दुनिया की बड़ी टेक कंपनियों में इस समय एक बड़ा बदलाव देखने को मिल रहा है. कंपनियां जहां एक तरफ आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस पर जमकर पैसा खर्च कर रही हैं, वहीं दूसरी तरफ कर्मचारियों की छंटनी भी तेजी से बढ़ रही है.
ताजा रिपोर्ट्स के मुताबिक, कई कंपनियां अब हर कर्मचारी पर हर महीने करीब 6.4 लाख रुपये तक AI पर खर्च कर रही हैं. इसमें AI टूल्स, क्लाउड सर्विस, डेटा प्रोसेसिंग और कंप्यूटिंग पावर का खर्च शामिल है. कंपनियों का फोकस अब इंसानों से हटकर मशीनों की तरफ जा रहा है.
AI बना छंटनी की बड़ी वजह
रिपोर्ट्स बताती हैं कि अमेरिका में AI अब लेऑफ की सबसे बड़ी वजह बनता जा रहा है. 2026 में AI से जुड़ी छंटनी का आंकड़ा पिछले दो साल के कुल लेऑफ से भी ज्यादा हो चुका है.
कई बड़ी कंपनियों ने अपने स्टाफ को कम किया है और उसी बजट को AI इंफ्रास्ट्रक्चर में लगा दिया है. इसका मतलब है कि कंपनियां अब कम लोगों के साथ ज्यादा काम करना चाहती हैं.
क्यों AI पर इतना खर्च?
कंपनियों के लिए AI अब एक लॉन्ग टर्म इन्वेस्टमेंट बन गया है. एक बार सिस्टम तैयार हो जाए तो वह लगातार काम करता है, थकता नहीं है और बड़ी टीम की जरूरत भी कम हो जाती है.
उदाहरण के तौर पर, पहले जहां एक कंपनी को कस्टमर सपोर्ट के लिए बड़ी टीम रखनी पड़ती थी, अब वही काम AI चैटबॉट कर रहा है. डेटा एनालिसिस में भी AI का इस्तेमाल तेजी से बढ़ रहा है. यही वजह है कि कंपनियां कर्मचारियों की सैलरी पर खर्च करने के बजाय AI सिस्टम पर पैसा लगा रही हैं.
नौकरियों पर क्या असर पड़ेगा?
इस बदलाव का सबसे बड़ा असर नौकरी करने वालों पर पड़ रहा है. खासकर एंट्री लेवल और मिड लेवल जॉब्स पर खतरा ज्यादा बढ़ गया है. एक्सपर्ट्स का मानना है कि आने वाले समय में सिर्फ वही लोग टिक पाएंगे जो AI के साथ काम करना जानते होंगे. यानी अब सिर्फ स्किल नहीं, बल्कि AI के साथ काम करने की समझ जरूरी होगी.
अगर आसान भाषा में समझें तो पहले जहां एक काम के लिए 10 लोग लगते थे, अब वही काम 2-3 लोग और AI मिलकर कर सकते हैं. यानी नौकरी खत्म नहीं हो रही, लेकिन उसका तरीका पूरी तरह बदल रहा है.
AI से परेशान हो रही हैं कंपनियां
दूसरा पहलू ये भी है कि जिन कंपनियों ने पहले से ही आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस पर पैसे लगाना शुरू कर दिया था अब वो पीछे हट रही हैं. ऐसा इसलिए, क्योंकि AI इंसानों से ज्यादा महंगा काम कर रहा है.
उबर और माइक्रोसॉफ्ट से लेकर कई कंपनियों ने ये माना है कि AI का बिल देना भारी पड़ रहा है. क्योंकि AI फ्री में काम नहीं करता और इसके लिए क्रेडिट्स मिलते हैं. कॉर्पोरेट लेवल पर करोड़ों क्रेडिट्स कई बार महीने भर में खत्म हो जाते हैं. कई कंपनियों के साल भर का AI बजट महीने भर में ही खत्म हो जा रहा है.
हालांकि जिन कंपनियों ने अभी एआई एडोप्ट करना शुरू किया है वो लोगों को तेजी से निकाल रही हैं. लेकिन एक्सपर्ट्स मानते हैं कि कुछ सालों में फिर से कंपनियां इंसानों को हायर करने लगेंगी, क्योंकि एआई महंगा होता चला जाएगा.
AI कंपनियों के लिए मौका भी है और चुनौती भी. एक तरफ इससे काम आसान और तेज हो रहा है, वहीं दूसरी तरफ यह नौकरी के तरीके को पूरी तरह बदल रहा है.
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