पटना: बिहार में मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने एक बार फिर से लोगों को चौंका दिया। किसी को उम्मीद नहीं थी कि नीतीश कुमार अपने 21 साल के कार्यकाल में गृह विभाग छोड़ेंगे। लेकिन इस बार के बदले सीन ने नीतीश कुमार को ये करने पर मजबूर कर दिया। इसका ये मतलब कतई नहीं कि नीतीश कुमार ने सरेंडर कर दिया। ये सब जानते हैं कि नीतीश कुमार कितने हार्ड बारगेनर हैं। अगर उन्होंने गृह विभाग बीजेपी को दिया है तो कुछ खास वजह से ही। पहले ये जान लीजिए कि शपथ ग्रहण तक NDA में विभागों का बंटवारा नहीं हुआ था। शपथ ग्रहण इसीलिए समय पर कराया गया कि विरोधी महागठबंधन ये न कह सके कि NDA में सीट बंटवारे के बाद अब मंत्रालयों को लेकर कलह है। इतनी बंपर जीत के बाद मोदी-नीतीश विपक्ष को ये मौका नहीं देना चाहते थे। इसीलिए पहले मंत्रिमंडल ने शपथ ली, उसके बाद शुक्रवार को आखिरी समय में मंत्रालय के बंटवारे पर मुहर लगाई गई।
गृह विभाग के बदले जेडीयू को स्पीकर पद
राजनीतिक गलियारों में इस बात की जोरदार चर्चा है कि जेडीयू ने बीजेपी को गृह विभाग जैसा महत्वपूर्ण मंत्रालय इसी शर्त पर सौंपने का फैसला किया कि विधानसभा अध्यक्ष का पद जेडीयू कोटे से होगा। हालांकि शुक्रवार सुबह तक बीजेपी और जेडीयू के बीच स्पीकर पद को लेकर कोई स्पष्ट सहमति नहीं बन पाई थी। हालांकि, दोनों दलों के वरिष्ठ नेताओं ने गहन विचार-विमर्श किया और सत्ता में संतुलन बनाए रखने के लिए यह महत्वपूर्ण समझौता किया गया। बीजेपी को गृह विभाग मिला, जबकि जेडीयू को स्पीकर का पद मिला।
विलंब से बचने के लिए समझौता
दोनों ही दलों के नेताओं को इस बात की चिंता थी कि विधानसभा चुनाव में मिले कमजोर बहुमत के मद्देनजर, यदि विभागों के बंटवारे में किसी तरह का विलंब होता है, तो जनता के बीच सकारात्मक संदेश नहीं जाएगा। इसी कारण, मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने स्थिरता सुनिश्चित करने के लिए गृह विभाग की जिम्मेदारी सहयोगी दल को सौंपने का फैसला किया, और बीजेपी ने भी गठबंधन में संतुलन बनाए रखने के लिए स्पीकर का पद जेडीयू को देने पर सहमति जताई।
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