पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव इस उस मोड़ पर खड़ा है, जहां पर टीएमसी और बीजेपी आमने-सामने हैं. बीजेपी महिला आरक्षण के बहाने महिला वोटों को साधने में जुटी है तो ममता बनर्जी ने अपनी महिला ब्रिगेड को फ्रंटफुट पर उतारकर बंगाल के राजनीतिक पारा सातवें आसमान पर पहुंचा दिया है. टीएमसी की महिला नेताओं ने आक्रामक प्रचार करके चुनावी मुकाबले को रोचक बना दिया है.
बंगाल देश के उन चुनिंदा राज्यों में से है, जहां महिला मतदाता पुरुषों के साथ कदम से कदम मिलाकर ही नहीं चल रही हैं बल्कि राज्य की सियासी दशा और दिशा भी तय कर रही हैं. 2021 के विधानसभा चुनावों में महिलाओं का मतदान लगभग 82.35 फीसदी रहा था. राज्य में 3 करोड़ से अधिक महिला वोटर्स हैं. 2024 के लोकसभा चुनावों में भी बंगाल ने देश में सबसे ज्यादा 11 महिला सांसद चुनकर भेजा, जो दिखाता है कि यहां की महिलाएं राजनीतिक रूप से बेहद जागरूक हैं.
पश्चिम बंगाल की सत्ता की चाबी कही जाने वाली महिला वोटर्स को साधने के लिए बीजेपी और टीएमसी के बीच ‘क्रेडिट वॉर’ छिड़ा हुआ है. यही वजह है कि ममता बनर्जी ने अपनी पूरी महिला ब्रिगेड को बंगाल के सियासी रणभूमि में उतार दिया है. अब देखना है कि बंगाल में एक फैक्टर को कौन साधने में कामयाब रहता है?
बीजेपी महिला वोटों को साधने में जुटी
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने बंगाल में महिला सुरक्षा और सशक्तिकरण को सबसे बड़ा चुनावी हथियार बनाया. बंगाल के बिष्णुपुर, झाड़ग्राम और पुरुलिया की रैलियों में पीएम मोदी ने ‘संदेशखाली’ से लेकर ‘महिला आरक्षण’ तक के मुद्दों पर ममता बनर्जी सरकार को आड़े हाथों लिया. पीएम ने आरोप लगाया कि टीएमसी और कांग्रेस ने मिलकर संसद में 33 फीसदी महिला आरक्षण लागू करने के प्रयासों में बाधा डालने का काम किया. उन्होंने कहा कि टीएमसी नहीं चाहती कि बंगाल की बेटियां सांसद और विधायक बनें, क्योंकि वे टीएमसी के ‘जंगलराज’ को चुनौती दे रही हैं.
पीएम मोदी ने एक बार फिर संदेशखाली की घटना का जिक्र करते हुए कहा कि एक तरफ बंगाल की बेटियों की चीखें हैं और दूसरी तरफ ‘मोदी की गारंटी’है, जो बंगाल में उन्हें सुरक्षा और सम्मान दिलाएगी. प्रधानमंत्री ने बंगाल की महिलाओं को रिझाने के लिए बीजेपी की ओर से ‘सुरक्षा’ और ‘समृद्धि’ का रोडमैप पेश किया. उन्होंने कहा कि राज्य में ‘डबल इंजन’ सरकार आते ही महिलाओं को दोगुना लाभ मिलेग. इसके अलावा ममता बनर्जी को महिला विरोधी कठघरे में खड़ा किया.
ममता बनर्जी ने उतारा महिला ब्रिगेड
ममता बनर्जी ने महिला वोटों को साधे रखने और बीजेपी को काउंटर करने के लिए अपनी महिला ब्रिगेड को उतार रखा है. इस फेहरिश्त में ममता बनर्जी ने चंद्रिमा भट्टाचार्य,शताब्दी रॉय, सायोनी घोष, जून मालिया, प्रतिमा मोंडल, अदिति मुंशी, सायंतिका बनर्जी और रचना बनर्जी जैसी नेताओं को लगाया है. ममता की इन आधा दर्जन महिला नेताओं ने विरोधियों के पसीने छुड़ा रखे हैं.
