72 घंटे में पहला हमला… हिंसा में धधक रहे सूडान पर महाशक्तियों की वॉर्निंग

सूडान में तेजी से बढ़ता गृहयुद्ध अब एक और बड़े मानवीय संकट की ओर बढ़ रहा है. रैपिड सपोर्ट फोर्सेज (RSF) ने नॉर्थ कोर्डोफान की राजधानी अल-ओबेद को तीन तरफ से घेर लिया है. उत्तर और पश्चिम से RSF की सेनाएं आगे बढ़ रही हैं. ड्रोन हमलों में पांच ऑयल टैंक फार्म नष्ट हो चुके हैं. 
अमेरिका और संयुक्त राष्ट्र ने चेतावनी दी है कि यहां बड़े पैमाने पर नरसंहार हो सकता है. यह अनुमान नहीं, बल्कि अल-फाशर के अनुभव पर आधारित है. अक्टूबर 2025 में RSF ने अल-फाशर पर कब्जा किया था. संयुक्त राष्ट्र की जांच में उस हमले में नरसंहार के सबूत मिले थे. अब अल-ओबेद उसी रास्ते पर जा रहा है. 

अल-ओबेद की अहमियत

अल-ओबेद सूडान के मध्य भाग में स्थित महत्वपूर्ण शहर है. यहां से गुजरने वाली हाईवे पश्चिमी दारफुर को पूर्वी इलाकों से जोड़ती है. साथ ही ऑयल पाइपलाइन भी इसी क्षेत्र से गुजरती है. अगर RSF इस शहर पर कब्जा कर लेता है तो पूरे पश्चिमी सूडान पर उसका नियंत्रण मजबूत हो जाएगा. 
यह खार्तूम के बाद RSF की सबसे बड़ी क्षेत्रीय जीत होगी. सूडानी आर्म्ड फोर्सेज (SAF) हवाई हमलों से जवाब दे रही है, लेकिन RSF की घेराबंदी तेज होती जा रही है. विशेषज्ञों का मानना है कि अगले 72 घंटों में बड़ा हमला हो सकता है.
यह युद्ध अप्रैल 2023 से चल रहा है. अब तक लाखों लोग मारे जा चुके हैं. 1.4 करोड़ से ज्यादा लोग विस्थापित हो चुके हैं. यह दुनिया का सबसे बड़ा मानवीय संकट है. करीब 3.3 करोड़ लोगों को तुरंत मदद की जरूरत है. भूख, बीमारियां और यौन हिंसा आम हो गई हैं.

अल-फाशर से सबक

अक्टूबर 2025 में RSF ने अल-फाशर पर कब्जा किया. संयुक्त राष्ट्र की फैक्ट-फाइंडिंग मिशन ने पाया कि RSF ने जागावा और फुर समुदायों के खिलाफ निशाना साधा. हत्याएं की, सामूहिक बलात्कार किया और लोगों को जबरन गायब किया. रिपोर्ट में कहा गया कि इन हरकतों में नरसंहार के लक्षण थे. 

RSF ने 18 महीने की घेराबंदी के दौरान जानबूझकर ऐसी स्थितियां बनाईं जिनसे इन समुदायों का विनाश हो. अब अल-ओबेद में भी RSF की तैयारी उसी तरह दिख रही है. UN सिक्योरिटी काउंसिल और अमेरिका ने RSF से हमला रोकने की मांग की है.
यह युद्ध सूडान की सेना और RSF के बीच सत्ता संघर्ष से शुरू हुआ. RSF पहले जनजातीय मिलिशिया था जो दारफुर में जांजावीड के नाम से जाना जाता था. अब दोनों पक्ष विदेशी समर्थन ले रहे हैं. युद्ध ने देश को तबाह कर दिया है. अस्पताल नष्ट हो गए, स्कूल बंद हैं और लाखों बच्चे भूख से जूझ रहे हैं.

2026 में भी 3.3 करोड़ लोगों को मानवीय मदद चाहिए. पड़ोसी देशों में लाखों शरणार्थी पहुंच चुके हैं, जिससे क्षेत्रीय अस्थिरता बढ़ रही है. RSF अगर अल-ओबेद ले लेता है तो SAF का मध्य सूडान पर नियंत्रण कमजोर हो जाएगा. इससे युद्ध और लंबा खिंच सकता है. दोनों पक्ष नागरिकों को निशाना बना रहे हैं. यौन हिंसा को हथियार के रूप में इस्तेमाल किया जा रहा है.

दुनिया की चुप्पी

सूडान का संकट दुनिया का सबसे बड़ा विस्थापन संकट है, फिर भी इसे सिर्फ एक प्रतिशत कवरेज मिलता है. अन्य संघर्षों की तुलना में यहां की खबरें कम आती हैं. UN और अमेरिका चेतावनी दे रहे हैं, लेकिन ठोस कार्रवाई कम है.अगर अल-ओबेद में नरसंहार हुआ तो इसे रोकना मुश्किल होगा. अंतरराष्ट्रीय समुदाय को तुरंत हस्तक्षेप करना चाहिए. शांति वार्ता, मदद पहुंचाना और अपराधियों को जवाबदेह ठहराना जरूरी है.

अल-ओबेद पर कब्जा सूडान के युद्ध को नया मोड़ दे सकता है. RSF पूरे पश्चिमी इलाके को नियंत्रित कर लेगा. इससे लाखों और लोग विस्थापित होंगे और भुखमरी बढ़ेगी. सूडान पहले ही दुनिया का सबसे भूखा देश बन चुका है. अगर जल्द शांति नहीं आई तो नरसंहार की घटनाएं बढ़ेंगी.
सूडान के लोग शांति चाहते हैं, लेकिन सत्ता की लड़ाई उन्हें बर्बाद कर रही है. दुनिया को अब इस संकट को नजरअंदाज नहीं करना चाहिए. अल-ओबेद अगले नरसंहार का केंद्र न बने, इसके लिए तत्काल कदम उठाने होंगे.

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