मंगलवार को बांग्लादेश में एक तरफ बांग्लादेश नेशनलिस्ट पार्टी (BNP) देश का कार्यभार संभाल रही है तो दूसरी तरफ चुनाव में दूसरी सबसे बड़ी पार्टी बनकर उभरी जमात-ए-इस्लामी पहले दिन से ही आक्रामक मोड में आ गई. दरअसल, बीएनपी के सदस्यों ने सांसद के रूप में तो शपथ ले ली लेकिन उन्होंने जुलाई चार्टर से जुड़े संविधान सुधार परिषद के सदस्य के रूप में शपथ लेने से इनकार कर दिया. इस बात से नाराज जमात-ए-इस्लामी और उसकी गठबंधन सहयोगी नेशनल सिटिजन पार्टी (NCP) ने बीएनपी कैबिनेट के शपथ ग्रहण समारोह का बहिष्कार किया है.
जमात नेता शफीकुल इस्लाम मसूद ने इससे पहले बताया था कि पार्टी ने ये फैसला संसदीय समिति की बैठक में लिया. उन्होंने कहा, ‘पार्टी ने कैबिनेट के शपथ ग्रहण समारोह में हिस्सा न लेने का फैसला किया. बीएनपी ने संविधान सुधार परिषद के सदस्य के रूप में शपथ लेने से इनकार किया है जिसके विरोध में जमात इस कार्यक्रम का बहिष्कार कर रही है.’
12 फरवरी को हुए बांग्लादेश के चुनाव में तारिक रहमान की पार्टी 212 सीटें जीतकर सत्ता में आई है. जमात और एनसीपी समेत 11 गठबंधन सहयोगियों ने मिलकर 77 सीटों पर जीत दर्ज की. 12 फरवरी को चुनाव के साथ-साथ जुलाई-चार्टर पर भी जनमत संग्रह कराया गया जिसे 62% लोगों ने अपना समर्थन दिया.
मंगलवार को बांग्लादेश में जीते हुए उम्मीदवारों का शपथ ग्रहण आयोजित किया गया. जमात और एनसीपी चाहते थे कि जुलाई चार्टर के संबंध में भी एक शपथ ग्रहण हो.
बांग्लादेश के निर्वाचित सांसदों को दो शपथ की जरूरत क्यों?
जुलाई चार्टर का मकसद बांग्लादेश की संसद को 180 दिनों के लिए संविधान सभा में बदलना है, जिससे नई संसद को बांग्लादेश के संविधान, लोकतांत्रिक संस्थाओं और प्रक्रियाओं में बदलाव करने का अधिकार मिल सके. BNP ने अनिच्छा के साथ जुलाई चार्टर पर हस्ताक्षर किए थे, लेकिन उसके नेताओं का कहना है कि चार्टर के कई प्रावधानों पर पार्टी को आपत्ति है. BNP ने यह भी कहा कि चार्टर तैयार करते समय उससे राय नहीं ली गई.
जमात और NCP चुनाव से पहले सुधारों की मांग कर रहे थे, जबकि BNP पहले चुनाव कराने के पक्ष में थी. अंत में, अंतरिम सरकार के प्रमुख मोहम्मद यूनुस ने 12 फरवरी को ही चुनाव और जनमत-संग्रह दोनों आयोजित करा दिए.
BNP ने मंगलवार को घोषणा की कि उसके निर्वाचित सांसद संविधान सुधार परिषद के सदस्य के रूप में शपथ नहीं लेंगे और ऐसा हुआ भी. वहीं, जमात, एनसीपी गठबंधन के निर्वाचित सांसदों ने संसद सदस्य के साथ-साथ संविधान सुधार आयोग के लिए दूसरी शपथ भी ली.
जुलाई चार्टर और इससे जुड़ा विवाद क्या है?
दोहरी शपथ की प्रक्रिया इस मकसद से बनाई गई थी कि संसदीय चुनाव और व्यापक संवैधानिक संशोधन के लिए हुए जनमत-संग्रह, दोनों के नतीजों को संविधान में ‘जुलाई चार्टर’ को शामिल करके लागू किया जा सके. जुलाई चार्टर एक डॉक्यूमेंट है, जिसे अंतरिम सरकार ने 17 अक्टूबर 2025 को राजनीतिक दलों से परामर्श के बाद अपनाया था.
यह चार्टर 5 अगस्त 2024 को शेख हसीना की सरकार के सत्ता से हटने के बाद बांग्लादेश में शासन व्यवस्था में बदलाव के लिए मिली सिफारिशों पर आधारित है.
BNP ने कहा है कि हालांकि उसने 17 अक्टूबर 2025 को जुलाई चार्टर पर हस्ताक्षर किए थे, लेकिन अब जो अंतिम डॉक्यूमेंट सामने है, उसमें बहुत सी नई बातें जोड़ दी गई हैं जिनपर पार्टी को आपत्ति है.
जमात गुट की बीएनपी को धमकी
शेख हसीना सरकार के खिलाफ जिस तरह के आंदोलन देखे गए थे, वैसे ही आंदोलन जुलाई चार्टर को लेकर बांग्लादेश में फिर लौट सकते हैं. तारिक रहमान ने आज शपथ ली और आज ही के दिन जमात और एनसीपी ने BNP को ‘फासीवादी’ ताकत बताते हुए सड़क पर विरोध प्रदर्शन की वॉर्निंग दी है.
जमात-ए-इस्लामी गुट ने चुनाव में कथित हेरफेर और नोआखाली में NCP समर्थक महिला से कथित सामूहिक दुष्कर्म के खिलाफ विरोध प्रदर्शनों की चेतावनी भी दी.
जमात महासचिव मिया गोलाम परवार ने कहा, ‘बांग्लादेश के लिए लोगों के सपने चुनावी हेरफेर, अनियमितताओं और चुनाव बाद हिंसा से चकनाचूर हो गए हैं. खराब चुनाव के जरिए जीत हासिल करना और फिर हमले व दुष्कर्म जैसी घटनाएं हमें फिर से फासीवाद की याद दिलाती हैं.’
‘फासीवाद’ शब्द पहले आवामी लीग और शेख हसीना के खिलाफ 2024 के आंदोलनों में इस्तेमाल हुआ था, और अब यही शब्द तारिक रहमान के नेतृत्व वाली BNP के लिए भी प्रयोग किया जा रहा है.
NCP के मुख्य आयोजक नासिरुद्दीन पटवारी ने कहा, ‘महिलाओं के खिलाफ दमन के विरोध में सड़क आंदोलन जारी रहना चाहिए. हम इंजीनियर तारिक रहमान को जवाबदेह ठहराएंगे. हम अल्लाह के सिवा किसी से नहीं डरते और लोगों से उम्मीद न खोने की अपील करते हैं.’
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