J-K: सेना ने मार गिराया पाकिस्तान का चाइनीज ड्रोन, भारतीय सैन्य ठिकानों की कर रहा था Video रिकॉर्डिंग

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भारतीय सेना ने जम्मू-कश्मीर के खौर सेक्टर में पाकिस्तानी निगरानी ड्रोन को सफलतापूर्वक मार गिराया है. यह घटना चकला गांव के पास हुई, जहां ड्रोन महत्वपूर्ण रक्षा ठिकानों के करीब मंडरा रहा था. सेना के अनुसार यह ड्रोन चीन में बना है. इसे निगरानी मिशन के लिए बदला गया था.  
ड्रोन के साथ 64 जीबी माइक्रो एसडी कार्ड भी बरामद किया गया है. जांच में पाया गया कि कार्ड में भारतीय सेना के संवेदनशील स्थानों के फुटेज मौजूद हैं. सुरक्षा एजेंसियां घटना की गहराई से पड़ताल कर रही हैं. यह घटना भारत-पाकिस्तान सीमा पर ड्रोन आधारित जासूसी की बढ़ती चुनौती को फिर से उजागर करती है.

खौर सेक्टर लाइन ऑफ कंट्रोल के पास स्थित है. यहां सुरक्षा व्यवस्था हमेशा सतर्क रहती है. जब ड्रोन को महत्वपूर्ण सैन्य ठिकानों के आसपास देखा गया तो सेना ने तुरंत कार्रवाई की और उसे नीचे गिरा दिया. बरामद ड्रोन को चीन में बना है. यह डीजेआई मैविक सीरीज जैसा क्वाडकॉप्टर प्रतीत होता है, जिसमें हाई-रेजोल्यूशन कैमरा, जिम्बल और लेजर आधारित नेविगेशन सिस्टम लगा है.
64 जीबी लेक्सर माइक्रो एसडी कार्ड में एलओसी के पास भारतीय सेना के ठिकानों, बंकरों और अन्य संवेदनशील स्थानों के फोटो व वीडियो मिले हैं. इससे साफ होता है कि ड्रोन जानबूझकर जासूसी के उद्देश्य से भेजा गया था.

सीमा पर बढ़ता ड्रोन का खतरा  

पिछले कुछ वर्षों में पाकिस्तान की ओर से ड्रोन का इस्तेमाल बढ़ता जा रहा है. पहले हथियार और नशीले पदार्थ गिराने के लिए ड्रोन का इस्तेमाल होता था. अब निगरानी और खुफिया जानकारी जुटाने के लिए हो रहा है. चीनी तकनीक वाले सस्ते और आसानी से उपलब्ध ड्रोन को संशोधित कर सीमा पार भेजना आसान हो गया है. 

ये ड्रोन छोटी ऊंचाई पर उड़ते हैं जिससे पारंपरिक रडार सिस्टम को इन्हें पकड़ना मुश्किल हो सकता है. भारतीय सेना ने एंटी-ड्रोन सिस्टम और सतर्कता बढ़ाकर ऐसे कई प्रयासों को विफल किया है. इस घटना से साफ है कि सीमा सुरक्षा अब सिर्फ जमीनी और पारंपरिक नहीं रही, बल्कि हवाई निगरानी और तकनीकी जवाब भी उतना ही जरूरी हो गया है.
बरामद ड्रोन और मेमोरी कार्ड की फॉरेंसिक जांच से उड़ान पथ, कंट्रोल सोर्स और जुटाई गई जानकारी का पूरा खुलासा होने की उम्मीद है. सुरक्षा बलों ने क्षेत्र में गश्त और इलेक्ट्रॉनिक निगरानी बढ़ा दी है. विशेषज्ञों का मानना है कि ऐसे प्रयासों को रोकने के लिए एंटी-ड्रोन तकनीक, जैमिंग सिस्टम और स्थानीय सतर्कता को और मजबूत करने की जरूरत है. भारत लगातार स्वदेशी एंटी-ड्रोन सिस्टम विकसित कर रहा है जो इस दिशा में मददगार साबित हो रहे हैं. 

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