कंटेनर फंसे, माल सड़ा… ईरान जंग के चलते गडकरी की फैमिली को करोड़ों का नुकसान

मिडिल-ईस्ट में अमेरिका और ईरान के बीच जारी तनाव और युद्ध जैसे हालातों का असर अब भारतीय व्यापार पर भी दिखने लगा है. केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी के परिवार को इस संकट की वजह से व्यापार में बड़ा आर्थिक झटका लगा है. 
दरअसल ईरान और अमेरिका की जंग की वजह से नितिन गडकरी के परिवार के सैकड़ों कमर्शियल कंटेनर रास्ते में ही फंस गए. इसके चलते उन्हें करोड़ों रुपये का भारी नुकसान उठाना पड़ा है. इस बात का खुलासा खुद नितिन गडकरी ने किया है.
नागपुर में आयोजित एक कार्यक्रम के दौरान केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी ने अपने परिवार के बिजनेस और उसमें आ रही दिक्कतों के बारे में बताया. 

बहू का बिजनेस हुआ चौपट

गडकरी ने कहा, ‘मैं शुगर से डिटर्जेंट बनाता हूं. ये पूरा काम मेरी बहू देखती है. हमारे बनाए डिटर्जेंट के करीब 100 कंटेनर हर महीने अमेरिका जाते थे. लेकिन जैसे ही वहां युद्ध शुरू हुआ, कंटेनरों का जाना पूरी तरह बंद हो गया. इससे पूरा धंधा चौपट हो गया.’
उन्होंने आगे बताया कि इस संकट के बाद उन्होंने हार नहीं मानी. उन्होंने लोकल मार्केट में माल देना शुरू किया और काफी स्ट्रगल किया.

बेटे के 400 कंटेनर केले और 200 कंटेनर सेब खराब

डिटर्जेंट बिजनेस के साथ-साथ गडकरी के बेटे का भी इंटरनेशनल बिजनेस पर भी मिडिल-ईस्ट जंग का भारी असर पड़ा. नितिन गडकरी ने बताया कि उनके बेटे का ईरान के साथ बहुत बड़ा व्यापार है. इस व्यापार के तहत भारत से भारी मात्रा में केले ईरान एक्सपोर्ट किए जाते थे, जबकि वहां से सेब भारत आयात (इंपोर्ट) होते थे.
जैसे ही दोनों देशों के बीच युद्ध छिड़ा, पूरी सप्लाई चेन पूरी तरह ठप हो गई. इस रुकावट की वजह से रास्ते में फंसे 400 कंटेनर केले सड़ गए और ईरान से आ रहे 200 कंटेनर सेब भी पूरी तरह खराब हो गए. 
गडकरी ने इस दौरान बीमा कंपनियों पर भी अपनी नाराजगी जाहिर की. उन्होंने कहा कि इस भारी नुकसान के बावजूद इंश्योरेंस वाले पैसे देने में आनाकानी कर रहे हैं.

नितिन गडकरी ने बढ़ाया बिजनेसमैन्स का हौसला

पारिवारिक बिजनेस में करोड़ों का नुकसान झेलने के बाद भी नितिन गडकरी ने बिजनेसमैन्स का हौसला भी बढ़ाया. उन्होंने कहा कि चुनौतियां हर बिजनेस का एक जरूरी हिस्सा होती हैं. बिजनेस वर्ल्ड में इस तरह के उतार-चढ़ाव लगातार आते रहते हैं. इसलिए उन्हें घबराने के बजाय हमेशा सकारात्मक सोच और आत्मनिर्भरता के साथ आगे बढ़ते रहना चाहिए.

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