यह साबित हो गया है कि ज्ञानवापी मंदिर था और…’, बोले आचार्य सत्येंद्र दास

काशी के ज्ञानवापी पर श्रीराम जन्मभूमि मंदिर के मुख्य पुजारी आचार्य सत्येंद्र दास ने कहा है कि अयोध्या के मंदिर-मस्जिद विवाद और काशी के ज्ञानवापी विवाद के बीच काफी कुछ सामान्य है. जिस तरह से ASI की सर्वे रिपोर्ट ने अयोध्या विवाद के मुकदमे में अहम रोल अदा किया. उसी तरह ज्ञानवापी मामले में भी होगा. 

इसके अलावा आचार्य सत्येंद्र दास कहा कि दोनों मामले एक जैसे ही हैं. सर्वेक्षण में ज्ञानवापी मस्जिद मंदिर होने के साक्ष्य मिले हैं. कोर्ट ने मंदिर मिलने के साक्ष्यों को सार्वजनिक करने का आदेश दिया है. जिससे यह साबित हो गया है कि वहां पर मंदिर था. इसलिए कोर्ट को चाहिए कि इन सबूतों के बाद ज्ञानवापी में मंदिर का निर्माण हो. जैसे पहले हिंदू वहां पर पूजा पाठ करते थे. उसी तरह से पूजा शुरू हो. क्योंकि जो सबूत ASI को मिले हैं उसे किसी भी तरह से नकार नहीं जा सकता है.

बता दें, ज्ञानवापी मस्जिद को लेकर ASI की रिपोर्ट सामने आ है. जीपीआर सर्वे पर ASI ने कहा है कि यहां पर एक बड़ा भव्य हिन्दू मंदिर था और ढांचे यानी मस्जिद के पहले एक बड़ा हिंदू मंदिर मौजूद था. ASI की सर्वे रिपोर्ट में मंदिर होने के 32 से ज्यादा प्रमाण मिलने की बात कही गई है. बताया गया है कि 32 ऐसे शिलालेख मिले हैं जो पुराने हिंदू मंदिरों के हैं. एएसआई की रिपोर्ट कहती है कि हिंदू मंदिर के खंभों को थोड़ा बहुत बदलकर नए ढांचे के लिए इस्तेमाल किया गया.  

सवाल- जिस तरह से ASI की सर्वे रिपोर्ट में अयोध्या विवाद में महत्वपूर्ण रहा तो क्या लगता है आपको कि काशी में जो सर्वे रिपोर्ट आई है वह अहम होने वाली है..!

जवाब – सर्वे रिपोर्ट अकाट्य है और जो सबूत मिले हैं उसे कोई नाकार नहीं सकता. अब कोर्ट को जल्द से जल्द यहा आदेश दे देना चाहिए. जैसे अयोध्या का हुआ वैसे ही काशी का भी हो जाना चाहिए.

सवाल- इस रिपोर्ट के बाद साधु संतों की भावना क्या है
जवाब- साधु संतों की प्रबल भावना है निश्चित रूप से मंदिर बने. अब तक कहा जाता था कि वहां मस्जिद है, लेकिन सबूत मिलने साफ हो गया है कि ज्ञानवापी मंदिर है, उन्होंने जिस भाग में मस्जिद बनाई वहां मंदिर का अवशेष अभी भी हैं. इसलिए ज्ञानवापी भगवान शिव का मंदिर है. इसमें कोई संदेह नहीं है और बड़ी प्रसन्नता है. 

 

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