‘हार नहीं पचती तो सदन क्यों आते हो’, संसद सत्र के पहले दिन ही पीएम मोदी ने विपक्ष पर तंज कसा

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने संसद का शीतकालीन सत्र शुरू होने से पहले विपक्ष पर तीखा हमला बोला है. उन्होंने कहा कि विपक्ष संसद का इस्तेमाल चुनाव में अपनी हार का गुस्सा निकालने के लिए करता है. पीएम ने तंज कसते हुए कहा कि वह विपक्ष को टिप्स देने के लिए भी तैयार हैं कि उन्हें कैसा परफॉर्म करना चाहिए. पीएम मोदी ने कहा कि संसद में काम होना चाहिए, ड्रामा नहीं. उन्होंने कहा कि पहली बार चुनकर आए सांसदों को सदन के अनुभव का लाभ मिलना चाहिए, उन्हें अपनी बात कहने का मौका मिलना चाहिए. कहा कि सदन का फोकस ‘नीति’ पर होना चाहिए, ‘नारे’ पर नहीं.

मालूम हो कि संसद का शीतकालीन सोमवार, 1 दिसंबर से शुरू हो गया है. सत्र शुरू होने से पहले प्रधानमंत्री मोदी ने संसद के बाहर मीडिया को संबोधित करते हुए विपक्ष पर तंज भी कसा और नसीहत भी दी. उन्होंने कहा,
अगर हमारे मीडिया के दोस्त विश्लेषण करें, तो उन्हें पता चलेगा कि पिछले कुछ समय से इस हाउस का इस्तेमाल या तो इलेक्शन वॉर्मअप (अभ्यास) के लिए किया जा रहा है या हार का गुस्सा निकालने के लिए. मैंने कुछ ऐसे राज्य देखे हैं, जहां सत्ता में आने के बाद इतनी एंटी-इनकंबेंसी है कि वे जनता तक पहुंच नहीं पाते. वे लोगों के सामने अपनी बात नहीं रख पाते. इसलिए वे अपना सारा गुस्सा हाउस में निकालते हैं. कुछ पार्टियों ने हाउस का इस्तेमाल अपनी राज्य की पॉलिटिक्स के लिए करने का एक नया ट्रेंड शुरू किया है. अब उन्हें उस खेल पर फिर से सोचना चाहिए, जो वे पिछले 10 सालों से खेल रहे हैं, जिसे देश स्वीकार नहीं कर रहा है. उन्हें कम से कम अपने तरीके और अपनी स्ट्रेटेजी बदलनी चाहिए. मैं उन्हें टिप्स देने के लिए तैयार हूं कि उन्हें कैसा परफॉर्म करना चाहिए. लेकिन कम से कम सांसदों के अधिकारों को नज़रअंदाज़ न करें. उन्हें अपनी बात कहने का मौका दें.

हार नहीं पचा पातीं 1-2 पार्टियां: PM

पीएम मोदी ने विपक्ष पर आगे निशाना साधते हुए कहा कि 1-2 पार्टियां ऐसी हैं, जो हार को पचा नहीं पातीं. उन्होंने बिहार चुनाव का जिक्र करते हुए कहा कि पार्टियों की बयानबाजी सुनकर ऐसा लगता है कि हार ने उनको अभी तक परेशान करके रखा है. पीएम ने कहा,
मैं सोच रहा था कि बिहार के नतीजों को इतना समय हो गया, तो अब थोड़ा संभल गए होंगे. लेकिन, कल जो मैं उनकी बयानबाजी सुन रहा था, उससे लगता है कि पराजय ने उनको परेशान करके रखा है. संसद देश के लिए क्या सोच रही है, संसद देश के लिए क्या करना चाहती है, संसद देश के लिए क्या करने वाली है, इन मुद्दों पर केंद्रित होना चाहिए. विपक्ष भी अपना दायित्व निभाए, चर्चा में मजबूत मुद्दे उठाए, पराजय की निराशा से बाहर निकलकर आए. दुर्भाग्य ये है कि 1-2 दल तो ऐसे हैं, कि वो पराजय भी नहीं पचा पाते.

‘काम होना चाहिए, ड्रामा नहीं’

पीएम मोदी ने आगे कहा कि संसद में काम होना चाहिए, ड्रामा नहीं. फोकस ‘नीति’ (पॉलिसी) पर होना चाहिए, ‘नारे’ पर नहीं. उन्होंने कहा कि शीतकालीन सत्र हार से पैदा हुई फ्रस्ट्रेशन या जीत के बाद घमंड का मैदान नहीं बनना चाहिए. पीएम ने कहा,

पॉलिटिक्स में नेगेटिविटी काम की हो सकती है. लेकिन आखिर में, देश बनाने के लिए कुछ पॉजिटिव सोच भी होनी चाहिए. मैं आपसे उम्मीद करता हूं कि आप नेगेटिविटी को लिमिट में रखें और देश बनाने पर फोकस करें.

पीएम ने आगे बिहार के मतदाताओं की तारीफ करते हुए कहा,
बिहार में हाल के चुनावों में रिकॉर्ड वोटिंग डेमोक्रेसी की सबसे बड़ी ताकत है. माताओं और बहनों की बढ़ती भागीदारी अपने आप में नई उम्मीद और नया विश्वास पैदा कर रही है. एक तरफ डेमोक्रेसी का मजबूत होना, और अब इस डेमोक्रेटिक सिस्टम के अंदर, इकॉनमी का मजबूत होना भी दुनिया की नज़र में है. भारत ने साबित कर दिया है कि डेमोक्रेसी से नतीजे मिल सकते हैं.

शीतकालीन सत्र में उपराष्ट्रपति सीपी राधाकृष्णन पहली बार राज्यसभा के सभापति के तौर पर सत्र को संचालित करेंगे. इस पर पीएम मोदी ने उन्हें शुभकामनाएं दी. इसके बाद उन्होंने राज्यसभा को संबोधित करते हुए कहा,
मैं आपको (उपराष्ट्रपति को) भरोसा दिलाता हूं कि इस सदन में बैठे सभी सदस्य, अपर हाउस की गरिमा बनाए रखते हुए, हमेशा आपकी गरिमा का भी ध्यान रखेंगे. मैं आपको भरोसा दिलाता हूं कि वे मर्यादा बनाए रखेंगे. हमारे चेयरमैन एक साधारण परिवार से आते हैं, एक किसान परिवार से, और उन्होंने अपनी पूरी ज़िंदगी समाज सेवा को समर्पित कर दी है. राजनीति इसका एक पहलू रही है, लेकिन मुख्य काम समाज सेवा ही रहा है. वह समाज के लिए समर्पित रहे हैं. वह हम सभी के लिए एक प्रेरणा और मार्गदर्शक हैं, जो समाज सेवा में रुचि रखते हैं.

खरगे ने किया पलटवार

इधर, पीएम मोदी के हमलों के जवाब में विपक्ष ने भी पलटवार किया है. कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे ने एक्स पर पोस्ट करते हुए कहा कि शीतकालीन सत्र के पहले दिन प्रधानमंत्री जी ने संसद के मुख्य मुद्दों पर बात करने के बजाय फिर से “ड्रामेबाजी की डिलीवरी” की है. उन्होंने आरोप लगाया कि संसदीय मर्यादा और संसदीय प्रणाली को पिछले 11 साल से सरकार ने लगातार कुचला है. खरगे ने कहा कि पिछले मानसून सत्र में ही कम से कम 12 बिल जल्दबाजी में पारित कर दिए गए. कुछ 15 मिनट से भी कम समय में और कुछ बिना किसी चर्चा के.

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