हिंद महासागर में बढ़ते सैन्य तनाव के बीच अमेरिका द्वारा ईरानी युद्धपोत को डुबोए जाने की घटना ने भारत की सुरक्षा और क्षेत्रीय स्थिरता को लेकर नई चिंता खड़ी कर दी है. यह हमला श्रीलंका के दक्षिणी तट के पास अंतरराष्ट्रीय जल क्षेत्र में हुआ, जो श्रीलंका के खोज और बचाव क्षेत्र के दायरे में आता है.
श्रीलंका की नौसेना ने पुष्टि की कि उसने डूबते जहाज से 32 ईरानी नाविकों को बचाया, जबकि बड़ी संख्या में चालक दल अब भी लापता है. इस पूरे घटनाक्रम पर प्रतिक्रिया देते हुए श्रीलंका के सांसद नमल राजपक्षे ने कहा, “यह श्रीलंका के लिए गंभीर चिंता का विषय है और हिंद महासागर के लिए भी, और मुझे यकीन है कि भारत के लिए भी चिंता की बात है.”
नमल राजपक्षे ने कहा, “युद्ध मीलों दूर हो रहा है, लेकिन हम हिंद महासागर में ऐसी हलचल देख रहे हैं जो श्रीलंका के तट से केवल चालीस समुद्री मील दूर है.”
ईरानी युद्धपोत पर हमले से भारत के लिए क्या चिंता?
भारत के लिए यह घटना इसलिए भी अहम है क्योंकि हिंद महासागर उसकी समुद्री सुरक्षा, व्यापारिक मार्गों और ऊर्जा आपूर्ति का प्रमुख रास्ता है. भारत अपनी तेल जरूरतों का बड़ा हिस्सा समुद्री मार्ग से आयात करता है. ऐसे में इस क्षेत्र में किसी भी सैन्य टकराव से समुद्री यातायात और ऊर्जा आपूर्ति प्रभावित हो सकती है.
एक इंटरव्यू में नमल राजपक्षे ने श्रीलंकाई सरकार से यह स्पष्ट करने की मांग की कि क्या उसे इस अमेरिकी कार्रवाई की पहले से जानकारी थी. उन्होंने कहा, “श्रीलंका की सरकार को अपने नागरिकों और दुनिया को बताना चाहिए कि क्या उन्हें इस हमले की जानकारी थी या उन्हें पूरी तरह अंधेरे में रखा गया.”
श्रीलंका सांसद ने सरकार पर उठाए सवाल
श्रीलंकाई सांसद ने आगे कहा, “अगर सरकार को पहले से जानकारी थी तो यह बताना जरूरी है कि इसे जनता और संसद से छिपाया क्यों गया. और अगर जानकारी नहीं थी, तो यह और भी गंभीर सवाल है कि हमारे जल क्षेत्र के पास इतनी बड़ी सैन्य कार्रवाई हमारी जानकारी के बिना कैसे हो गई.”
नमल राजपक्षे ने यह भी कहा, “मेरा मानना है कि भारत की सरकार और दक्षिण एशिया के देशों को इस मुद्दे को गंभीरता से लेना चाहिए और क्षेत्रीय स्तर पर मिलकर इस पर विचार करना चाहिए.”
अमेरिका ने ईरानी युद्धपोत पर पनडुब्बी से किया हमला
अमेरिका के रक्षा मंत्री पीट हेगसेथ ने पुष्टि की कि अमेरिकी पनडुब्बी ने ईरानी युद्धपोत को टॉरपीडो से निशाना बनाया. वहीं वरिष्ठ अमेरिकी सैन्य अधिकारी जनरल डैन केन ने कहा कि यह कार्रवाई ऐतिहासिक थी.
श्रीलंका के विदेश मंत्री विजिता हेराथ ने बताया कि जहाज ने सुबह आपात संदेश भेजा था और कुछ ही समय में बचाव दल मौके पर पहुंच गया, लेकिन तब तक पोत पूरी तरह डूब चुका था.
भारत के नजरिए से यह घटना केवल एक सैन्य कार्रवाई नहीं, बल्कि हिंद महासागर में शक्ति संतुलन और समुद्री सुरक्षा के बदलते समीकरण का संकेत है. अगर इस तरह की कार्रवाइयां बढ़ती हैं, तो भारत को अपनी समुद्री निगरानी, कूटनीतिक रणनीति और ऊर्जा सुरक्षा पर नए सिरे से विचार करना पड़ सकता है.
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