अमेरिकी खुफिया एजेंसी CIA के पूर्व अधिकारी जॉन किरियाकू (John Kiriakou) ने बड़ा खुलासा किया है. उन्होंने कहा कि दिसंबर 2001 में भारतीय संसद पर हमले (Parliament attack) के बाद भारत और पाकिस्तान के बीच युद्ध छिड़ने का खतरा बहुत बढ़ गया था. साथ ही उन्होंने यह भी दावा किया कि साल 2008 के मुंबई हमलों के लिए पाकिस्तान समर्थित कश्मीरी आतंकवादी समूह जिम्मेदार थे.
क्या कहा CIA अधिकारी ने?
इंडिया टुडे की रिपोर्ट के मुताबिक, एक खास इंटरव्यू के दौरान जॉन किरियाकू ने यह बात कही. पूर्व CIA अधिकारी ने ‘ऑपरेशन पराक्रम’ का जिक्र करते हुए बताया कि उस वक्त अमेरिकी खुफिया एजेंसियों को डर था कि दोनों देशों के बीच टकराव हो सकता है. उन्होंने कहा कि अमेरिका ने इस खतरे को इतनी गंभीरता से लिया कि अमेरिकी परिवारों को इस्लामाबाद से बाहर निकाल लिया गया. किरियाकू ने बताया,
परिवार के सदस्यों को इस्लामाबाद से निकाल लिया गया था. हमें भरोसा था कि भारत और पाकिस्तान युद्ध करेंगे… विदेश उप-सचिव समझौता कराने के लिए दिल्ली और इस्लामाबाद के बीच आते-जाते रहे, लेकिन दोनों पक्ष पीछे हट गए.
उन्होंने स्वीकार किया, “हम अलकायदा पर इतने व्यस्त और केंद्रित थे कि हमने भारत के बारे में कभी सोचा ही नहीं.”
उन्होंने आगे कहा, “पाकिस्तान भारत में आतंकवाद करवा रहा था और कोई कुछ नहीं कर रहा था,” किरियाको ने बताया कि सीआईए के भीतर भारत की नीति को ‘स्ट्रैटेजिक पेशेंस’ (रणनीतिक संयम) कहा जाता था. वो बोले, “भारत ने संसद हमले और मुंबई हमले के बाद संयम दिखाया, लेकिन अब वक्त आ गया है जब भारत को यह ध्यान रखना होगा कि उसका संयम कहीं कमजोरी न समझा जाए.”
भारत और पाकिस्तान के बीच युद्ध पर क्या बोले किरियाको?
किरियाको ने चेतावनी दी कि अगर भारत और पाकिस्तान के बीच पारंपरिक युद्ध (Conventional War) हुआ तो पाकिस्तान को निश्चित रूप से हार का सामना करना पड़ेगा. उन्होंने कहा, “अगर वास्तविक युद्ध हुआ तो पाकिस्तान हार जाएगा. मैं परमाणु युद्ध की बात नहीं कर रहा, सिर्फ पारंपरिक युद्ध में भी उसकी हार तय है.” उन्होंने कहा कि भारत की सैन्य शक्ति और रणनीतिक क्षमताएं पाकिस्तान की तुलना में बहुत आगे हैं.
उन्होंने आगे कहा, “भारत को उकसाने से पाकिस्तान को कोई फायदा नहीं होगा. वे हारेंगे. बस इतना ही स्पष्ट है.” किरियाको ने भारत की हालिया सैन्य कार्रवाइयों का जिक्र करते हुए कहा कि भारत ने 2016 की सर्जिकल स्ट्राइक, 2019 के बालाकोट एयरस्ट्राइक और 2025 के ऑपरेशन सिंदूर जैसे कदमों से यह साफ कर दिया है कि वह सीमा पार आतंकवाद या परमाणु धमकी से डरने वाला देश नहीं है. उन्होंने कहा, “भारत ने बार-बार दिखाया है कि वह आतंक और ब्लैकमेल को बर्दाश्त नहीं करेगा.”
व्हाइट हाउस ने कार्रवाई से किया इनकार
जब उनसे पूछा गया कि इतने सबूतों के बावजूद अमेरिका ने पाकिस्तान के खिलाफ कार्रवाई क्यों नहीं की तो उन्होंने कहा, “यह फैसला व्हाइट हाउस का था. उस वक्त अमेरिका के लिए पाकिस्तान से रिश्ता भारत से ज्यादा जरूरी था. हमें पाकिस्तान की जरूरत थी, उन्हें हमारी नहीं.”
कौन हैं जॉन किरियाको?
जॉन किरियाको ने 15 साल तक सीआईए में सेवा दी. वे पहले विश्लेषक रहे और बाद में 9/11 के बाद पाकिस्तान में काउंटर टेररिज्म ऑपरेशंस के प्रमुख बने. उन्होंने पेशावर, कराची, लाहौर, फैसलाबाद और क्वेटा में अल-कायदा के ऑपरेटिव्स को ट्रैक किया. 2007 में उन्होंने अमेरिकी मीडिया पर आकर खुलासा किया कि सीआईए पूछताछ के दौरान टॉर्चर (यातना) का इस्तेमाल कर रही थी और वॉटरबोर्डिंग जैसी तकनीकों से कैदियों से जानकारी ली जा रही थी. इसके बाद उन्हें 23 महीने की जेल हुई, लेकिन वे आज भी कहते हैं, “मुझे कोई पछतावा नहीं है. जो किया, सच के लिए किया.”
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