पश्चिम बंगाल के SIR (स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन) मामले में सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई हुई. इस दौरान मामले को लेकर कई अहम टिप्पणियां सामने आईं. सुनवाई में टीएमसी सांसद कल्याण बनर्जी ने अदालत को बताया कि अब तक 34 लाख मामलों में से केवल 139 अपीलों का ही निपटारा हुआ है, जबकि इससे कहीं अधिक प्रगति की उम्मीद थी.
इस पर CJI सूर्यकांत ने कहा कि इस तरह के मामलों के समाधान के लिए संबंधित पक्षों को कलकत्ता हाईकोर्ट का रुख करना चाहिए. उन्होंने स्पष्ट किया कि रोज़ाना सामने आने वाले ऐसे मुद्दों को हाईकोर्ट के मुख्य न्यायाधीश प्रशासनिक स्तर पर भी देख सकते हैं और जरूरत पड़ने पर न्यायिक हस्तक्षेप भी किया जा सकता है.
बंगाल वोटिंग प्रतिशत की सराहना की
वही, SIR की सुनवाई के दौरान सीजेआई ने पश्चिम बंगाल के चुनाव में पहले चरण के भारी मतदान प्रतिशत की सराहना भी की. सुनवाई के दौरान मुख्य न्यायाधीश सूर्य कांत ने कहा कि इस बार बिना किसी हिंसा के शांतिपूर्ण मतदान होना बेहद सकारात्मक संकेत है. मैं एक नागरिक के तौर पर खुश हुआ.
SIR पर क्या बोला सुप्रीम कोर्ट
SIR पर सुनवाई करते हुए सुप्रीम कोर्ट ने यह भी कहा कि जिन लोगों के नाम मतदाता सूची से हटाए गए हैं या जिन्होंने अपील दायर की है, उनके लिए पहले ही सामान्य दिशा-निर्देश जारी किए जा चुके हैं. अदालत ने साफ किया कि हर एक व्यक्तिगत मामले में हस्तक्षेप करना संभव नहीं है.
अगर किसी मामले में विशेष न्यायिक दखल की जरूरत हो, तो याचिकाकर्ता हाईकोर्ट जा सकते हैं. इसी दौरान चुनाव ड्यूटी पर तैनात 65 अधिकारियों की याचिका पर भी सुप्रीम कोर्ट ने राहत देने से इनकार कर दिया. इन अधिकारियों ने शिकायत की थी कि SIR प्रक्रिया के बाद जारी अंतिम मतदाता सूची से उनके नाम हटा दिए गए हैं. उन्होंने इस संबंध में सुप्रीम कोर्ट में रिट याचिका दायर की थी.
अदालत ने सुनवाई करते हुए कहा कि याचिकाकर्ताओं को पहले अपीलीय ट्रिब्यूनल या संबंधित प्राधिकरण के पास जाना चाहिए, जहां उनके मामलों की विस्तार से सुनवाई हो सकती है. सुप्रीम कोर्ट ने यह भी दोहराया कि उसने पहले ही अपील करने वालों के लिए सामान्य निर्देश जारी किए हैं, इसलिए हर मामले में सीधे दखल देना उचित नहीं होगा. सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने पश्चिम बंगाल में शांतिपूर्ण मतदान को लेकर संतोष भी जताया. मुख्य न्यायाधीश ने कहा कि एक नागरिक के तौर पर उन्हें यह देखकर खुशी हुई कि मतदान प्रतिशत अच्छा रहा और चुनाव के दौरान हिंसा नहीं हुई.
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