जासूसों को होने वाली बीमारी’ को झूठा साबित कर रहे थे, साइंटिस्ट का ही ‘ब्रेन डैमेज’ हो गया

दुनिया में तमाम तरह की बीमारियों का वजूद है. ज्यादातर तो सब जानते हैं लेकिन कुछ ऐसे हैं जिनके बारे में सुनकर भरोसा ही नहीं होता कि ऐसा भी होता है. ऐसी ही एक बीमारी का नाम है हवाना सिंड्रोम. यूं तो बीमारियां इंसानों-इंसानों में भेद नहीं करती लेकिन इस बीमारी के बारे में कहा जाता है कि इसकी शिकायत अब तक तमाम देशों के जासूस, राजनयिक, दूतावास में काम करने वाले कर्मचारियों ने ही की है. पूरी दुनिया के वैज्ञानिकों की नजर इस बीमारी पर है. 

नॉर्वे के एक वैज्ञानिक ने तो यह ठान लिया था कि वह साबित कर देंगे कि ‘हवाना सिंड्रोम’ नाम की बीमारी का कोई अस्तित्व ही नहीं है. उनका मानना था कि ये सब वहम है लेकिन इस बीमारी को झूठा साबित करने की कोशिश में उनका ‘ब्रेन डैमेज’ हो गया. उनमें भी तकरीबन वही लक्षण दिखने लगे, जो हवाना सिंड्रोम के मरीजों में देखे गए थे. 

क्या है हवाना सिंड्रोम?

हवाना सिंड्रोम एक रहस्यमय न्यूरोलॉजिकल बीमारी है. पहली बार साल 2016-17 में क्यूबा की राजधानी हवाना में तैनात अमेरिकी और कनाडाई राजनयिकों में इस बीमारी के लक्षण मिले थे. इसमे इंसान को अचानक बहुत तेज सिरदर्द होने लगता है. भयानक चक्कर आता है और दिमाग सुन्न पड़ने लगता है. क्यूबा से शुरू हुई ये बीमारी आज दुनिया के 15 से ज्यादा देशों में फैल चुकी है. इसमें रूस,चीन, यूके और भारत भी शामिल है.

वाशिंगटन पोस्ट की रिपोर्ट के मुताबिक, अमेरिकी सरकार ने एक सीक्रेट ‘अंडरकवर ऑपरेशन’ के तहत एक खास डिवाइस खरीदी थी और पिछले एक साल से उसकी टेस्टिंग की जा रही है. अमेरिका को शक है कि यही वो मशीन है जिसकी वजह से उसके जासूसों को ये रहस्यमयी बीमारी हो रही है. यह मशीन बाइडन सरकार के आखिरी दिनों में कई करोड़ रुपये देकर खरीदी गई थी.

क्या मशीन के पीछे रूस का हाथ है?

CNN की एक रिपोर्ट में दावा किया गया कि अमेरिकी सरकार द्वारा खरीदी गई ये मशीन ‘पल्स्ड रेडियो वेव’ (तरंग) छोड़ती है. एक्सपर्ट्स का मानना है कि हवाना सिंड्रोम के पीछे इन रेडियो वेव का हाथ हो सकता है. इस संदिग्ध मशीन में रूसी पुर्जे होने की बात भी सामने आई है. लेकिन यह पूरी तरह से रूस में बनी मशीन नहीं है. हालांकि अभी तक यह साफ नहीं है कि अमेरिकी सरकार को इस डिवाइस की जानकारी कैसे मिली और उन्होंने इसे कैसे खरीदा.

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