चीन कभी भी युद्ध शुरू नहीं करता… ट्रंप के 100 परसेंट टैरिफ की धमकी पर ड्रैगन का जवाब

बीजिंग: अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने चीन के खिलाफ बयान दिया था, जिससे अंतरराष्ट्रीय राजनीति में हलचल मच गई है. ट्रंप ने NATO देशों से अपील की है कि वे रूस से तेल खरीदने वाले देशों पर 100 फीसदी तक टैरिफ लगाएं. इस पर चीन ने सख्त प्रतिक्रिया देते हुए कहा है कि ‘वह न तो युद्ध की साजिश रचता है और न ही इसमें शामिल होता है’ और उसका ट्रैक रिकॉर्ड साफ है. शनिवार को स्लोवेनिया दौरे पर पहुंचे चीन के विदेश मंत्री वांग यी ने कहा कि युद्ध कभी किसी समस्या का समाधान नहीं हो सकता. उन्होंने जोड़ा कि प्रतिबंध लगाने से हालात और जटिल हो जाते हैं. वांग यी का यह बयान तब आया जब ट्रंप ने रूस के खिलाफ सख्त आर्थिक कदम उठाने का आह्वान किया था.

दरअसल, रूस-यूक्रेन युद्ध के बीच हाल ही में रूसी ड्रोन पोलैंड के हवाई क्षेत्र में दाखिल हुए, जिसके बाद NATO ने अनुच्छेद-4 लागू किया. इसी घटनाक्रम के बाद ट्रंप ने अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ट्रुथ सोशल पर लिखा- ‘यह वक्त है जब NATO देशों को पूरी ताकत से रूस का मुकाबला करना चाहिए. जब तक हर NATO देश रूस से तेल खरीदना बंद नहीं करता, हमारी स्थिति कमजोर बनी रहेगी. मैं तब तक बड़े प्रतिबंध लगाने के लिए तैयार हूं, जब सब देश इसमें शामिल हो जाएं.’ ट्रंप ने चीन को भी निशाने पर लेते हुए कहा कि अगर बीजिंग ने रूस से तेल खरीदना बंद नहीं किया तो वह चीनी सामान पर 100 फीसदी तक शुल्क लगाने में देर नहीं करेंगे.

टैरिफ लगाने पर क्या बोले थे ट्रंप
ऊर्जा एवं स्वच्छ वायु अनुसंधान केंद्र के अनुसार, चीन और भारत के बाद रूसी कच्चे तेल का नाटो सदस्य तुर्किये तीसरा सबसे बड़ा खरीदार रहा है. रूसी तेल खरीदने वाले 32 देशों के गठबंधन के अन्य सदस्यों में हंगरी और स्लोवाकिया भी शामिल हैं. ट्रंप ने अपने पोस्ट में कहा कि रूसी तेल पर नाटो की ओर से प्रतिबंध और चीन पर ‘टैरिफ’ लगाये जाने से ‘इस घातक, लेकिन हास्यास्पद युद्ध को समाप्त करने में भी बहुत मदद मिलेगी.’ भारत पर ट्रंप प्रशासन पहले ही करीब 50 फीसदी टैरिफ लगा चुका है. ट्रंप इसके पीछे रूसी तेल को वजह बता रहे हैं.

G-7 देशों पर भी बढ़ा रहे दबाव
हालांकि चीन ने साफ कर दिया है कि वह किसी भी तरह की साजिश, युद्ध या जबरन प्रतिबंध की राजनीति में नहीं फंसेगा. हाल ही में वांग यी ने अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो से बातचीत में भी कहा था कि अमेरिका और चीन को अपनी आर्थिक दिशा से भटकना नहीं चाहिए. इस बीच अमेरिका लगातार G7 देशों से भी रूस पर आर्थिक दबाव बढ़ाने को कह रहा है. अमेरिकी वित्त मंत्री स्कॉट बेसेंट ने कहा- ‘सिर्फ एकजुट होकर ही हम पुतिन की युद्ध मशीन को रोक सकते हैं. जब तक तेल और गैस से मिलने वाला राजस्व नहीं रुकेगा, युद्ध खत्म नहीं होगा.’

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