एमपी के इस धाम के अपने हैं नियम कानून, जानिए अशोकनगर के आनंदपुर धाम के बारे में, आने वाले हैं PM मोदी

अशोकनगरः मध्य प्रदेश के अशोकनगर जिले में स्थित आनंदपुर धाम में पीएम मोदी का दौरा है। प्रधानमंत्री के प्रस्तावित दौरे के बाद ट्रस्ट एक बार फिर जिले में चर्चा का विषय बना हुआ है। आनंदपुर ट्रस्ट एक महत्वपूर्ण धार्मिक और सामाजिक ट्रस्ट है। यह स्थान श्री परमहंस अद्वैतानंद महाराज की समाधि स्थल के लिए प्रसिद्ध है। साथ ही अद्वैत मठ का मुख्य आश्रम है। यहां के मठ के पंचम पादशाही के मंदिर बने हैं। इस ट्रस्ट के भारत में नहीं बल्कि विदेश में भी कई ट्रस्ट संचालित है।

उल्लेखनीय है कि जिले के ईसागढ़ में अद्वैत मत को मानने वालों का यह विश्व का एकमात्र मुख्य ट्रस्ट है। इस धाम को परमार्थ सेवा के नाम से जाना जाता है। यह धाम गुरू पाद शाही परंपरा का प्रमुख केंद्र है। फिलहाल यहां 6वीं गुरू पाद शाही चल रही है। जिसकी स्थापना 1930 में की गई और धीरे-धीरे इसका विकास किया गया।

धाम के बाद बना ट्रस्ट

1933 में धाम बनने के बाद इसका विस्तार कर 22 अप्रैल 1954 को आनंदपुर ट्रस्ट की स्थापना हुई। इस ट्रस्ट की जिले में हजारों एकड़ में फैली इनकी कृषि भूमि है। साथ ही लगभग 1400 बीघा में बने आश्रम के आस -पास कई किमी लंबी बाउंड्री के अंदर एक अनोखा शहर बसता है। जहां एक अलग नियम और आदेश लागू किया जाता है। इस आश्रम को मानने वाले अनुयायियों की गुरु भक्ति का अनोखा स्वरूप भी यहां देखने को मिलता है।

बाउंड्री के अंदर बसा वर्ल्ड क्लास शहर

जानकारी के मुताबिक आनंदपुर ट्रस्ट को लेकर अभी तक कई चर्चाएं और बातें ही आमजन में होती रही है। यह ट्रस्ट बेहद रहस्य और आमजन की पहुंच से काफी दूर और गुप्त रहा है। जिसको लेकर कई तरह की चर्चाएं होती रही है। ऐसे में अशोकनगर जैसे छोटे जिले में स्थित आनंदपुर ट्रस्ट के अंदर एक अनोखा शहर बसा हुआ है। जहां बड़ी-बड़ी इमारतें और वर्ल्ड क्लास सुविधा से लेश यह शहर है। इस शहर का खुद का हेलीपेड, 3 बस स्टैंड, बड़े-बड़े पार्क, पुल, चमचमाती सड़कें, वाहन बनाने के कारखाने, बड़ी-बड़ी आधुनिक मशीन और कई फायर ब्रिगेड तक उनके स्वयं की है। इसी का एक उदाहरण यह भी है कि प्रधानमंत्री मोदी के संभावित दौरे को लेकर भी इस आश्रम के अंदर ही हेलीपेड बनाएं गए हैं।

अपने स्वयं के लागू होते है नियम

माना जाता है कि वैसे तो लोकतंत्र और कानून से बाहर और ऊपर कोई नहीं है। लेकिन चार दिवारियों के अंदर संचालित होने वाले इस आश्रम में अपने खुद के नियम और आदेश चलते हैं। जहां किसी और की दखलअंदाजी नहीं होती। यहां दर्शन करने आने वाले और पर्यटकों के लिए एक अलग प्रवेश द्वार से गुरु महाराज के मंदिरों तक ले जाया जाता है। इस आश्रम में निगरानी के लिए हजारों सीसीटीवी कैमरे और रास्तों पर जगह-जगह बैरिकेडिंग और सुरक्षा गार्ड की भी तैनाती रहती है। इतनी सुरक्षा रहती है कि परिंदा भी पर नहीं मार सकता।

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