तारिक रहमान के शपथ ग्रहण से ठीक पहले BNP ने शेख हसीना पर दिया बड़ा बयान

बांग्लादेश में तारिक रहमान की पार्टी बांग्लादेश नेशनलिस्ट पार्टी (BNP) सरकार बनाने के लिए तैयार है. पिछले साल के अंत में खालिदा जिया के निधन के बाद अब पार्टी की कमान उनके बेटे तारिक रहमान के हाथ में है और मंगलवार को वह प्रधानमंत्री पद की शपथ लेने वाले हैं. उनके शपथ ग्रहण समारोह की चर्चा भारत में भी खूब हो रही है क्योंकि अगस्त 2024 में शेख हसीना की सरकार गिरने के बाद से भारत-बांग्लादेश के रिश्तों में तनाव आया है.

भारत ने शेख हसीना को शरण दी है जिसे लेकर बांग्लादेश की अंतरिम सरकार के साथ रिश्तों में और ज्यादा तल्खी देखी गई. लेकिन अब बांग्लादेश में नई सरकार आ रही है और ऐसे में चर्चा इस बात पर भी हो रही है कि क्या फिर से शेख हसीना के प्रत्यर्पण का मामला रिश्तों में कड़वाहट लाएगा.
इस संबंध में बीएनपी के महासचिव मिर्जा फखरुल इस्लाम आलमगीर ने कहा कि शेख हसीना की भारत में मौजूदगी बांग्लादेश को भारत के साथ अपने संबंधों को आगे ले जाने से नहीं रोकेगी. 

द हिंदू को दिए इंटरव्यू में आलमगीर ने कहा, ‘हम मानते हैं कि हसीना ने वास्तव में गंभीर मानवाधिकार उल्लंघन किए हैं. लोग उन्हें सजा देने की मांग कर रहे हैं और हमारा मानना है कि भारत को उन्हें हमारे हवाले करना चाहिए. लेकिन अगर शेख हसीना को बांग्लादेश को नहीं सौंपा जाता है, तो भी यह मुद्दा व्यापार, वाणिज्यिक संबंधों सहित व्यापक रिश्तों को आगे बढ़ाने में बाधा नहीं खड़ी करेगा. हम और भी बेहतर संबंध बनाना चाहते हैं.’

यूनुस सरकार ने शेख हसीना के प्रत्यर्पण को बनाया था बड़ा मुद्दा

शेख हसीना को सत्ता से हटाने के बाद बांग्लादेश में मोहम्मद यूनुस की अंतरिम सरकार ने 17 महीनों तक शासन किया. यूनुस के समय भारत-बांग्लादेश के रिश्ते निचले स्तर पर थे जहां वो बार-बार भारत से शेख हसीना के प्रत्यर्पण की मांग कर रहे थे. भारत ने बांग्लादेश की इन मांगों पर कोई प्रतिक्रिया नहीं दी है.
बीएनपी महासचिव ने कहा कि हसीना, उनके मंत्रियों और उन नौकरशाहों के खिलाफ विद्रोह के दौरान हत्याओं और अपराध के आरोप में मामले चल रहे हैं और यह अब भी जारी रहेगा.

‘भारत-बांग्लादेश साथ काम करेंगे’

उन्होंने कहा, ‘अमेरिका और चीन के बीच भी कई मतभेद हैं, फिर भी वो साथ काम कर रहे हैं. भारत-बांग्लादेश संबंधों को केवल एक मुद्दे तक सीमित नहीं रखना चाहिए.’
आलमगीर ने बांग्लादेश की राजनीति में बीएनपी की ऐतिहासिक भूमिका का उल्लेख करते हुए कहा कि अगस्त 1975 में शेख मुजीबुर रहमान की हत्या के बाद, जब शेख हसीना भारत में थीं, तब बीएनपी के संस्थापक जियाउर रहमान भारत गए थे.
उन्होंने कहा कि भारत के तत्कालीन प्रधानमंत्री मोरारजी देसाई भी ढाका दौरे पर गए थे. उन्होंने यह भी याद दिलाया कि जियाउर रहमान जनवरी 1980 में दिल्ली गए थे और इंदिरा गांधी से मुलाकात की थी. यह वही दौर था जब शेख हसीना अपनी राजनीतिक शुरुआत के लिए बांग्लादेश लौटने की प्लानिंग कर रही थीं.

