तेल रखने की जगह नहीं बची, क्या बंद करने पड़ेंगे कुएं? ट्रंप की चाल में बुरा फंसा ईरान

ईरान का तेल बाजार इस समय गंभीर संकट में फंसा हुआ है. तेहरान अपना तेल उत्पादन पूरी तरह रोक नहीं सकता, क्योंकि ऐसा करने से तेल कुओं को नुकसान पहुंच सकता है. दूसरी ओर, अमेरिकी प्रतिबंधों और होर्मुज स्ट्रेट में नाकेबंदी के कारण निर्यात बुरी तरह प्रभावित हुआ है, जिससे उसके पास कच्चा तेल जमा होता जा रहा है.
ईरान के कुल तेल उत्पादन का 90 प्रतिशत से अधिक हिस्सा खार्ग द्वीप से आता है. यहां करीब 3 करोड़ बैरल कच्चा तेल स्टोर करने की क्षमता है, लेकिन अमेरिकी नाकेबंदी के कारण यह भंडारण क्षमता अब लगभग भरने की स्थिति में पहुंच गई है.

स्थिति गंभीर होते देख ईरान अब अपने 30 साल पुराने तेल टैंकर ‘नाशा’ को फिर से सक्रिय कर रहा है, ताकि समुद्र में अतिरिक्त तेल स्टोर किया जा सके.
यह पुराना टैंकर कई सालों से खाली और निष्क्रिय पड़ा था, लेकिन अब इसे फ्लोटिंग स्टोरेज के रूप में इस्तेमाल किया जा रहा है, ताकि यहां अतिरिक्त कच्चा तेल रखा जा सके जिसे निर्यात नहीं किया जा सकता.
यह कदम केवल अस्थायी राहत है, लेकिन इससे साफ है कि अमेरिकी नौसैनिक नाकेबंदी ने ईरान के तेल ढांचे पर कितना दबाव बना दिया है.

12-13 दिनों में भर जाएगा ईरान का खार्ग ऑयल स्टोरेज

समुद्री विश्लेषकों ने गल्फ न्यूज को बताया कि खार्ग द्वीप पर अब सिर्फ 1.3 करोड़ बैरल अतिरिक्त तेल रखने की जगह बची है. हर दिन करीब 10 से 11 लाख बैरल तेल वहां जमा हो रहा है. इस रफ्तार से स्टोरेज केवल 12 से 13 दिनों में पूरी तरह भर सकता है.
मैरिटाइम ट्रैकर्स प्लेटफॉर्म टैंकरट्रैकर्स की 16 अप्रैल की सैटेलाइट तस्वीरों के अनुसार, ईरान के खार्ग द्वीप टर्मिनल पर तीन टैंकरों में कुल 50 लाख बैरल तेल लोड किया गया.
अगर स्टोरेज पूरी तरह भर गया तो ईरान के सामने बमुश्किल ही कोई विकल्प बचेगा. ईरान की स्टोरेज क्षमता खत्म होगी तो वो नए तेल का उत्पादन भी जारी नहीं रख सकता. तेल है लेकिन निर्यात नहीं हो पा रहा तो आय भी नहीं हो रही. ऐसे में यह नाकेबंदी सिर्फ सैन्य रणनीति नहीं, बल्कि ईरान की अर्थव्यवस्था को जकड़ने का हथियार बनती जा रही है.
अमेरिकी ट्रेजरी सचिव स्कॉट बेसेंट ने भी चेतावनी दी थी कि ईरान जल्द ही अपनी भंडारण सीमा तक पहुंच सकता है.

ईरान की भंडारण क्षमता का खत्म होना गंभीर साबित होगा

भंडारण क्षमता का खत्म होना इसलिए भी गंभीर है, क्योंकि ईरान को अपने तेल कुओं को बंद करना पड़ सकता है, खासकर वे कुएं जिनमें पानी इंजेक्शन तकनीक का इस्तेमाल होता है. ऐसे कुओं का संचालन लगातार जरूरी होता है, वरना उन्हें स्थायी नुकसान और उत्पादन में लंबे समय की गिरावट हो सकती है.
युद्ध के बावजूद ईरान ने खार्ग द्वीप को चालू रखा है. अमेरिका और इजरायल के हमलों के बाद भी वहां से टैंकरों में तेल लोड होता रहा है. ‘नाशा’ टैंकर की वापसी दिखाती है कि तेहरान तेल सप्लाई जारी रखने और जमीन पर मौजूद संवेदनशील ढांचे पर निर्भरता घटाने की कोशिश कर रहा है.
लेकिन ‘नाशा’ केवल कुछ समय की राहत दे सकता है. अगर अमेरिकी नाकेबंदी जारी रही और निर्यात धीमा रहा, तो ईरान को तेल उत्पादन में और कटौती करनी पड़ेगी या अपने तेल क्षेत्रों को लंबे समय के नुकसान का जोखिम उठाना होगा.
खार्ग द्वीप ईरान के लिए सबसे बड़ा तेल निर्यात केंद्र है. वहां किसी भी तरह की रुकावट का असर पूरे देश की अर्थव्यवस्था पर तेजी से पड़ सकता है. 

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