सरकार की सख्ती के बावजूद नहीं ठीक हो रहा इंडिगो संकट, 450 से अधिक फ्लाइट्स कैंसिल

सरकार की सख्ती और नियमों में ढील देने के बावजूद अब तक इंडिगो की फ्लाइट कैंसिलेशन की समस्या पूरी तरह से ठीक नहीं हो पाई है. सोमवार, 8 दिसंबर को भी देशभर के अलग-अलग एयरपोर्ट्स में इंडिगो की फ्लाइट्स कैंसिल होने का सिलसिला जारी रहा. सोमवार को दोपहर तक इंडिगो की 450 से ज्यादा फ्लाइट्स कैंसिल हो चुकी हैं.

इसमें अकेले दिल्ली एयरपोर्ट पर 134 फ्लाइट्स कैंसिल हुईं. वहीं बेंगलुरु एयरपोर्ट पर 127, चेन्नई में 71, हैदराबाद में 77, जम्मू में 20 और श्रीनगर में 16 इंडिगो की फ्लाइट्स रद्द हो गईं. इसके अलावा इंडिया टुडे की रिपोर्ट के अनुसार अहमदाबाद में 36 फ्लाइट्स ग्राउंडेड रहीं और विशाखापटनम में 7 फ्लाइट्स कैंसिल हुईं. मुंबई, कोलकाता समेत अन्य बड़े एयरपोर्ट्स पर भी इंडिगो का ऑपरेशन काफी प्रभावित हुआ.

रविवार को कैंसिल हुई थी 650 से ज्यादा फ्लाइट्स
इससे पहले रविवार, 7 दिसंबर को इंडिगो की 650 से ज्यादा फ्लाइट्स कैंसिल थीं. इधर, इंडिगो का कहना है कि फ्लाइट्स कैंसिल होने पर यात्रियों को पूरा रिफंड दिया जा रहा है. कंपनी ने कहा है कि अब तक वह 610 करोड़ रुपये से ज्यादा का रिफंड दे चुकी है. हालांकि रिफंड का आदेश भी सरकार की ओर से एयरलाइन को दिया गया था. इसके अलावा सरकार ने पूरे मामले पर दखल देते हुए कई एक्शन लिए थे. केंद्रीय उड्डयन मंत्रालय ने हवाई किराओं की सीमा तय करने और इंडिगो को टिकट रिफंड प्रक्रिया में तेजी लाने के निर्देश दिए थे.
सरकार ने कहा है कि वह पूरे मामले की उच्च-स्तरीय जांच भी करा रही है. इसके अलावा विमानन रेगुलेटर DGCA ने शनिवार 6 दिसंबर को इंडिगो एयरलाइन के CEO पीटर एल्बर्स को ‘कारण बताओ’ नोटिस जारी किया था. नोटिस में रेगुलेटर ने पूछा था कि उनके खिलाफ कड़ी कार्रवाई क्यों नहीं की जानी चाहिए. DGCA ने इंडिगो पर आरोप लगाया गया कि उसने कैंसिलेशन, लंबी वेटिंग और बोर्डिंग न मिलने की स्थिति में यात्रियों को नियमों के मुताबिक जानकारी और सुविधाएं नहीं दीं. DGCA ने CEO को सीधे तौर पर जिम्मेदार ठहराते हुए कहा कि वे भरोसेमंद सेवाएं सुनिश्चित करने में “अपने कर्तव्य में असफल” रहे.

हफ्ते भर से जारी इस संकट की वजह से देशभर के हजारों यात्री बेहद परेशान हुए. लोग घंटों तक एयरपोर्ट पर फंसे रहे और अपने जरूरी कामों के लिए गंतव्य तक नहीं पहुंच पाए. इस आपदा के लिए फ्लाइट ड्यूटी टाइम लिमिटेशन (FDTL) के नियमों को जिम्मेदार ठहराया गया था, जिसे सरकार ने परेशानी बढ़ने के बाद वापस ले लिया. हालांकि सरकार की ओर से कहा गया है कि इन नियमों को लागू करने के लिए एक साल का समय दिया गया था, फिर भी कंपनी ने इसकी तैयारी नहीं की और जान बूझकर लापरवाही की.

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