राम मंदिर चढ़ावा मामला: कौन हैं वो 9 कर्मचारी जिन्होंने महंगे फोन और गाड़ियां खरीदीं? SIT की 19 घंटे की मैराथन जांच

अयोध्या के राम मंदिर में चढ़ावा चोरी के मामले की जांच के लिए गठित विशेष जांच दल (SIT) ने दो दिनों के भीतर कुल 19 घंटे तक मंदिर परिसर के भीतर रहकर गहन पड़ताल की है. जांच टीम ने दानपात्र से पैसे निकालने, गड्डी बनाने और गिनने की पूरी व्यवस्था को स्वयं परखते हुए सुरक्षा व्यवस्था का जायजा लिया है. इस बीच, सोशल मीडिया पर लगे गंभीर आरोपों के बाद मुख्य संदिग्ध रामशंकर उर्फ टिन्नू यादव ने कैमरे पर अपना पहला बयान जारी कर खुद पर लगे तमाम आरोपों को पूरी तरह निराधार बताया है.

SIT की मैराथन जांच और कर्मचारियों पर शक

एसआईटी ने पहले दिन 8 घंटे और दूसरे दिन 11 घंटे तक मंदिर में पूछताछ की. टीम ने चढ़ावा रूम का सीसीटीवी डेटा करीब एक दर्जन पेनड्राइव में लिया है. अब पूर्व कर्मचारियों का डेटा निकालकर उनसे भी पूछताछ की जाएगी. 

अब तक की जांच में 9 ऐसे कर्मचारी मिले हैं जिन्होंने हाल ही में महंगे फोन और गाड़ियां खरीदी हैं, जिससे उन पर संदेह गहरा गया है. एसआईटी ने स्टेट बैंक के कर्मियों से भी उनके कामकाज पर विस्तृत जानकारी ली है.

कैमरे पर पहली बार आए टिन्नू यादव

मामले में चर्चा में आए रामशंकर उर्फ टिन्नू यादव ने पहली बार कैमरे पर आकर अपनी सफाई दी. 51 वर्षीय टिन्नू ने बताया कि वह 1993 से विश्व हिंदू परिषद और राम जन्मभूमि न्यास से जुड़े रहे हैं. साल 2019 में सुप्रीम कोर्ट का फैसला आने के बाद उन्हें कारसेवपुरम से मंदिर परिसर में सेवा कार्य के लिए लगाया गया था. उन्होंने सोशल मीडिया पर चल रहे चोरी और 50 करोड़ रुपये की संपत्ति के आरोपों को पूरी तरह गलत बताया.

ऑटो की कमाई और किराये से बना मकान

टिन्नू यादव ने स्पष्ट किया कि विवादित मकान की जमीन उन्होंने साल 2008 में खरीदी थी और 2015-16 में इसका निर्माण कराया था. वह संगठन के काम के साथ साइड में ऑटो चलाते थे, जिससे हुई आमदनी और संगठन से मिलने वाले मानधन को जोड़कर उन्होंने घर बनाया. साल 2020 में निर्माण कार्य के लिए आई एलएंडटी जियो की टीम को उन्होंने अपना मकान किराये पर दिया था. उन्होंने कहा कि उनके खिलाफ लगाए जा रहे आरोप झूठे हैं और भगवान इसका निर्णय करेंगे.

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