अमेरिका और ईरान के बीच युद्ध को रोकने के लिए की जा रही कूटनीतिक कोशिशों को बड़ा झटका लगा है. तेहरान ने सीजफायर के लिए इस्लामाबाद में अमेरिकी अधिकारियों से मिलने से साफ इनकार कर दिया है. ईरान का मानना है कि वॉशिंगटन की मांगें मंजूर करने के लायक नहीं हैं.
‘वॉल स्ट्रीट जर्नल’ के मुताबिक, पाकिस्तान सहित क्षेत्रीय देशों की तरफ से की जा रही मध्यस्थता की कोशिशें फिलहाल ‘डेड एंड’ पर पहुंच गई हैं. रिपोर्ट में कहा गया है कि पाकिस्तान, इस बातचीत को सुविधाजनक बनाने में अहम भूमिका निभा रहा था, लेकिन इन सारी कोशिशों पर अब पानी फिरता दिख रहा है.
पाकिस्तान के विदेश मंत्री इशाक डार ने कहा था कि उनका देश सार्थक बातचीत की मेजबानी करने के लिए तैयार है. अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने भी हाल ही में दावा किया था कि वॉशिंगटन और ईरान के बीच बातचीत चल रही है. उन्होंने कहा था, ‘हम उस बातचीत में बहुत अच्छा कर रहे हैं.’
ईरान ने क्या कहा?
वहीं, ईरान ने सीजफायर के लिए बातचीत के दावों को पूरी तरह खारिज कर दिया है. मुंबई स्थित ईरानी महावाणिज्य दूतावास के माध्यम से जारी एक बयान में विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता इस्माइल बघाई ने बताया कि अमेरिका के साथ कोई सीधी बातचीत नहीं हो रही है.
बघाई ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ पर कहा, ‘पाकिस्तान के मंच उनके अपने हैं; हमने उनमें हिस्सा नहीं लिया. हालांकि युद्ध खत्म करने के क्षेत्रीय कदम का स्वागत है, लेकिन ये याद रखना चाहिए कि इसे शुरू किसने किया था.’
15 सूत्रीय प्रस्ताव पर विवाद
ईरानी प्रवक्ता ने ये भी खुलासा किया कि उन्हें ट्रंप से एक 15 सूत्रीय प्रस्ताव मिला है. हालांकि, तेहरान ने इसे हद से ज्यादा और ‘बेकार’ की मांग बताया है.
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