संभल में बावड़ी कुआं के ASI सर्वे के बीच बड़ा अपडेट सामने आया है. खुदाई-सर्वे से पता चल रहा है कि इसके अंदर की दीवारें सुर्खी से बनी हुई हैं. पहले चूना, शीरा और राख से दीवारें बनाई जाती थीं. पहले सीमेंट नहीं होती थी, जिसके चलते सुर्खी का इस्तेमाल किया जाता था. खुदाई में पता चल रहा है कि दीवार में ककैइया ईंट लगी हुई हैं. पुराने जमाने में ही ककैइया ईंट का इस्तेमाल होता था. खुदाई में लगे नगर पालिका के कर्मचारियों ने भी इसकी पुष्टि की है. ASI की टीम भी देखकर हैरान है, क्योंकि इससे पुष्टि होती है कि यह कितनी प्राचीन है. यह किसी ऐतिहासिक खजाने से कम नहीं. मौके पर मौजूद एक अधिकारी कृष्ण कुमार सोनकर ने बताया कि बावड़ी कुआं की मैनुअली फावड़ा और बसूली से खुदाई हो रही है. क्योंकि जेसीबी से स्ट्रक्चर को नुकसान सकता है. खुदाई में एक महीना लग सकता है.
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