आज पूरे देश में सुहागिन महिलाएं करवा चौथ का व्रत रख रही हैं और अब चंद्र दर्शन का इंतजार कर रही हैं, क्योंकि व्रत का समापन चांद देखने के बाद ही होता है। करवा चौथ के दिन अक्सर बादलों के कारण चांद के दर्शन देर से होते हैं, जिससे महिलाएं आसमान की ओर टकटकी लगाए रहती हैं। आइये जानते हैं कब निकलेगा चांद।
देश के हर हिस्से में कब निकलेगा करवा चौथ का चांद
करवा चौथ का चांद बहुत ही खास माना जाता है। इस दिन सुहागिन महिलाएं सूर्योदय से लेकर चंद्रोदय तक निर्जला व्रत रखती हैं और शाम की पूजा के बाद चांद के निकलने पर दर्शन और पूजन के बाद व्रत को पूरा करती हैं। आज रात देश भर में चांद करीब 08 बजे लेकर 9 बजे बीच देश के हर हिस्से में चांद दिखाई देगा। आइए देखते आपके शहर में चांद के निकलने का समय क्या रहेगा।
करवा चौथ पर कब निकलेगा आपके शहर में चांद
शहर समय
दिल्ली रात 08:13
नोएडा रात 08:13
मुंबई रात 08:55
कोलकाता रात 07:41
चंडीगढ़ रात 08:08
पंजाब रात 08:10
जम्मू रात 08:11
लुधियाना रात 08:11
देहरादून रात 08:04
शिमला रात 08:06
पटना रात 07:48
लखनऊ रात 08:02
कानपुर रात 08:06
प्रयागराज रात 08:02
इंदौर रात 08:33
भोपाल रात 08:26
अहमदाबाद रात 08:47
चेन्नई रात 08:37
बंगलूरू रात 08:48
जयपुर रात 08:22
रायपुर रात 07:52
आज रात क्या रहेगा चंद्रोदय का समय
आज रात सभी सुगाहिनों को करवा चौथ के चांद के इंतजार रहेगा। करवा माता की पूजा के बाद चांद के दर्शन और जल अर्पित करते हुए अपने पति के हाथों से जल ग्रहण करके व्रत पूरा करेंगे। पंचांग के अनुसार देश में आज करीब 8 बजकर 13 मिनट के आसपास चांद दिखाई देगा।
चंद्रोदय पर चांद को अर्घ्य देते हुए जरूर बोले ये मंत्र
करवा चौथ पर चंद्रोदय का विशेष महत्व होता है। रात को चांद के निकलने पर पूजा-अर्चना और अर्घ्य देने के साथ चंद्रदेव के मंत्र ऊं श्रां श्रीं श्रौं स: चंद्रमसे नम: और ऊं श्रीं श्रीं चंद्रमसे नम: मंत्र का जाप जरूर करें।
करवा चौथ पूजा शुभ मुहूर्त
अब से कुछ घंटों के बाद करवा चौथ पूजा का शुभ मुहूर्त शुरू हो जाएगा। सुहागिन महिलाएं दिनभर निर्जला व्रत रखते हुए करवा माता की पूजा-अर्चना और कथा सुनेंगी। करवा चौथ पर सुहागिन महिलाएं 16 श्रृंगार करते हुए एक जगह एकत्रित होकर करवा माता की पूजा करती हैं फिर चंद्र के निकलने का इंतजार होता है। आइए जानते हैं करवा चौथ पूजा का शुभ मुहूर्त और चंद्रोदय का समय।
करवा चौथ 2025 पूजन शुभ मुहूर्त-
10 अक्तूबर शाम 05:57 मिनट से शाम 07:11 मिनट तक पूजन अवधि- 1 घंटा 14 मिनट करवा चौथ व्रत समय- सुबह 06:19 मिनट से शाम 08:13 मिनट तक करवा चौथ व्रत अवधि- 13 घंटे 54 मिनट
करवा चौथ पर आज चंद्रोदय का समय
करवा चौथ पर आज चंद्रोदय का समय शाम 08 बजकर 13 मिनट पर होगा। देशभर के अलग-अलग शहरों में चांद के निकलने के समय में कुछ बदलाव हो सकता है।
करवा चौथ पर जरुर करें भगवान गणेश की आरती
गणेश जी की आरती
जय गणेश जय गणेश जय गणेश देवा।माता जाकी पार्वती पिता महादेवा॥एकदन्त दयावन्त चारभुजाधारीमाथे पर तिलक सोहे मूसे की सवारी।पान चढ़े फूल चढ़े और चढ़े मेवालड्डुअन का भोग लगे सन्त करें सेवा॥जय गणेश जय गणेश जय गणेश देवा।माता जाकी पार्वती पिता महादेवा॥अन्धे को आँख देत, कोढ़िन को काया।बाँझन को पुत्र देत, निर्धन को माया ।।’सूर’ श्याम शरण आए सफल कीजे सेवामाता जाकी पार्वती पिता महादेवा॥जय गणेश जय गणेश जय गणेश देवा।माता जाकी पार्वती पिता महादेवा॥
करवा माता की आरती
ॐ जय करवा मैया, माता जय करवा मैयाजो व्रत करे तुम्हारा, पार करो नइयाॐ जय करवा मैयासब जग की हो माता, तुम हो रुद्राणीयश तुम्हारा गावत, जग के सब प्राणीॐ जय करवा मैया।कार्तिक कृष्ण चतुर्थी, जो नारी व्रत करतीदीर्घायु पति होवे, दुख सारे हरती..ॐ जय करवा मैयाहोए सुहागिन नारी, सुख संपत्ति पावेगणपति जी बड़े दयालु, विघ्न सभी नाशेॐ जय करवा मैयाकरवा मैया की आरती, व्रत कर जो गावेव्रत हो जाता पूरन, सब विधि सुख पावेॐ जय करवा मैया
अकेले करवा कैसे बदलें?
