अमेरिका से LPG सिलेंडर से लदा जहाज, रूस से पेट्रोल-डीजल… आज आई डबल गुड न्यूज

मिडिल ईस्ट में जारी भीषण युद्ध के मद्देनजर भारत ने स्ट्रेट ऑफ होर्मुज पर अपनी निर्भरता को कम करने के लिए कई कदम उठा हैं, जिसके नतीजे अब जमीनी स्तर पर दिखने लगे हैं. इसी बीच रूस से कच्चे तेल से लदा ‘एक्वा टाइटन’ और अमेरिका से एलपीजी लेकर निकला जहाज ‘पिक्सिस पायोनियर’ रविवार सुबह कर्नाटक के मंगलुरु बंदरगाह पहुंच गया. इससे घरेलू बाजार में पेट्रोल, डीजल और गैस की कीमतों को स्थिर रखने में मदद मिलेगी.प्राप्त जानकारी के अनुसार, ये जहाज मूल रूप से चीन जा रहा था, लेकिन बीते दिनों अमेरिका ने समुद्र में फंसे रूसी तेल को बिक्री के लिए अस्थायी लाइसेंस जारी किया था. इसके बाद इस जहाज को दक्षिण चीन सागर में कोर्स बदलकर भारत की ओर मोड़ दिया गया था. इसी क्रम में रूसी क्रूड ऑयल से लदा जहाज एक्वा टाइटन शनिवार-रविवार की दरमियानी रात को कर्नाटक के मंगलुरु पोर्ट पहुंच गया है, जहां वह समुद्र में लंगर डाले खड़ा है. यहां से पाइपलाइनों के जरिए कच्चा तेल रिफाइनरी तक पहुंचाया जाएगा.

रूस से आया क्रूड ऑयल

अधिकारियों के अनुसार, जहाज से कच्चे तेल को सीधे रिफाइनरी तक पहुंचाने के लिए समुद्र के अंदर बिछी पाइपलाइनों का इस्तेमाल किया जाएगा. इससे न केवल समय की बचत होगी, बल्कि परिवहन के दौरान होने वाले जोखिम को भी कम किया जा सकेगा. भारत सरकार की इस सक्रियता और अंतरराष्ट्रीय तालमेल की वजह से घरेलू बाजार में पेट्रोल-डीजल की किल्लत की आशंका काफी हद तक कम हो गई है. पश्चिम एशिया में बढ़ते संघर्ष के बीच वैश्विक ईंधन कीमतों को स्थिर करने के लिए अमेरिका ने रूसी कच्चे तेल को लेकर नरमी दिखाई, जिसका सीधा फायदा भारत को मिला है.

अमेरिका से आई LPG

मंगलुरु पहुंचे ‘एक्वा टाइटन’ के अलावा अमेरिका के टेक्सास से LPG लेकर जहाज ‘पिक्सिस पायोनियर’ रविवार सुबह भारत पहुंच गया है. जहाज में मंगलुरु पोर्ट पर सफलतापूर्वक डॉक हो गया. रूस-अमेरिका से आई ये दोनों खेप ऐसे वक्त में आई हैं, जब अंतरराष्ट्रीय बाजार में सप्लाई चेन को लेकर काफी अनिश्चितता बनी हुई है. भारत के लिए रूस और अमेरिका दोनों से एक साथ ऊर्जा आपूर्ति मिलना एक बड़ी रणनीतिक जीत मानी जा रही है.

स्ट्रेट ऑफ होर्मुज के रास्ते भी आई गैस

वहीं, इससे पहले मिडिल ईस्ट के तनावपूर्ण माहौल और स्ट्रेट ऑफ होर्मुज के रास्ते  दो भारतीय-फ्लैग LPG टैंकर भारत पहुंचे थे. 16 मार्च को एलपीजी लेकर ‘शिवालिक’ (Shivalik) गुजरात के मुंद्रा पोर्ट पर पहुंचा. इसके बाद 17 मार्च को नंदा देवी जहाज एलपीजी लेकर गुजरात के वाडिनार पोर्ट पहुंचा था. ये दोनों जहाज ईरान, अमेरिका और इजरायल के बीच जारी समुद्री सैन्य गतिविधियों और बाधाओं को पार कर भारत के पश्चिमी तट तक पहुंचे थे. इन जहाजों के जरिए आई एलपीजी देश के घरेलू गैस वितरण आपूर्ति नेटवर्क के लिए बेहद महत्वपूर्ण है.

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