कफ सिरप बना जानलेवा? खांसी की दवा डेक्सट्रोमेथॉर्फन पर डॉक्टर्स ने बताया कब बन सकती है ये खतरा

कफ सिरप के कारण अभी राजस्थान में ड्रग कंट्रोलर ने सिरप के उपयोग पर तुरंत रोक लगा दी है और जांच के लिए नमूने प्रयोगशाला भेजे हैं. ऐसे में कफ सिरप की गुणवत्ता जांच के घेरे में आ गई है. बताया जा रहा है कि सरकारी स्वास्थ्य केंद्रों से दिए गए कफ सिरप से बच्चों की जान को खतरा पैदा हो गया है. रिपोर्ट के मुताबिक, कफ सिरप से भरतपुर में 4 साल और जयपुर में 2 साल की बच्ची की तबियत बिगड़ गई है और वहीं सीकर में 5 साल के लड़के की मौत भी हुई है. बताया जा रहा है कि मध्य प्रदेश के छिंदवाड़ा जिले में भी पिछले एक महीने में कथित तौर पर 2 तरह के समान सिरप पीने से किडनी में संक्रमण के कारण छह बच्चों की मौत हो गई थी.

राजस्थान में जिस कफ सिरप को पीकर बच्चों की तबियत बिगड़ी है, उसका नाम डेक्सट्रोमेथॉर्फन हाइड्रोब्रोमाइड सिरप (Dextromethorphan hydrobromide) है. अब ये कफ सिरप क्या है, किन लोगों को दिया जाता है, इसकी डोज और साइड इफेक्ट आदि के बारे में Aajtak.in ने डॉक्टर्स से बात की और इसके उपयोग के बारे में जाना.

डेक्सट्रोमेथॉर्फन हाइड्रोब्रोमाइड सिरप क्या है?

डेक्सट्रोमेथॉर्फन हाइड्रोब्रोमाइड सिरप की खोज 1950 के दशक में हुई थी और इसे कोडीन जैसी आदत डालने वाली दवाओं का सुरक्षित विकल्प माना गया था.

दिल्ली के अपोलो स्पेक्ट्रा हॉस्पिटल के सीनियर कंसल्टेंट और पीडियाट्रिक्स डॉ. सुनील सरीन ने बताया, ‘डेक्सट्रोमेथॉर्फन हाइड्रोब्रोमाइड एक खांसी कम करने वाली दवा है जो मुख्य रूप से सूखी खांसी में दी जाती है.  यह दवा मस्तिष्क में खांसी पैदा करने वाले संकेतों को रोककर काम करती है, जिससे मरीज को राहत मिलती है.’

यह दवा कैमिकल प्रोसेसिंग से तैयार होती है और इसमें डेक्सट्रोमेथॉर्फन हाइड्रोब्रोमाइड (Dextromethorphan HBr) एक्टिव कंपाउंड होता है. इसे आमतौर पर सिरप के रूप में दिया जाता है ताकि बच्चे और बड़े इसे आसानी से ले सकें.’

डेक्सट्रोमेथॉर्फन हाइड्रोब्रोमाइड सिरप कौन लोग ले सकते हैं?

डॉ. सुनील ने बताया, ‘खांसी को रोकने वाली ये दवा हमेशा डॉक्टर की सलाह के अनुसार ही लेना चाहिए. छोटे बच्चों में विशेष सावधानी जरूरी है, 2 साल से कम उम्र के बच्चों को यह दवा बिल्कुल नहीं दी जानी चाहिए और 2–6 साल के बच्चों को भी सटीक खुराक ही देना चाहिए. 6 साल से ऊपर के बच्चों और बड़ों में भी इसे डॉक्टर की निगरानी में ही लेना चाहिए.’ दिल्ली के श्री बालाजी एक्शन मेडिकल इंस्टिट्यूट के इंटरनल मेडिसिन एंड इंफेक्शन डिजीज के डायरेक्टर डॉ. अरविंद अग्रवाल के मुताबिक, ‘बड़ों और महिलाओं में इसका उपयोग तभी सुरक्षित है जब इसे डॉक्टर की सही खुराक और मार्गदर्शन में लिया जाए. यह दवा खांसी को नियंत्रित करती है, जिससे मरीज को सोने में आसानी होती है और दिनभर की गतिविधियां भी बेहतर ढंग से की जा सकती हैं.’

डेक्सट्रोमेथॉर्फन हाइड्रोब्रोमाइड सिरप के नुकसान क्या हैं?

डॉ. सुनील इस बात से सहमत हैं कि कुछ लोगों में यह नींद, चक्कर या हल्का पेट दर्द जैसी समस्याएं पैदा कर सकती है और बहुत कम मामलों में एलर्जी या सांस लेने में तकलीफ भी हो सकती है इसलिए मैं हमेशा यह सलाह देता हूं कि दवा की निर्धारित खुराक ली जाए. यदि मरीज को लिवर, किडनी की समस्या या अन्य गंभीर स्वास्थ्य समस्या हों तो दवा लेने से पहले डॉक्टर से अवश्य सलाह लें.

डॉ. अरविंद ने कहा, ‘मैं हमेशा यह सलाह देता हूं कि दवा का सेवन निर्धारित खुराक और समय पर ही किया जाए. बिना डॉक्टर की सलाह के इसे बदलना या अधिक मात्रा लेना नुकसानदेह हो सकता है. सही और संतुलित इस्तेमाल से ही इस दवा के लाभ सुनिश्चित होते हैं.’

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