श्रीनगर एयरपोर्ट से दो अमेरिकी नागरिक हिरासत में, चेकिंग में मिला सैटेलाइट फोन

श्रीनगर एयरपोर्ट पर सुरक्षा जांच के दौरान दो अमेरिकी नागरिकों को हिरासत में लिया गया. उनके सामान की जांच में एक गार्मिन सैटेलाइट फोन मिला. पहले एयरपोर्ट सिक्योरिटी ने उनसे पूछताछ की और फिर उन्हें पुलिस को सौंप दिया गया. जिसके बैग से फोन मिला उसका नाम जेफरी स्कॉट है और वो अमेरिका के मोंटाना राज्य का रहने वाला है. 
एयरपोर्ट पर रूटीन सिक्योरिटी चेक के दौरान जब इन दोनों अमेरिकी नागरिकों का सामान स्कैन किया गया तो एक बैग में गार्मिन कंपनी का सैटेलाइट फोन मिला. गार्मिन एक जानी-मानी कंपनी है जो जीपीएस और सैटेलाइट डिवाइस बनाती है.
सुरक्षाकर्मियों ने दोनों को तुरंत रोका और शुरुआती पूछताछ की. जवाब संतोषजनक न लगने पर दोनों को पुलिस के हवाले कर दिया गया. अभी पुलिस आगे की जांच कर रही है.

जेफरी स्कॉट कौन है?

जिस शख्स के बैग से सैटेलाइट फोन बरामद हुआ उसका नाम जेफरी स्कॉट है. वो अमेरिका के मोंटाना राज्य से है. मोंटाना अमेरिका का एक पहाड़ी राज्य है. फिलहाल यह साफ नहीं है कि दोनों अमेरिकी श्रीनगर किस मकसद से आए थे और सैटेलाइट फोन उनके पास क्यों था.

क्या पहले भी ऐसा हुआ है?

यह पहली बार नहीं है. इससे पहले भी भारत के अलग-अलग एयरपोर्ट पर अमेरिकी नागरिकों को सैटेलाइट फोन के साथ पकड़ा जा चुका है. कई बार विदेशी पर्यटक यह जाने बिना भारत आ जाते हैं कि यहां सैटेलाइट फोन बैन है. लेकिन कश्मीर जैसे संवेदनशील इलाके में ऐसे मामलों को सुरक्षा एजेंसियां बहुत गंभीरता से लेती हैं.

भारत में सैटेलाइट फोन को लेकर नियम क्या है?

DoT और भारतीय दूतावास के अनुसार, भारत में थुराया या इरिडियम जैसे सैटेलाइट फोन लाना सख्त तौर पर बैन है, खासकर विदेशियों के लिए.
अगर कोई व्यक्ति ऐसा फोन अपने साथ (चाहे बैगेज में या हैंड बैग में) लेकर आता है, तो उसे एयरपोर्ट पर कस्टम्स में इसकी जानकारी देना जरूरी है. लेकिन सिर्फ बताने से काम नहीं चलेगा – इसके लिए DoT का लाइसेंस होना भी जरूरी है. अगर लाइसेंस नहीं है, तो फोन को जब्त कर लिया जाएगा.
सरकार के नए नियम, यानी टेलीकम्युनिकेशन एक्ट 2023 के तहत सैटेलाइट फोन या सैटेलाइट GPS डिवाइस रखना भी अपराध माना जा सकता है, अगर उसके लिए अनुमति नहीं ली गई है.
अगर कोई नियम तोड़ता है, तो उसके खिलाफ कड़ी कार्रवाई हो सकती है:
जुर्माना: कम से कम 50,000 रुपये से शुरू, कई मामलों में डिवाइस की कीमत जितना या उससे ज्यादा भी हो सकता है (कुछ मामलों में ₹1 लाख से ज्यादा) डिटेंशन: एयरपोर्ट पर ही 24 से 72 घंटे तक रोका जा सकता है
कानूनी कार्रवाई: भारतीय वायरलेस टेलीग्राफी अधिनियम 1933 (धारा 6), भारतीय टेलीग्राफ अधिनियम 1885 (धारा 20) और दूरसंचार अधिनियम 2023 के तहत 3 साल तक की जेल और 2 करोड़ रुपये तक का जुर्माना (या दोनों) हो सकता है.

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