…तो क्या बागी गुट ही असली TMC? ममता बनर्जी के साथ ‘खेला’ होने की पूरी कहानी

पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव में तृणमूल कांग्रेस (TMC) की हार के बाद पार्टी के भीतर शुरू हुई नाराजगी अब खुले विद्रोह में बदलती नजर आ रही है. लोकसभा में टीएमसी के 19 सांसदों द्वारा अलग गुट बनाने की मांग किए जाने के बाद पार्टी सुप्रीमो ममता बनर्जी के सामने सबसे बड़ा राजनीतिक संकट खड़ा हो गया है. इससे पहले करीब 60 विधायक बागी हो गए और विधानसभा स्पीकर ने ऋतब्रत बनर्जी को LoP घोषित कर दिया.
सूत्रों के मुताबिक, टीएमसी के बागी सांसद सोमवार को लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला से मुलाकात कर अपने अलग गुट की मांग को आगे बढ़ाएंगे. यदि बागियों को पर्याप्त संख्या का समर्थन मिलता है तो लोकसभा में टीएमसी की मान्यता और नेतृत्व को लेकर बड़ा फैसला सामने आ सकता है. आइए समझते हैं ममता बनर्जी के हाथ से चीजें निकलने और इस महा-बगावत की पूरी इनसाइड स्टोरी. 
टीएमसी में बगावत की आग एक दिन में नहीं भड़की. इसके पीछे राजनीतिक महत्वकाक्षाएं, पद और पावर की चाहत की लंबी कहानी है. आजतक के पास एक पत्र है. इसमें उन सांसदों के नाम हैं, जिन्होंने आधिकारिक तौर पर टीएमसी से अलग गुट बनाने की प्रक्रिया का आगाज किया था. इस चिट्ठी में कुल 19 सांसदों के हस्ताक्षर हैं और ये पत्र भी 18 मई को लिखा गया था. 

4 मई से शुरू हुई बगावत की कहानी

इसमें सबसे पहला नाम काकोली घोष का है, जो उस समय चीफ व्हिप थीं. इसके बाद शताब्दी रॉय, बापी हलदर, शर्मिला सरकार, जगदीश चंद्र बर्मा, निखिल कुमार महतो, अरूप चक्रबर्ती, कालीपड़ा सारेन, यूसुफ पठान, मिताली बाग, माला रॉय, अबु ताहीर खान को मिलाकर 18 नाम हैं. 19वां दस्तखत सबसे नीचे है, लेकिन वह नाम पढ़ने में नहीं आया. ये ममता बनर्जी के वो बागी हैं जो लोकसभा में टीएमसी से अलग होकर नया गुट बनाना जाहते हैं.
अब ये भी समझने की जरूरत है कि 4 मई को बंगाल में विधानसभा चुनाव के नतीजे आए थे, ठीक 14 दिन बाद 18 मई को टीएमसी सांसदों ने लोकसभा स्पीकर को पत्र लिख दिया कि वे एनडीए में जाना चाहते हैं. सांसदों की इस बगावत की आहट शायद ममता को लग गई थी, इसलिए 20 मई को ममता ने लोकसभा स्पीकर को सूचना दी कि अब कल्याण बनर्जी चीफ व्हिप होंगे. लेकिन अब कल्याण ने ममता और अभिषेक के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है.

क्या बागी गुट ही बन जाएगा असली TMC?

बता दें कि लोकसभा में टीएमसी के 28 सांसद हैं. 19 ने पहले ही मंसूबे साफ कर दिए हैं. इसमें सयानी घोष का नाम नहीं था. सयानी घोष ने बाद में पाला बदलने का प्लान बनाया. सबसे आखिरी में बगावत की कल्याण बनर्जी ने. अगर कल्याण बनर्जी और सयानी घोष को भी जोड़ दें बागियों की संख्या 21 हो जाती है, जो कि टीएमसी के कुल सांसदों की संख्या के दो तिहाई से भी ज्यादा है. ऐसे में लोकसभा स्पीकर बागियों को ही असली टीएमसी घोषित कर दें तो हैरानी नहीं होगी. ममता बनर्जी से पार्टी छीनने के लिए बागियों को सिर्फ 19 सांसदों का समर्थन चाहिए.
इस बीच बागी सांसद जगदीश बरमा का भी बयान आया है. टीएमसी के बागी जगदीश बर्मा का दावा है कि हमारे साथ और सांसद जुड सकते हैं. अभी हम 19 हैं, लेकिन कुछ और लोगों के आने संभावना है. टीएमसी में विद्रोह क्यों हुआ, इसको लेकर जब जदीश से पूछा गया गया तो उन्होंने कहा कि ममता और अभिषेक बनर्जी कार्यकर्ताओं की नहीं सुनते. वहीं कीर्ति आजाद ने कहा बीजेपी डरा धमकाकर सांसदों को तोड़ रही है. उन्होंने दावा किया कि जो डरे नहीं, उन्हें पैसे से खरीद लिया गया. 10 लाख से 5 करोड़ रुपये तक के ऑफर की बात कीर्ति आजाद कर रहे हैं.

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