नई दिल्ली: पिछले दो चुनावों में 50 प्रतिशत से अधिक वोट लेकर विजयी रहे अरविंद केजरीवाल के किले में इस बार बीजेपी ने सेंध लगा दी है। इसकी बड़ी वजह मिडिल क्लास और झुग्गी फैक्टर है। सरकारी कर्मचारियों को 8वां वेतन आयोग का लाभ देने की घोषणा कर बीजेपी ने विधानसभा क्षेत्र के एक बड़े हिस्से को अपने पक्ष में किया। जिसका सीधा फायदा बीजेपी प्रत्याशी को मिला। उन्होंने कुछ हजार मतों से ही सही, लेकिन केजरीवाल के खिलाफ जीत हासिल की। वाल्मीकि समाज की नाराजगी भी केजरीवाल पर भारी पड़ी।
बड़ी संख्या में झुग्गियों का शिफ्ट हो जाना
सरोजिनी नगर में करीब 200 झुग्गियां थीं, जो कोर्ट के आदेश के बाद तोड़ दी गईं। इन झुग्गियों में बड़ी संख्या में केजरीवाल के वोटर्स थे। 2022 में शिफ्ट हुईं झुग्गियों के वोटर्स का इस बार आम आदमी पार्टी को वोट नहीं मिला। वोटर लिस्ट में उनका नाम नई दिल्ली विधानसभा सीट की वोटर लिस्ट में था। उनका नाम सूची से हटाने के लिए चुनाव से पहले आम आदमी पार्टी और बीजेपी में कई दिनों तक जुबानी जंग चली। आखिरकार वोटर लिस्ट से करीब 60 हजार लोगों के नाम हटाए गए और नई दिल्ली विधानसभा में वोटर्स की संख्या 1.60 लाख से एक लाख के करीब हो गई है। इसका सीधा फायदा बीजेपी प्रत्याशी प्रवेश वर्मा को मिला और वह केजरीवाल को हराने में सफल रहे। जो थोड़ी बहुत झुग्गियां इस क्षेत्र में बची हैं, वहां के वोटर्स ने बीजेपी की फ्री योजनाओं और जहां झुग्गी-वहीं मकान पर भरोसा जताया और बीजेपी के पक्ष में वोट किया।
मिडिल क्लास फैक्टर ने बदला चुनाव परिणाम
नई दिल्ली विधानसभा क्षेत्र में अधिकतर सरकारी दफ्तर और इन दफ्तरों में काम करने वाले सरकारी कर्मचारियों के आवास हैं। सांसदों के स्टाफ क्वॉर्टर भी इसी क्षेत्र में आते हैं। केंद्रीय बजट में 12 लाख तक सालाना आय वालों को टैक्स से बाहर करने का लाभ सीधा मिडिल क्लास के इन सरकारी कर्मचारियों को मिलता है। इतना ही नहीं, केंद्र सरकार ने 8वें वेतन आयोग के गठन करने की जो घोषणा की है, उसका सीधा लाभ भी इन कर्मचारियों को मिलेगा। इलाके की एक बड़ी जनसंख्या ने केंद्र की योजनाओं पर भरोसा कर बीजेपी प्रत्याशी के पक्ष में वोट किया। जिससे केजरीवाल को हार का सामना करना पड़ा।
वाल्मीकि समाज की नाराजगी भी झेलनी पड़ी
नई दिल्ली सीट पर जिस तरह से झुग्गी फैक्टर अहम है, उसी तरह से वाल्मीकि समाज को चुनाव में कोई भी पार्टी नजरअंदाज नहीं कर सकती है। वजह यह है कि यहां मंदिर मार्ग और चाणक्यपुरी में बापू समाज वाल्मीकि समाज के लोगों की दो बड़ी कॉलोनियां हैं, जहां इसी समाज के सरकारी कर्मचारी रहते हैं और इनकी संख्या करीब 18-20 हजार बताई जाती है। इस बार वाल्मीकि समाज केजरीवाल से काफी नाराज था। मंदिर मार्ग वाल्मीकि मंदिर में तो आप के खिलाफ समाज के लोगों ने महापंचायत और हवन भी किया था और वोट न देने की बात कही थी। वाल्मीकि समाज के लोगों की नाराजगी केजरीवाल के लिए चुनाव पर भारी पड़ गई।
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