भारत के साथ इन मुद्दों को उठाएगा बांग्लादेश

उन्होंने कहा, ‘अगले साल से पहले गंगा जल संधि के नवीनीकरण के तहत फरक्का के पानी का मुद्दा उठेगा, फिर सीमा पर होने वाली हत्याओं का मुद्दा है और हमें इन पर बातचीत करनी होगी. हम भारत से युद्ध नहीं कर सकते. हमें बातचीत करनी होगी. जो लोग भारत से लड़ने की बात करते हैं, वो पागलों जैसी बात कर रहे हैं.’
आलमगीर ने कहा कि बीएनपी का 31 सूत्रीय एजेंडा भारत और बांग्लादेश के बीच व्यापार, वाणिज्य, क्षमता निर्माण और डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर जैसे क्षेत्रों में सहयोग के मौके बढ़ाएगा. उन्होंने कहा, ‘भारत के पास टेक्निकल एजुकेशन के संसाधन हैं और हमारे पास बड़ी संख्या में बेरोजगार युवा हैं. हमें उनकी क्षमता बढ़ानी होगी ताकि उन्हें खाड़ी देशों में रोजगार मिल सके.’

तारिक रहमान को जीत पर पीएम मोदी ने दी थी बधाई

चुनाव में तारिक रहमान की जीत पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स के जरिए उन्हें बधाई दी थी. पीएम मोदी ने उन्हें फोन करके भी अपनी शुभकामनाएं दी थी.
सोशल मीडिया पर बधाई देते हुए पीएम मोदी ने लिखा था, ‘मैं तारिक रहमान को बीएनपी का नेतृत्व करते हुए बांग्लादेश के संसदीय चुनावों में जीत हासिल करने पर हार्दिक बधाई देता हूं. यह जीत आपके नेतृत्व में बांग्लादेश की जनता के विश्वास को दिखाती है.’
उन्होंने आगे लिखा, ‘भारत एक लोकतांत्रिक, प्रगतिशील और समावेशी बांग्लादेश के समर्थन में हमेशा खड़ा रहेगा. मैं उम्मीद करता हूं कि हमारे बहुआयामी संबंधों को मजबूत करने और साझा विकास लक्ष्यों को हासिल करने के लिए हम साथ मिलकर काम करेंगे.’
उनके इस बधाई संदेश पर बीएनपी की राष्ट्रीय स्थायी समिति के मेंबर और पार्टी के वरिष्ठ नेता नजरुल इस्लाम खान ने कहा कि पीएम मोदी ने जनता के जनादेश को स्वीकार किया है जिसे लेकर बीएनपी उनका धन्यवाद करती है.
मीडिया से बात करते हुए उन्होंने कहा, ‘मैं उम्मीद करता हूं कि तारिक रहमान के नेतृत्व में दोनों पड़ोसी देशों और उनके लोगों के बीच के रिश्ते अब और मजबूत होंगे. हमारे नेता तारिक रहमान को बधाई देने के लिए मैं पीएम मोदी का धन्यवाद करता हूं. यह अच्छी बात है कि लोकतांत्रिक देश जनादेश का सम्मान करें. पीएम मोदी ने यह किया है और हम उन्हें धन्यवाद देते हैं.’
बांग्लादेश ने तारिक रहमान के शपथ ग्रहण समारोह में शामिल होने के लिए पीएम मोदी को न्योता भी भेजा. हालांकि, पीएम मोदी की जगह लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला शपथ ग्रहण समारोह में हिस्सा लेने के लिए बांग्लादेश जाएंगे.
भारत को लेकर तारिक रहमान का स्टैंड क्या रहा है?
तारिक रहमान 17 सालों के निर्वासन के बाद पिछले साल दिसंबर में लंदन से बांग्लादेश लौटे हैं. बांग्लादेश लौटने के बाद से उन्होंने भारत-विरोधी रुख अपनाने से परहेज किया है. जबकि 2001-2006 की खालिदा जिया सरकार के दौरान भारत के साथ उनका इतिहास तनावपूर्ण रहा है.
आईसीसी ने बांग्लादेश को टी20 क्रिकेट वर्ल्ड कप से बाहर कर दिया था. इस संबंध में उन्होंने भारत को लेकर कोई टिप्पणी नहीं की. इससे साफ है कि वो रिश्ते सुधारने के किसी भी दरवाजे को बंद नहीं करना चाहते. लेकिन उन्होंने यह भी कह दिया है कि ढाका में वो शेख हसीना के बाद भारत के ‘सबसे पसंदीदा’ व्यक्ति नहीं होंगे.
चुनाव जीतने के बाद अपनी प्रेस कॉन्फ्रेंस में रहमान ने कहा कि उनकी विदेश नीति बांग्लादेश के सर्वोत्तम हितों पर आधारित होगी. इस बात को उनके विदेश नीति सलाहकार हुमायूं कबीर ने भी दोहराया. उन्होंने एक इंटरव्यू में कहा कि भारत के साथ 1996 की गंगा जल संधि को बांग्लादेश के हितों को ध्यान में रखते हुए रिन्यू किया जाएगा.

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