दुनिया महाशक्तियों में से एक रूस पिछले 3 साल से यूक्रेन के साथ युद्ध में है. दोनों ही देशों का इस युद्ध की वजह से काफी नुकसान हो चुका है. यूरोप और एशिया को जोड़ने वाले देश तुर्की के इस्तांबुल में आखिरकार दोनों के मिलने को लेकर सहमति बनी है. पहली बार रूस भी शांति वार्ता के लिए उत्सुक दिखाई दे रहा है लेकिन बात अंजाम तक पहुंच पाएगी, इसे लेकर रहस्य बरकरार है.
रूस और यूक्रेन के बीच 3 साल से चल रहे युद्ध के समाधान तक पहुंचने की उम्मीदें इस वक्त चरम पर हैं. डोनल्ड ट्रंप की मध्यस्थता के बाद रूस और यूक्रेन ने टेबल पर आने के लिए तैयार तो हुए हैं, लेकिन रूसी राष्ट्रपति के खुद तुर्की पहुंचने को लेकर सस्पेंस बना हुआ है. 12 मई को हुई एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में क्रेमलिन की ओर से कहा गया कि उनसे कोई ‘अल्टीमेटम लैंग्वेज’ में बात न करे, रूस इस तरह की भाषा बर्दाश्त नहीं करेगा.
तैयार बैठे हैं ज़ेलेंस्की
यूक्रेन के राष्ट्रपति वोल्दिमीर ज़ेलेंस्की शांति वार्ता के लिए तुर्की जाने को तैयार बैठे हुए हैं. गुरुवार को होने वाली इस बहुप्रतीक्षित मीटिंग को लेकर वो लगातार बयानबाज़ी भी कर रहे हैं. कभी वे पुतिन को सीधे-सीधे चुनौती देते हैं, तो कभी ये कह रहे हैं कि अगर पुतिन इस बैठक के लिए नहीं आए, तो अमेरिकी राष्ट्रपति को समझ लेना चाहिए कि वे युद्ध रोकना ही नहीं चाहते. फिलहाल इस बैठक में ट्रंप के भी पहुंचने की संभावना है, हालांकि ये निश्चित नहीं है.
पुतिन के आने पर है सस्पेंस
इस बार वार्ता से उम्मीद ज्यादा इसलिए है क्योंकि खुद रूस की ओर से मुलाकात का प्रस्ताव दिया गया है. यूक्रेन और उसके यूरोपीय सहयोगियों ने रूस के सामने एक महीने के संघर्षविराम का प्रस्ताव रखा था, लेकिन मॉस्को की ओर से इसे अस्वीकार कर दिया गया. हालांकि वो सीधी बातचीत के लिए तैयार हो गया. अब मु्द्दा ये है कि खुद व्लादिमीर पुतिन इस वार्ता के लिए आएंगे या नहीं, ये साफ नहीं है. मॉस्को की ओर से बताया नहीं गया है कि कोई रूसी प्रतिनिधि वहां पहुंचेगा या फिर पुतिन खुद आएंगे.
ट्रंप न की है मध्यस्थता
रूस-यूक्रेन अगर वार्ता को तैयार हुए हैं, तो ट्रंप की भूमिका इसमें बड़ी रही है. उन्होंने चुनावों में ही कहा था कि अगर वे जीते, तो युद्ध रुकवाएंगे. ट्रंप ने खुद रूस से सीधी बात की और इस लड़ाई को रुकवाने के लिए सभी पक्षों पर दबाव बनाया है. रूस की ओर से प्रस्ताव आने के बाद उन्होंने ज़ेलेंस्की को इस बात के लिए तैयार किया कि वो तुरंत इसे मान ले और युद्ध को खत्म करने में सहयोग दे.
क्या हो जाएगा समझौता?
इस बार लोग उम्मीद कर रहे हैं कि इस पूरे मामले में कुछ अच्छा नतीजा आ सकता है. अब तक रूस इस बात पर तैयार नहीं होता था लेकिन पहली बार उसका रवैया भी सकारात्मक है. साल 2022 से चल रहे इस युद्ध में नुकसान रूस का भी हुआ है क्योंकि सभी यूरोपीय देशों ने उससे व्यापार खत्म करके उसे आर्थिक नुकसान पहुंचाया है. दोनों देशों के अड़ियल रुख की वजह से ये युद्ध लंबा खिंच गया. हालांकि अब परिस्थितियां ज़रा बदली हुई हैं और उम्मीद की जा रही है कि दोनों देश शांति के लिए मान सकते हैं.
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