बॉम्बे हाईकोर्ट ने पूछी भारत लौटने की तारीख, भगोड़े विजय माल्या ने ये जवाब दिया

भारत में धोखाधड़ी और मनीलॉन्ड्रिंग से जुड़े मुकदमों का सामना कर रहे ‘भगोड़ा कारोबारी’ विजय माल्या ने 18 फरवरी को बॉम्बे हाईकोर्ट को बताया कि वह भारत लौटने की कोई समयसीमा नहीं बता सकता. माल्या ने कोर्ट को बताया कि उसके ब्रिटेन छोड़ने पर वहां की कोर्ट ने कानूनी रोक लगा रखी है और उसके पास भारतीय पासपोर्ट भी नहीं है. बॉम्बे हाईकोर्ट में विजय माल्या ने ‘फ्यूजिटिव इकोनॉमिक ऑफेंडर्स एक्ट, 2018’ (FEO Act) की वैधता को चुनौती दी है. 

माल्या के याचिका पर सुनवाई करते हुए कोर्ट ने उससे देश लौटने की तारीख पूछी जिस पर उसका ये जवाब आया. चीफ जस्टिस चंद्रशेखर और जस्टिस गौतम अंखड़ की बेंच ने कहा कि माल्या चाहते हैं कि कोर्ट उनकी याचिका पर विचार करे तो उन्हें भारत लौट आना चाहिए. बार एंड बेंच की रिपोर्ट के मुताबिक, इसके जवाब में माल्या की तरफ से बताया गया कि वह भारत वापसी की कोई निश्चित तारीख नहीं बता सकते क्योंकि उनके पास भारतीय पासपोर्ट नहीं है. भारत सरकार ने 2016 में उसे रद्द कर दिया था. इसके अलावा ब्रिटेन की एक अदालत ने भी उनको देश छोड़ने पर रोक लगाई है. विजय माल्या के वकील अमित देसाई ने कोर्ट को बताया, 
विजय माल्या को इंग्लैंड और वेल्स छोड़ने या किसी इंटरनेशनल ट्रैवल डॉक्यूमेंट के लिए आवेदन करने या अपने पास रखने की अनुमति नहीं है. इसलिए याचिकाकर्ता यह बता पाने में असमर्थ है कि वह भारत कब लौटेगा.

अमित देसाई ने इस बात पर भी जोर दिया कि FEO Act की वैधता को चुनौती देने वाली याचिका पर सुनवाई के लिए माल्या का कोर्ट में उपस्थित होना जरूरी नहीं है. विजय माल्या ने निचली अदालत द्वारा उसे भगोड़ा घोषित करने के आदेश को चुनौती देने वाली अपील भी दायर की है. देसाई ने माल्या का बयान पढ़ते हुए कोर्ट को सुनाया, 
अगर मैं (विजय माल्या) भारत में पेश होता हूं तो ये सभी कार्यवाही निरर्थक हो जाएगी क्योंकि कानून कहता है कि एक बार अपराधी संबंधित कोर्ट में पेश हो जाता है तो ये सभी आदेश रद्द हो जाएंगे.

बॉम्बे हाईकोर्ट की बेंच ने केंद्र सरकार को इस बयान पर एक सप्ताह के भीतर अपना जवाब कोर्ट में दाखिल करने को कहा है. अब इस मामले में सुनवाई की अगली तारीख मार्च 2026 के दूसरे सप्ताह में तय की गई है. 

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