भारत के वीटो आगे झुके चीन और रूस, ब्रिक्‍स में पाकिस्‍तान को मिला धोखा, कश्‍मीर को ‘भुलाते’ ही तुर्की की बल्‍ले-बल्‍ले

मास्‍को: ब्रिक्‍स की सदस्‍यता का सपना देख रहे मोहम्‍मद अली जिन्‍ना के पाकिस्‍तान को बड़ा झटका लगा है। भारत के जोरदार विरोध का ऐसा असर हुआ कि ब्रिक्‍स की सदस्‍यता तो दूर उसे पार्टनर कंट्रीज की लिस्‍ट में भी जगह नहीं मिल पाई है। ब्रिक्‍स के 13 नए पार्टनर कंट्रीज का ऐलान हो गया है जिसमें सबसे बड़ा फायदा तुर्की को हुआ है। इन दिनों कश्‍मीर मुद्दे को अंतरराष्‍ट्रीय स्‍तर पर उठाने से परहेज कर रहे तुर्की को पार्टनर कंट्रीज में जगह मिल गई है। माना जा रहा है कि कश्‍मीर को लेकर तुर्की के राष्‍ट्रपति एर्दोगन के रुख में आए बदलाव की वजह से भारत ने ब्रिक्‍स में उसकी दावेदारी का विरोध नहीं किया। वहीं अब पाकिस्‍तान की अपने ही देश में थू-थू हो रही है। साथ ही चीन और रूस के धोखे को लेकर पाकिस्‍तानी सरकार से तीखे सवाल किए जा रहे हैं।

रूस ने 13 देशों को ब्रिक्‍स में पार्टनर कंट्री बनने का न्‍योता भेजा है जिसमें से 9 ने इसकी पुष्टि कर दी है। ये नौ देश हैं- बेलारूस, बोलविया, इंडोनेशिया, कजाखस्‍तान, क्‍यूबा, मलेशिया, थाइलैंड, यूगांडा, उज्‍बेकिस्‍तान। इन 13 देशों में पाकिस्‍तान का नाम नहीं है। ये पार्टनर कंट्रीज आगे चलकर ब्रिक्‍स के सदस्‍य बनेंगे। रूस से इस खबर के आते ही पाकिस्‍तान को सांप सूंघ गया है जो चीन के बल पर इस संगठन में शामिल होने के लिए पुरजोर ताकत लगाए हुए था। यही नहीं पाकिस्‍तान रूस को भी खुश करने में लगा हुआ था ताकि वह भारत पर दबाव डालकर ब्रिक्‍स की सदस्‍यता का रास्‍ता साफ कराए। वहीं भारत अपने पाकिस्‍तान विरोध पर पूरी ताकत से अड़ा हुआ था।

ब्रिक्‍स में पाकिस्‍तान की बड़ी व‍िफलता’

पाकिस्‍तान की विदेश मामलों की जानकार और चर्चित पत्रकार मरियाना बाबर ने एक्‍स पर लिखा’, ‘ यह पाकिस्‍तान के विदेश मंत्रालय की पूरी तरह से विफलता है। वह भी तब जब इशाक डार विदेश मंत्री हैं जिनकी विदेशी मामलों में सबसे कम रुच‍ि है। यहां तक कि नाइजीरिया ने पाकिस्‍तान से बेहतर किया है। पाकिस्‍तान को रूस, चीन और भारत ने ब्रिक्‍स से बाहर रखा।’ बता दें कि इशाक डार नवाज शरीफ के समधी और मरियम नवाज के ससुर हैं। इशाक डार पहले वित्‍त मंत्री हुआ करते थे लेकिन अब उन्‍हें शहबाज शरीफ के विरोध के बाद मजबूरन विदेश मंत्रालय से संतोष करना पड़ रहा है।

ये सभी 9 नए देश 1 जनवरी 2025 से ब्रिक्‍स के पार्टनर कंट्री होंगे। रूस इस समय ब्रिक्‍स का अध्‍यक्ष है और उसने इसका ऐलान किया है। असल में भारत ने पाकिस्‍तान की ब्रिक्‍स की दावेदारी का खुलकर कड़ा विरोध किया था। भारत रूस, ब्राजील, चीन और दक्षिण अफ्रीका के साथ ब्रिक्‍स का संस्‍थापक सदस्‍य देश है। ब्रिक्‍स का नियम है कि इस संगठन में नए सदस्‍य को शामिल करने को लेकर आम सहमति जरूरी है, ऐसे में भारत के सख्‍त रुख ने पाकिस्‍तान के लिए दरवाजे बंद कर दिए। वह भी तब जब चीन और उसके दबाव में रूस पाकिस्‍तान का सपोर्ट कर रहे थे। कई विश्‍लेषकों का कहना है कि अगर पाकिस्‍तान ब्रिक्‍स में शामिल होता तो इससे उसे काफी आर्थिक और राजनयिक लाभ मिलता।

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