिंग के आरोप में 11 साल की जेल की सजा हुई थी, लेकिन मुइज्जू के राष्ट्रपति बनते ही यामीन जेल से निकलकर अपने आलीशान महल में चले गए हैं। वह अपने घर से ऐसे फैसले ले रहे हैं, जिससे मुइज्जू के लिए मुसीबत खड़ी हो रही है।

मुइज्जू को सता रहा गठबंधन टूटने का डर

यामीन ने मुइज्जू की कैबिनेट में अपने कुछ करीबी नेताओं को नियुक्त कर अहम पोर्टफोलियो दिलवाए हैं। इसके अलावा यामीन ने अपनी खुद की पार्टी – पीपुल्स नेशनल फ्रंट (पीएनएफ) बना ली है – जिसके संस्थापक सदस्यों में उनके बेटे ज़ैन अब्दुल्ला यामीन भी हैं। उन्होंने अब औपचारिक रूप से पीपीएम छोड़ दिया है। मुइज्जू को अप्रैल 2024 में होने वाले संसदीय चुनावों में बहुमत हासिल करने की जरूरत है। मुइज्जू को इसके लिए पीपीएम-पीएनसी गठबंधन को बनाए रखना जरूरी है, लेकिन यामीन के दांव से उनका सपना दूर की कौड़ी होता दिखाई दे रहा है।

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