गुना का धनिया और खरगोन की मिर्च को मिला ग्लोबल टैग: MP की इन 12 फसलों का दुनिया में बजेगा डंका; देखें पूरी लिस्ट

मध्य प्रदेश ने GI Tag के क्षेत्र में नया इतिहास रच दिया है. पहली बार देश में किसी एक राज्य की 12 उद्यानिकी फसलों को एक साथ जीआई टैग मिला है. इस उपलब्धि से प्रदेश के किसानों, बागवानी उत्पादों और स्थानीय ब्रांडिंग को बड़ा फायदा मिलने की उम्मीद है. इस ऐतिहासिक सूची में गुना का धनिया, नरसिंहपुर के बरमान घाट का बैंगन (भटे), बैतूल का गजरिया आम, खरगोन की लाल मिर्च, मांडू की खुरासानी इमली, जबलपुर का मटर, सिवनी का सीताफल, मालवी आलू और गराड़ू, नरसिंहपुर का गुड़, जबलपुर का सिंघाड़ा, आलीराजपुर का नूरजहां आम, बुरहानपुर का केला, इंदौरी जीरावन, रतलाम सैलाना की बालम ककड़ी और छतरपुर का पान शामिल हैं.

इसके अलावा राज्य सरकार ने उज्जैन की इमली, आलीराजपुर का अचारी आम, मालवा का सफेद प्याज, झाबुआ का दाल-पानिया, मंदसौर का देशी जीरा, बुरहानपुर की जलेबी और अशोक नगर की खिरनी को भी जीआई टैग दिलवाने के लिए प्रस्ताव आगे भेजा है.

जीआई टैग पाने वाली प्रमुख फसलों की खासियतें

कुम्भराज धनिया (गुना)

गुना जिले में इसकी खेती लगभग 60 साल से की जा रही है. यह किस्म 85-90 दिनों में पककर तैयार होती है और प्रति हेक्टेयर 12-15 क्विंटल उपज देती है. इसमें 0.4 से 0.50 प्रतिशत वाष्पशील तेल होता है, जिससे इसे तेज स्वाद, मिठास और शानदार सुगंध मिलती है. इसका चमकीला हरा रंग और उत्तम आकार इसे खास बनाता है. अकेले गुना में सालाना लगभग 32,000 मीट्रिक टन धनिया पैदा होता है, जो देश के कुल उत्पादन का 20 से 25 प्रतिशत है. इसे विदेशों में भी निर्यात किया जाता है.

बरमान के भटे (नरसिंहपुर)

नर्मदा नदी की बलुई मिट्टी और वहां के कम तापमान के कारण इन बैंगन (भटे) का स्वाद बेहद अनोखा होता है. यही वजह है कि मंडियों में विशेष रूप से बरमान के भटे की भारी मांग रहती है और लोग इसे दूर-दूर से मंगवाते हैं.

बैतूल का गजरिया आम

बैतूल जिला कभी गोंड राजाओं का केंद्र था, जो यहां के 500 साल से अधिक पुराने खेड़ला किला, भवरगढ़, सांवलीगढ़, शेरगढ़ और असीरगढ़ किलों से प्रमाणित होता है. गजरिया आम ताजा खाने के अलावा अचार और अमचूर बनाने के काम आता है. पके आम से स्क्वैश, जूस, शर्बत, जैम और अमावट तैयार की जाती है. हालांकि, पारंपरिक रूप से इसके बाग अवैज्ञानिक तरीके से लगाए जाने के कारण अभी इसकी उत्पादकता कम है.

खरगोन की मिर्च

निमाड़ और मालवा क्षेत्र राज्य के सबसे बड़े मिर्च उत्पादक क्षेत्र हैं. खरगोन जिले में साल-दर-साल मिर्च का रकबा बढ़ रहा है. यहां सनावद के पास ‘बेड़िया’ में देश की सबसे बड़ी मिर्च मंडियों में से एक स्थित है. यहां की प्रसिद्ध लाल मिर्च को चीन, पाकिस्तान, मलेशिया और सऊदी अरब जैसे देशों में निर्यात किया जाता है.

खुरासानी इमली (मांडू)

यह मूल रूप से अफ्रीका के शुष्क राज्य का ‘बाओबाब’ वृक्ष है, जिसे 14वीं शताब्दी में महमूद खिलजी के शासनकाल के दौरान मांडव लाया गया था. मांडू की माटी में रच-बस जाने के बाद इसे खुरासानी इमली या मांडवी इमली नाम मिला. यह पेड़ देखने में ऐसा लगता है मानो किसी ने इसे जड़ों समेत उल्टा लगा दिया हो, जिसका तना नीचे और जड़ें ऊपर हों. इसकी पत्तियां केवल वर्षा ऋतु में ही दिखाई देती हैं. 

सिवनी का जंबो सीताफल

600 से 700 ग्राम तक वजन वाला यह सीताफल अपने बड़े आकार और मीठे स्वाद के कारण प्रसिद्ध है.

मालवी आलू और गराडू

गराडू मालवा की सबसे प्रमुख फसलों में से एक है. यह रतालू की प्रजातियों में से एक है और स्वतंत्र रूप से खेती की गई है. मालवा में गराडू एकमात्र ऐसा है जिसकी नियमित रूप से खेती की जाती है और खाई जाती है, गराडू की उत्पत्ति का केंद्र लगभग मालवा प्लेटू  है और भारत का अन्य भाग भी हो सकता है. गराडू को पर्यंत रतालू के नाम से भी जाना जाता है. गराडू (बैंगनी रतालू) मालवा क्षेत्र की एक महत्वपूर्ण फसल है, इसकी सत्र में पारंपरिक और आधुनिक मिठाइयों में उपयोग किया जाता है.

नरसिंहपुर का गुड़

प्रदेश का ‘शुगर बाउल’ कहलाने वाला नरसिंहपुर हाई क्वालिटी वाले गुड़ उत्पादन के लिए जाना जाता है.

जबलपुर का सिंघाड़ा

यहां उत्पादित सिंघाड़ा अपने आकार, पोषण और स्वाद के लिए प्रसिद्ध है और हजारों किसान इसकी खेती से जुड़े हैं.

आलीराजपुर का नूरजहां आम

3 से 3.5 किलो तक वजन वाला नूरजहां आम दुनिया की सबसे बड़ी आम किस्मों में गिना जाता है और अपनी अनूठी पहचान रखता है.
आलीराजपुर जिले में होने वाला यह आम 3500 रुपये किलो तक बिकता है.

और भी उत्पाद GI टैग की दौड़ में

राज्य सरकार ने कई अन्य पारंपरिक उत्पादों के लिए भी GI टैग का प्रस्ताव भेजा है. इनमें उज्जैन की इमली, आलीराजपुर का अचारी आम, मालवा का सफेद प्याज, झाबुआ का दाल-पानिया, मंदसौर का देसी जीरा, बुरहानपुर की जलेबी औरअशोकनगर की खिरनी शामिल है. 

Loading

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *