पहली बार… वायुसेना के MI-17 हेलीकॉप्टर से बाघिन की शिफ्टिंग; पेंच से राजस्थान भेजी गई

बीते 24 दिनों से चल रहे ऑपरेशन को आखिरकार रविवार को कामयाबी मिल गई. देश में पहली बार किसी टाइगर का हेलीकॉप्टर से इंटर स्टेट ट्रांस्लोकेशन पूरा हुआ. एमपी के पेंच टाइगर रिजर्व की 3 साल की बाघिन (PN-224) को राजस्थान के रामगढ़ विषधारी टाइगर रिजर्व में छोड़ा जाएगा. ये पूरी कवायद राजस्थान में बाघों को जीन पूल सुधारने की कवायद है. 

दरअसल, राजस्थान में लगभग सभी बाघ एक ही जीन पूल के हैं, इसीलिए पेंच टाइगर रिजर्व से अलग जीन पूल की बाघिन को राजस्थान ले जाया गया ताकि बाघों की आने वाले नस्लें स्वस्थ हों.
पेंच टाइगर रिजर्व के प्रबंधन ने सबसे पहले राजस्थान भेजने के लिए बाघिन PN-224 की पहचान की. उसके बाद जंगल में 50 कैमरे लगाकर बाघिन को ट्रैक किया. इसके लिए राजस्थान से एक टीम भी सिवनी आई.

बाघिन को ट्रैक करने के बाद हाथी दल के साथ बाघिन को ट्रेंक्युलाइज करके रेडियो कॉलर लगाने की कवायद शुरू हुई. 5 दिसंबर को बाघिन को ट्रेंक्युलाइज करके रेडियो कॉलर पहनाया गया और जंगल में छोड़ दिया गया ताकि कुछ दिन मॉनिटरिंग करके राजस्थान भेजा जा सके. लेकिन बाघिन ने अगले दिन ही रेडियो कॉलर निकाल दिया.
इसके बाद कुछ दिन इंतजार करने के बाद बीते दिनों फिर कवायद शुरू हुई और आज बाघिन को ट्रेस करके ट्रैंक्युलाइज किया गया और फिर वायुसेना के M-17 हेलीकॉप्टर से राजस्थान ले जाया गया.

बाघिन के साथ मध्य प्रदेश से मिशन लीडर IFS गुरलीन कौर, पेंच के वेट्रिनरी डॉक्टर अखिलेश मिश्रा समेत 4 अफसर राजस्थान गए हैं.
पेंच टाइगर रिजर्व के डिप्टी डायरेक्टर रजनीश कुमार सिंह ने बताया कि इस ऑपरेशन की शुरुआत 28 नवंबर को हुई थी. 5 दिसंबर को बाघिन को ट्रेंक्युलाइज करके रेडियो कॉलर लगाया था, लेकिन अगले ही दिन उसने कॉलर निकाल दिया था. फिर दोबारा ट्रेंक्युलाइज किया. राजस्थान की टीम आई. हमारे यहां से भी ऑफिसर और वेटनरी डॉक्टर बाघिन को राजस्थान के रामगढ़ विषधारी टाइगर रिजर्व छोड़ के आएंगे. बाघिन को इंटर स्टेट टाइगर से ले जाना पहली बार हो रहा है. राजस्थान में इन ब्रीडिंग स्ट्रेस को दूर करने के लिए दूसरे जीन पूल के टॉगर भेजे जा रहे हैं ताकि वहां के टाइगर भी स्वस्थ होकर अपना कुनबा बढ़ा सकें. 

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