अगर आप करवा चौथ की पूजा अकेले कर रही हैं और किसी के साथ करवा बदलने का अवसर नहीं है, तो घबराने की जरूरत नहीं है। ऐसी स्थिति में महिलाएं माता गौरी के साथ करवा बदलती हैं। इसके लिए आप पार्वती माता की तस्वीर रख सकती हैं या मिट्टी से गौरी माता की छोटी प्रतिमा बनाकर उन्हें पूजन स्थल पर स्थापित कर सकती हैं। करवा बदलने की प्रक्रिया में, आपको सात बार हाथों को क्रॉस करते हुए करवा घुमाना होता है। इस दौरान आप बोलें: “ले सुहागन ले करवा, दे सुहागन दे करवा”। यह प्रक्रिया माता गौरी को साक्षी मानकर पूरी श्रद्धा से करनी चाहिए। पूजा पूरी होने के बाद करवा को दान कर देना चाहिए, जो इस व्रत का एक महत्वपूर्ण हिस्सा होता है। इस तरह अकेले में भी करवा चौथ की पूजा पूरी विधि-विधान के साथ की जा सकती है।
अकेले करवा चौथ की पूजा कैसे करें?
• पूजा स्थल पर करवा चौथ कैलेंडर या चौथ माता की छवि लगाएं।
• कलश में पानी भरें और उसमें सिक्का, सुपारी, हल्दी की गांठ व अक्षत डालें।
• कलश के ऊपर आम/अशोक के 5–7 पत्ते रखें और मुंह ढककर उस पर अक्षत रखें।
• कलश के ऊपर घी का दीपक रखें।
• एक करवा (मिट्टी या तांबे का) लें, उसमें जल भरें और छेद में 4 सींकें लगाएं।
• करवे में चांदी का सिक्का या अंगूठी डालें, ढककर मुख पर मिठाई रखें।
• इसी करवे से चंद्रमा को अर्घ्य दिया जाता है।
• एक और करवा तैयार करें जिसे दान किया जाएगा (खील, बताशे, मिठाई आदि भरें)।
• अकेली पूजा करने वाली महिलाएं दो करवे भरती हैं एक अपने लिए, एक माता गौरी के लिए।
• पूजा स्थान पर छलनी रखें जिससे चांद और पति को देखकर अर्घ्य देना है।
करवा चौथ पर चांद को अर्घ्य देने की विधि
• पूजा से पहले करवा चौथ की कथा जरूर सुनें।
• चांद की पूजा के लिए एक थाली तैयार करें जिसमें कलश, रोली और चावल, छलनी, आटे का दीपक, मिठाई रखें।
• चांद निकलने पर पहले छलनी से चंद्र दर्शन करें।
• फिर उसी छलनी से पति के दर्शन करें।
• कलश से चांद को अर्घ्य दें और दीपक दिखाएं।
• चांद को मिठाई का भोग लगाएं।
• चंद्रमा की आरती करें।
• चंद्रमा पर सात बार सीकें (गेहूं की बालियां या चावल) फेंकें।
• अंत में पति के हाथों से पानी पीकर व्रत खोलें।
चांद को अर्घ्य देते समय कौन सा मंत्र बोलें?
ॐ श्रीं श्रीं चन्द्रमसे नम:
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