सिंधिया राजपरिवार में महल-कोठियों समेत संपत्ति बंटवारे का फॉर्मूला तैयार:ग्वालियर के जय विलास पैलेस से लेकर दिल्ली-मुंबई की संपत्तियों सहित एक दर्जन से अधिक मुकदमे समझौते से निपटेंगे

देश के चर्चित राजघरानों में शुमार सिंधिया राजपरिवार का सालों पुराना संपत्ति विवाद अब खत्म होता दिख रहा है।
केंद्रीय मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया और उनकी बुआओं (वसुंधरा राजे सिंधिया, पूर्व मुख्यमंत्री राजस्थान, यशोधरा राजे सिंधिया पूर्व मंत्री मप्र और उषा राजे राणा व अन्य) के बीच अरबों रुपये की संपत्तियों के बंटवारे पर तमाम बैठकों के बाद समझौते के फॉर्मूले पर सहमति बन चुकी है।
अब सिर्फ कानूनी मुहर लगना बाकी है। इसके लिए ज्योतिरादित्य सिंधिया की ओर से ग्वालियर जिला न्यायालय में आवेदन पेश कर दिया है। जिस पर सुनवाई 5 जुलाई को होगी। वहीं बुआओं की ओर से अगले सप्ताह आवेदन दाखिल होने की संभावना है। इस महा-समझौते से दिल्ली, मुंबई, पुणे और ग्वालियर की अदालतों में वर्षों से लंबित एक दर्जन से अधिक मुकदमों का पटाक्षेप हो जाएगा।

महल-कोठी…

समझौते के दायरे में ये प्रमुख संपत्तियां (कॉलम – 2)
• ग्वालियर की विरासत: भव्य जय विलास पैलेस, ऊषा किरण पैलेस होटल, छोटी विश्रांति और हिरण्यवन कोठी व अन्य।
• महानगरों की मिल्कियत: पुणे का पद्मा विलास पैलेस, मुंबई के आलीशान समुद्र फ्लैट्स और दिल्ली (सफदरजंग रोड) स्थित लेखा विहार व सिंधिया विला।
• उज्जैन का वैभव: ऐतिहासिक कालिदेह पैलेस भी इस परिवार की धरोहर है।
• रानी महल का समीकरण: वर्तमान में संयुक्त संपत्ति माने जाने वाले रानी महल में ज्योतिरादित्य सिंधिया का परिवार और पूर्व मंत्री यशोधरा राजे सिंधिया दोनों रहते हैं, इसे लेकर भी स्थिति साफ हो जाएगी।

इन ऐतिहासिक संपत्तियों पर थीं नजरें..

‘जो जहां काबिज, वो संपत्ति उसी की’ फॉर्मूले पर बनी बात
पर्दे के पीछे से छनकर आ रही खबरों के अनुसार, इस समझौते का मूल मंत्र बेहद व्यावहारिक रखा गया है। सूत्रों के अनुसार ‘जो जिस जगह पर काबिज है, वो संपत्ति उसी के पास रहेगी।’ यानी वर्तमान कब्जे को ही अंतिम मालिकाना हक मान लिया जाएगा। भले ही कागजों में उसका पूर्व मालिकाना हक किसी भी पक्ष या ट्रस्ट के पास रहा हो। हालांकि इसकी आधिकारिक पुष्टि होना बाकी है।

सिर्फ महल नहीं…

ट्रस्ट और कंपनियों में बंटी है विरासत
ग्वालियर-चंबल की अधिकांश संपत्तियां 1970 के दशक से ‘सर जयाजीराव ट्रस्ट’ और ‘कृष्ण माधव ट्रस्ट’ जैसी संस्थाओं के अधीन हैं। दिल्ली की ‘सिंधिया पॉटरीज’ की जमीन पर बनी 3 आलीशान कोठियों में तीनों बुआएं (वसुंधरा, यशोधरा और उषा राजे) रहती हैं। पूर्व के बंटवारे में माधवराव सिंधिया को मिली ‘सिंधिया इन्वेस्टमेंट प्राइवेट लिमिटेड (SIPL)’ की कमान वर्तमान में ज्योतिरादित्य सिंधिया के पास है।

इनके बीच होना है समझौता:

ज्योतिरादित्य सिंधिया, वसुंधराराजे सिंधिया, यशोधरा राजे, उषा राजे राणा, बालकृष्णराव सिंधिया, कनिष्कादेवी, प्रतिमादेवी, चित्रांगदा राजे।

पन्ने का दिव्य शिवलिंग

राजमाता की धरोहर आएगी अब ज्योतिरादित्य के हिस्से!
इस पूरे संपत्ति बंटवारे में सबसे भावुक और आध्यात्मिक पहलू पन्ने (रत्न) का ‘शिवलिंग’ है। यह वही दिव्य शिवलिंग है जिसे राजमाता विजयाराजे सिंधिया ने आजीवन अपने पास रखा।
चर्चा है कि यह बेशकीमती शिवलिंग वर्तमान में राजस्थान की पूर्व मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे सिंधिया के पास सुरक्षित है। इस बात की अभी कोई आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है, लेकिन सूत्रों का दावा है कि नए समझौते के तहत यह ऐतिहासिक और पवित्र शिवलिंग अब केंद्रीय मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया के हिस्से में आने जा रहा है।

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