टीएमसी प्रमुख ममता बनर्जी ने इस चुनाव में एक बहुत ही सधी हुई रणनीति अपनाई है. उन्होंने केवल राजनीतिज्ञों को ही नहीं, बल्कि सिनेमाई ग्लैमर्स और युवा चेहरों को भी चुनावी अखाड़े में उतार दिया है. सायोनी घोष, जो अब टीएमसी के युवा संगठन का चेहरा हैं, अपनी रैलियों में जिस तरह से ‘मां, माटी, मानुष’ का नारा बुलंद कर रही हैं, उसने युवाओं और महिलाओं के बीच एक अलग सियासी माहौल बना रही हैं. इतना ही नहीं बीजेपी को जिस तरह से निशाने पर ले रही है, उसके वीडियो सोशल मीडिया में भी वायरल हो रहे हैं.
वहीं, दूसरी तरफ रचना बनर्जी,शताब्दी रॉय और जून मालिया जैसी अभिनेत्रियां ग्रामीण बंगाल के इलाकों में जाकर सीधे महिलाओं के दिलों को छू रही हैं. इस तरह दीदी ने यह संदेश साफ कर दिया है कि बंगाल की बेटी ही बंगाल को बीजेपी से बचाए रखने की अगुवाई कर रही है.
‘लक्ष्मीर भंडार’ बना टीएमसी का ब्रह्मास्त्र
पश्चिम बंगाल के चुनावी माहौल में टीएमसी के लिए सबसे बड़ा टर्निंग पॉइंट ‘लक्ष्मीर भंडार’ योजना साबित हो सकती है. ममता बनर्जी की महिला ब्रिगेड ने घर-घर जाकर महिलाओं को यह याद दिलाया है कि दीदी ने उनकी रसोई का ख्याल रखा है. चंद्रिमा भट्टाचार्य और डॉ. शशि पांजा जैसी वरिष्ठ नेता अपनी सभाओं में डेटा के साथ भाजपा पर हमला बोल रही हैं. उनका तर्क साफ है कि केंद्र से पैसा नहीं मिला, फिर भी दीदी ने माताओं-बहनों की जेब खाली नहीं होने दी.
ममता बनर्जी का बंगाल में यह आर्थिक सुरक्षा ही है जिसने महिला मतदाताओं को टीएमसी का सबसे मजबूत ‘वोट बैंक’ बना दिया है. भाजपा के ‘महिला सुरक्षा’ के दावों के खिलाफ टीएमसी की महिला ब्रिगेड ‘सम्मान और अधिकार’ को ढाल बनाकर चुनावी पिच पर डटी हुई है. सायोनी घोष और अदिति मुंशी जैसे चेहरे न केवल जमीन पर, बल्कि डिजिटल दुनिया में भी माहौल गर्मा रहे हैं, रैलियों में जब अदिति मुंशी की आवाज गूंजती है तो सायोनी का तीखा भाषण भी सोशल मीडिया पर वायरल होता है,तो वह विरोधियों के नैरेटिव को पलटने का काम करता है.
बंगाल में कौन किस पर पड़ रहा भारी
पश्चिम बंगाल के विधानसभा चुनाव में सबसे ज्यादा महिला प्रत्याशी टीएमसी ने ही उतार रखे हैं. राज्य की 294 विधानसभा सीटों में से टीएमसी की 52 प्रत्याशी हैं तो बीजेपी से सिर्फ 33 महिला कैंडिडेट ही चुनाव लड़ रही हैं. इसके बाद दूसरे नंबर पर कांग्रेस 35 उम्मीदवार और तीसरे पर 34 महिला प्रत्याशियों के साथ लेफ्ट है. इस तरह से ममता बनर्जी ने सबसे ज्यादा महिला प्रत्याशी को उतारकर बीजेपी और अन्य दूसरी पार्टी पर भारी है.
राजनीतिक विशेषज्ञों का मानना है कि भाजपा ने भले ही दिल्ली से अपनी पूरी ताकत झोंक दी हो, लेकिन टीएमसी की इस महिला ब्रिगेड ने ‘घर-घर संपर्क’ के जरिए जो पकड़ बनाई है, उसे तोड़ना मुश्किल है. महिलाएं चुनाव में खामोश रहती हैं, लेकिन जब वे कतार में खड़ी होती हैं, तो वे अपनी ‘दीदी’ के लिए एकजुट दिखती हैं. ऐसे में जैसे-जैसे मतदान की तारीखें नजदीक आ रही हैं, दीदी की महिला ब्रिगेड का प्रचार और भी आक्रामक होता जा रहा है क्या भाजपा का ‘डबल इंजन’ इस ‘महिला एक्सप्रेस’ को रोक पाएगा?
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